दर्यापुर क्षेत्र की नदियों के पुनर्जीवन के लिए सांसद डॉ. अनिल बोंडे का मास्टर प्लान
मुख्यमंत्री फडणवीस सहित संबंधित मंत्रियों को सौंपेंगे विस्तृत प्रस्ताव

* जल संसाधन विभाग को तकनीकी सर्वेक्षण के निर्देश
अमरावती/दि.30– जिले के दर्यापुर-अंजनगांव सुर्जी विधानसभा क्षेत्र में जल संकट, भूजल स्तर में लगातार गिरावट, बढ़ती लवणता तथा बाढ़ जैसी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए राज्यसभा सांसद एवं पूर्व कृषि मंत्री डॉ. अनिल बोंडे ने क्षेत्र की प्रमुख नदियों के पुनर्जीवन का महत्वाकांक्षी मास्टर प्लान तैयार किया है. इस योजना के तहत पूर्णा, चंद्रभागा, भुलेश्वरी, सापन और शाहनूर नदियों का वैज्ञानिक पद्धति से पुनरुद्धार, गहरीकरण, चौड़ीकरण तथा गाद निकासी करने का प्रस्ताव रखा गया है.
सांसद डॉ. बोंडे ने इस संबंध में जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंताओं को विस्तृत पत्र भेजकर तकनीकी सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही उन्होंने इस परियोजना को राज्य सरकार की प्राथमिकता में शामिल करने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल तथा मंत्री गिरीश महाजन को विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत करने की घोषणा की है.
* नदियों की जलधारण क्षमता हुई कमजोर
दर्यापुर और अंजनगांव सुर्जी क्षेत्र को विदर्भ के प्रमुख लवणीय (सैलिनिटी) क्षेत्रों में माना जाता है. पिछले कई वर्षों से नदियों में भारी मात्रा में गाद जमा होने, अतिक्रमण बढ़ने तथा जल प्रवाह बाधित होने के कारण उनकी प्राकृतिक जलधारण क्षमता प्रभावित हुई है. परिणामस्वरूप वर्षा का जल पर्याप्त मात्रा में भूगर्भ में नहीं पहुंच पाता और भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है. इससे क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई संकट भी गहराता जा रहा है.
* बाढ़ नियंत्रण और जल संरक्षण पर विशेष जोर
सांसद डॉ. बोंडे के प्रस्ताव में नदियों के पुनर्जीवन को केवल जल संरक्षण तक सीमित न रखकर बाढ़ नियंत्रण से भी जोड़ा गया है. उनका कहना है कि गाद जमा होने के कारण मानसून के दौरान नदियों का पानी तटों से बाहर निकलकर गांवों और खेतों में पहुंच जाता है, जिससे किसानों को हर वर्ष भारी नुकसान उठाना पड़ता है. इसी समस्या के समाधान के लिए उन्होंने भूजल सर्वेक्षण एवं विकास एजेंसी (जीएसडीए) तथा अन्य विशेषज्ञ संस्थाओं के माध्यम से संयुक्त अध्ययन समिति गठित करने और एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने की मांग की है. प्रस्तावित परियोजना को चरणबद्ध और समयबद्ध कार्यक्रम के तहत लागू करने की योजना बनाई गई है.
* सात प्रमुख लाभ होंगे प्राप्त
सांसद डॉ. बोंडे के अनुसार नदियों के पुनर्जीवन से क्षेत्र को कई दीर्घकालीन लाभ प्राप्त होंगे. इससे भूजल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, भूजल की लवणता कम होगी तथा पानी की गुणवत्ता में सुधार आएगा. कुओं और बोरवेल का प्राकृतिक रिचार्ज बढ़ेगा तथा सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होने से कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी. इसके अलावा भविष्य में सूखे के प्रभाव को कम करने, मानसून के दौरान जल निकासी को सुचारु बनाने, बाढ़ की स्थिति नियंत्रित करने तथा पर्यावरणीय संतुलन और जैव विविधता को बढ़ावा देने में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
* प्रमुख मांगें
सांसद डॉ. बोंडे ने परियोजना के लिए तीन प्रमुख मांगें रखी हैं. इनमें पूर्णा, चंद्रभागा, भुलेश्वरी, सापन और शाहनूर नदियों की लंबाई, गहराई और तलछट (सेडिमेंट) का विस्तृत तकनीकी सर्वेक्षण, लवणीय क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों के अध्ययन के लिए विशेषज्ञ समिति का गठन तथा परियोजना के लिए बजट तैयार कर शीघ्र प्रशासनिक मंजूरी हेतु प्रस्ताव सरकार को भेजना शामिल है.
* जल सुरक्षा और कृषि विकास का आधार हैं नदियां
सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने कहा कि दर्यापुर-अंजनगांव सुर्जी क्षेत्र की जल सुरक्षा और कृषि विकास यहां की नदियों की स्थिति पर निर्भर करता है. गाद और अतिक्रमण के कारण नदियों की हालत चिंताजनक हो गई है तथा लवणीय क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई का संकट लगातार बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए नदियों के पुनर्जीवन की व्यापक योजना तैयार की जा रही है और इसके लिए राज्य सरकार से विशेष निधि तथा मंजूरी प्राप्त कर परियोजना को युद्धस्तर पर लागू किया जाएगा.
* क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगी योजना
पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेता बालासाहेब हिंगणीकर ने सांसद डॉ. बोंडे की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि क्षेत्र में गाद जमाव और बढ़ती लवणता के कारण सिंचाई तथा जल सुरक्षा की समस्या लंबे समय से बनी हुई है. यदि यह मास्टर प्लान साकार होता है तो न केवल नदियों को नया जीवन मिलेगा, बल्कि भूजल स्तर में वृद्धि, पेयजल उपलब्धता और कृषि विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे. उन्होंने इसे क्षेत्र के विकास के लिए ऐतिहासिक और दूरगामी कदम बताया.





