नासिक टीसीएस धर्मांतरण प्रकरण पर विधान परिषद में हंगामा

चित्रा वाघ ने की कड़ी कार्रवाई की मांग, मुख्यमंत्री ने विशेष महिला समिति बनाने की घोषणा

मुंबई/दि.24- नासिक स्थित टीसीएस कार्यालय में कथित धर्मांतरण, मानसिक उत्पीड़न और महिला कर्मचारियों के शोषण के आरोपों को लेकर महाराष्ट्र विधान परिषद में बुधवार को तीखी चर्चा हुई. भाजपा नेता चित्रा वाघ ने यह मुद्दा उठाते हुए सरकार से कठोर कार्रवाई की मांग की. जवाब में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दोनों सदनों की महिला सदस्यों की एक विशेष समिति गठित करने की घोषणा की.
विधान परिषद में मुद्दा उठाते हुए भाजपा विधायक चित्रा वाघ ने आरोप लगाया कि अब धर्मांतरण के प्रयास केवल आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कॉर्पोरेट और आईटी क्षेत्र में कार्यरत शिक्षित महिलाओं को भी निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि कुछ मामलों में महिलाओं पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया गया और विरोध करने पर नौकरी तथा करियर बर्बाद करने की धमकियां दी गईं. उन्होंने नासिक की टाटा कन्सलटन्सी सर्विसेस तथा पुणे की विप्रो कंपनी से जुड़े कथित मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि महिला सुरक्षा से संबंधित कानून और आंतरिक शिकायत समितियां प्रभावी ढंग से काम नहीं कर रही हैं. उन्होंने दोषियों को ब्लैकलिस्ट करने तथा ऐसे मामलों में कठोर कानूनी धाराएं लगाने की मांग की.
इस मुददे पर हुए चर्चा में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि नासिक मामले में प्रबंधन द्वारा समय पर कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण संबंधित प्रबंधक को आरोपी बनाया गया है और कई मामले दर्ज किए गए हैं. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में कंपनी का प्रत्यक्ष रूप से शामिल होना सामने नहीं आया है और कंपनी जांच में सहयोग कर रही है. मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि सरकार के संज्ञान में ऐसे कुछ मामले आए हैं जिनमें महिलाओं के उत्पीड़न और कथित धर्मांतरण से जुड़ी शिकायतें हैं. उन्होंने माना कि निजी कार्यस्थलों और विशेषकर रात्रिकालीन शिफ्टों में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा के लिए मौजूदा प्रावधानों की समीक्षा आवश्यक है. इसी उद्देश्य से विधानसभा और विधान परिषद की महिला सदस्यों को शामिल करते हुए एक विशेष समिति गठित की जाएगी, जो ऐसे मामलों का अध्ययन कर आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक सुधारों की सिफारिश करेगी.
* मनीषा कायंदे ने भी उठाए अन्य मामले
चर्चा के दौरान विधायक मनीषा कायंदे ने भी कुछ अन्य संस्थानों और कंपनियों से जुड़ी शिकायतों का उल्लेख करते हुए महिला कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने की आवश्यकता बताई. उन्होंने कहा कि महिलाओं द्वारा की गई शिकायतों का निष्पक्ष और समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित होना चाहिए. विधान परिषद में हुई इस चर्चा के बाद कॉर्पोरेट और आईटी क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं की सुरक्षा, कार्यस्थल पर उत्पीड़न की रोकथाम तथा शिकायत निवारण प्रणाली को लेकर बहस तेज हो गई है. विशेष महिला समिति के गठन की घोषणा को इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. सरकार की ओर से कहा गया है कि समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कानूनी संशोधन और नई सुरक्षा व्यवस्थाओं पर निर्णय लिया जाएगा, ताकि निजी क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को सुरक्षित और निष्पक्ष कार्य वातावरण उपलब्ध कराया जा सके.

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