शोक प्रस्ताव पढ़ने में हुई मराठी की गलतियों पर विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने मांगी माफी

मुंबई /दि.24 – महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने सदन में शोक प्रस्ताव के वाचन के दौरान हुई मराठी भाषा संबंधी गलतियों पर खेद व्यक्त करते हुए माफी मांगी है. विधानसभा के मानसून अधिवेशन के दूसरे दिन उन्होंने स्वयं सदन में स्पष्टीकरण दिया और कहा कि यह त्रुटि पूरी तरह तकनीकी कारणों से हुई थी.
अध्यक्ष ने बताया कि शोक प्रस्ताव की जो प्रति उन्हें पढ़ने के लिए दी गई थी, वह स्पष्ट नहीं थी और उसका फॉन्ट भी बहुत छोटा था. दस्तावेज में कुछ त्रुटियां थीं, जिन पर शुरुआत में उनका ध्यान नहीं गया और उन्होंने उसे जैसा लिखा था वैसा ही पढ़ दिया. उन्होंने कहा कि इसके पीछे किसी प्रकार का अनादर या गलत भावना नहीं थी. राहुल नार्वेकर ने कहा कि पिछले साढ़े चार वर्षों से वे विधानसभा अध्यक्ष के रूप में कार्य कर रहे हैं और इस दौरान उन्होंने अनेक भाषण तथा शोक प्रस्ताव मराठी भाषा में ही प्रस्तुत किए हैं. उन्होंने कहा कि उन्हें भी मराठी भाषा पर उतना ही गर्व है जितना महाराष्ट्र के हर नागरिक को है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि दिवंगत गायिका आशा भोसले के प्रति किसी भी प्रकार का अनादर करने का प्रश्न ही नहीं उठता. यह केवल एक तकनीकी गलती थी, इसलिए इसका राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए. यदि इस घटना से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे इसके लिए दिल से माफी मांगते हैं.

* विपक्ष और नेताओं की प्रतिक्रिया
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राऊत ने कहा कि यदि विधानसभा अध्यक्ष को मराठी भाषा का पर्याप्त ज्ञान नहीं है तो उन्हें पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है. उन्होंने मराठी भाषा के अपमान का आरोप लगाते हुए माफी की मांग की. वहीं, राज ठाकरे ने भी नाराजगी जताई. उन्होंने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि शोक प्रस्ताव पढ़ते समय मराठी शब्दों के गलत उच्चारण और नामों में हुई त्रुटियों से मराठी भाषा का अपमान हुआ है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सदन में मौजूद किसी सदस्य ने उस समय आपत्ति क्यों नहीं जताई. इस पूरे विवाद के बाद राहुल नार्वेकर ने सदन में माफी मांगते हुए मामले को समाप्त करने का प्रयास किया.

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