अमरावती संभाग शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में चुनावी सरगर्मी शुरू
शिक्षक विधायक किरण सरनाईक का 6 दिसंबर को खत्म होगा कायर्र्र्काल

* नागपुर सत्र में नहीं रहेंगे सदन का हिस्सा, गतरोज ही सदन से दी गई विदाई
* अक्टूबर या नवंबर माह में चुनाव कराए जाने की पूरी संभावना, इच्छुकों की मोर्चाबंदी शुरू
* इस बार महायुती में टिकट के लिए जमकर होगी रस्साकशीं, राजनीतिक समिकरण बदले
अमरावती/दि.11 – अमरावती संभाग के शिक्षक विधायक किरण सरनाईक का 6 वर्षीय कार्यकाल आगामी 6 दिसंबर 2026 को खत्म होने जा रहा है. जिसके चलते वे दिसंबर माह के दौरान नागपुर में होनेवाले विधानभवन के शीत सत्र का हिस्सा नहीं रहेंगे. इस बात के मद्देनजर कल विधान मंडल के पावस सत्र के अंतिम दिन विधायक किरण सरनाईक को सदन से विदाई दी गई. इसके साथ ही अब यह संभावना जताई जा रही है कि, संभाग के अगले शिक्षक विधायक का चयन करने हेतुु आगामी अक्टुबर या नवंबर माह के दौरान संभाग में चुनाव कराया जा सकता है. जिसके लिए इच्छुकों द्वारा अभी से तैयारियों के साथ-साथ लॉबिंग व फिल्डींग करनी शुरू कर दी गई है.
बता दे कि, अमरावती संभाग के पांचों जिलों में करीब 30 हजार शिक्षकों द्वारा विधान परिषद में अपना प्रतिनिधी भेजने हेतु मताधिकार का प्रयोग किया जाना है. जिन तक पहुंचना सभी इच्छुक प्रतिनिधियों के लिए काफी चुनौतिपूर्ण कार्य रहता है. ऐसे में अभी भले ही मौजुदा शिक्षक विधायक किरण सरनाईक का कार्यकाल खत्म होने में 4 माह का समय शेष है और इसी दौरान संभागीय शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव भी कराए जाना है. जिसके लिए नए सिरे से शिक्षकों का पंजियन करते हुए नई मतदाता सूचियां तैयार करने का काम भी किया जाएगा. जिसे ध्यान में रखते हुए चुनाव लडने के इच्छुक प्रत्याशियों द्वारा अभी से ही अपनी तैयारियां करनी शुरू कर दी गई है.
यद्यपि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव कुछ वर्ष पहले तक मुख्य धारा की राजनीति से बिल्कुल अलग-थलग रहा करता था तथा इस निर्वाचन क्षेत्र पर शिक्षक संगठनों का दबदबा हुआ करता था. परंतु बिते कुछ वर्षों से इस चुनाव पर भी राजनीति हावी होने लगी और राजनीतिक दलों का इस चुनाव के साथ जुडाव होने लगा है. ऐसे में अब यह देखना काफी दिलचस्प होगा की इस बार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में किस तरह के राजनीतिक समिकरण बनते है. उल्लेखनिय है कि मौजुदा शिक्षक विधायक किरण सरनाईक ने अपना पिछला चुनाव कांग्रेस व तत्कालिन एकिकृत राकांपा के समर्थन से निर्दलिय प्रत्याशी के तौर पर जीता था और उन्हें राकांपा प्रमुख शरद पवार का काफी नजदिकी भी माना जाता था. परंतु तीन दिन पहले ही किरण सरनाईक ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए शिवसेना को अपना समर्थन घोषित कर दिया है. इसके साथ ही अब अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में महायुती के भीतर ही दिलचस्प राजनीतिक स्थिती बन गई है.
बता दे कि, इस बार भाजपा द्वारा अमरावती के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट पर अपना दावा ठोका जाएगा तथा भाजपा की ओर से इस सीट पर दावेदारी हेतु संगीता शिंदे व शेखर भोयर के नाम सबसे प्रमुख माने जा रहे है. भाजपा नेता व राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल बोंडे की बहन संगीता शिंदे विगत 15-20 वर्षों से शिक्षक संघर्ष समिती के जरीए इस निर्वाचन क्षेत्र में काम कर रही है और इससे पहले स्वतंत्र प्रत्याशी के तौर पर चुनाव भी लड चुकी है. इसके चलते उन्हें इस बार अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा का प्रबल दावेदार माना जा रहा है. वहीं दूसरी ओर विगत कई वर्षों से शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कार्यरत रहने के साथ-साथ इस निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव भी लड चुके शेखर भोयर भी इस बार भाजपा में शामिल है और टिकट के दावेदार है. पूर्व विधायक सुरेंद्र भोयर तथा तिवसा निर्वाचन क्षेत्र के भाजपा विधायक राजेश वानखडे के रिश्तेदार रहनेवाले शेखर भोयर ने पिछली बार के चुनाव में अच्छे खासे वोट बटोरे थे. जिसके चलते इस बार भी उनकी दावेदारी में दम माना जा रहा है.
उधर अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए अब महायुती में शामिल शिंदे गुटवाली शिवसेना में भी कफी रोचक स्थिती बन गई है. खासबात यह है कि, जहां इस निर्वाचन क्षेत्र के मौजुदा विधायक किरण सरनाईक ने अभी हाल फिलहाल ही शिंदे गुट वाली शिवसेना का दामन थामा है. वहीं इससे पहले इस निर्वाचन क्षेत्र का विधान परिषद में प्रतिनिधित्व कर चुके और पिछले चुनाव में किरण सरनाईक के हाथों पराजीत होकर दूसरे स्थान पर रहे पूर्व विधायक प्रा. श्रीकांत देशपांडे लंबे समय से कट्टर शिवसैनिक रहे है. जिन्हें शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के खास सिपहसालारो में भी गिना जाता था. शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में वर्ष 2020 में हुए चुनाव के बाद जब जून 2022 के दौरान शिवसेना में शिंदे गुट द्वारा की गई बगावत के बाद पार्टी दो धडों में विभाजीत हुई तो पूर्व विधायक प्रा. श्रीकांत देशपांडे ने शिंदे गुट वाली शिवसेना का समर्थन किया था और वे तब से लेकर अब तक शिंदे गुटवाली शिवसेना में ही है. यानी पिछले चुनाव में एक-दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंदी रहे किरण सरनाईक व प्रा. श्रीकांत देशपांडे अब एक ही नाव में सवार है. जिनके द्वारा जाहिर तौर पर पार्टी प्रमुख व उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के समक्ष खुद को दावेदारी मिलने हेतु दावा पेश किया जाएगा.
ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि, महायुती के तहत अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीट भाजपा या शिवसेना में से किसके हिस्से में छुटती है और जिस पार्टी के कोटे में यह सीट छूटेगी, उस पार्टी द्वारा इस सीट पर किसे अपना दावेदार बनाया जाता है.