अमरावती में विद्वता के एक युग का अस्त

पं. देवदत्तजी शर्मा नहीं रहे

* अंतिम संस्कार कल
अमरावती/दि.1- अमरावती शहर में अपनी मेधा व विद्वता के लिए विख्यात रहनेवाले पं. देवदत्तजी रामनारायणजी शर्मा का आज सुबह अकस्मात ही अवसान हो गया. वे 73 वर्ष की आयु के थे. उनके निधन का समाचार मिलते ही शहर के धार्मिक व सामाजिक क्षेत्र में जबरदस्त शोक की लहर व्याप्त हो गई. शर्मा परिवार के सुत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पं. देवदत्तजी शर्मा की अंतिम यात्रा कार्टन मार्केट रोड पर हार्वे कंपाउंड परिसर स्थित उनके निवास स्थान से कल गुरूवार 2 जुलाई को सुबह 10 बजे निकाली जाएगी तथा स्थानिय हिंदु मोक्षधाम वैदिक विधि विधान के साथ उनके पार्थिव पर अंतिम संस्कार किए जाएंगे.
पं. देवदत्तजी शर्मा विगत लंबे समय से राजस्थानी हितकारक मंडल के साथ भी जुडे हुए थे. और इस संरक्षक के तौर पर अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे थे. इसके साथ ही कई धार्मिक व सामाजिक संस्थाओं के साथ गहरा जुडाव रखनेवाले पं. देवदत्तजी शर्मा को गायत्री यज्ञ में महारत हासिल थी और वे वेदों के भी ज्ञाता थे. आर्य समाज की परंपराओं एवं परिपाटी का आजीवन बेहत कडाई के साथ पालन करनेवाले पं. देवदत्तजी शर्मा व्दारा संस्कृतनिष्ठ हिंदी का हमेशा ही बोलचाल में प्रयोग किया जाता था और वे स्वयं एक प्रखर व ओजस्वी वक्ता भी थे. साथ ही उनके राम मंदिर न्यास (अयोध्या) के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज तथा प्रखर वक्ता आचार्य वागीशजी के साथ मधुर संबंध रहे. जिन्हें पं. देवदत्तजी शर्मा ने कई बार अमरावती लाकर उनका उद्बोधन भी कराया.इसके अलावा पं. देवदत्तजी शर्मा नई पीढी को वेदों व श्रीमद् भगवत गीता सहित सनातनी संस्कारों से परिचित कराने हेतु विभिन्न तरह के आयोजनों व उपक्रमों में भी सक्रिय रहा करते थे.
दिवंगत पं. देवदत्तजी शर्मा अपने पश्चात दो भाई पं.ब्रम्हदत्त व पं. सोमदत्त शर्मा, भतीजे एड. यज्ञेश व निधीश शर्मा सहित भरापूर परिवार शोकाकुल छोड गए है.

*राजस्थानी समाज ने खोया अपना मार्गदर्शक
पं. देवदत्तजी शर्मा ने निधन पर अपनी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए राजस्थानी हितकारक मंडल के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने कहा कि, आज राजस्थानी समाज ने अपने एक विचारवंत मार्गदर्शक को खो दिया है. पं. देवदत्तजी शर्मा विगत 5 दशकों से भी अधिक समय से राजस्थानी हितकारक मंडल के साथ जुडे रहे और उन्होंने कई अलग-अलग अध्यक्षों को मार्गदर्शन देने का कार्य किया. यह हमारा सौभाग्य रहा कि, हमें उन जैसे अनुभवी व्यक्ति के मार्गदर्शन तले काम करने का अवसर मिला. भविष्य में पं. देवदत्तजी शर्मा की कमी निश्चित रूप से खलेगी. उनके चले जाने से राजस्थानी समाज में अपूरणीय क्षति हुई है.

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