राज्य में 2.45 करोड रूपयों का ‘एसिलॉक’ का दवाई का स्टॉक जब्त
तुकाराम मुंढे की बडी कार्रवाई, बाजार से स्टॉक वापिस बुलाने का आदेश

नागपूर /दि.11- महाराष्ट्र के अन्न एवं औषध प्रशासन (एफडीए) ने मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्यभर में 2 करोड़ 45 लाख रुपये से अधिक मूल्य के ‘अॅसिलॉक’ दवा स्टॉक की बिक्री और वितरण पर रोक लगा दी है. एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे के निर्देश पर पुणे, नागपुर और भिवंडी में कार्रवाई करते हुए संबंधित दवा का बड़ा स्टॉक जब्त किया गया है तथा कंपनी को तत्काल बाजार से पूरा स्टॉक वापस मंगाने के आदेश दिए गए हैं. एफडीए के अनुसार यह कार्रवाई दवा के नाम, पैकेजिंग और औषधीय घटकों को लेकर संभावित भ्रम की स्थिति उत्पन्न होने के कारण की गई है. विभाग का मानना है कि इससे डॉक्टरों, दवा विक्रेताओं और मरीजों के बीच गलतफहमी पैदा हो सकती थी, जिससे गलत दवा उपयोग का गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता था.
* नाम एक जैसा, दवा का घटक अलग
जांच के दौरान एफडीए अधिकारियों ने पाया कि पहले से बाजार में उपलब्ध एक दवा में एक विशेष औषधीय घटक का उपयोग किया जाता था. बाद में उसी नाम के साथ केवल एक अतिरिक्त शब्द या चिह्न जोड़कर बाजार में नया उत्पाद उतारा गया, लेकिन उसमें पूरी तरह अलग औषधीय घटक का उपयोग किया गया था. चिंताजनक बात यह रही कि नई दवा का नाम, पैकेजिंग, रंग-संयोजन और छपाई पुराने उत्पाद से काफी मिलती-जुलती थी. ऐसे में डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा, मेडिकल स्टोर पर दी जाने वाली दवा अथवा मरीज द्वारा खरीदी जाने वाली दवा में भ्रम की संभावना बढ़ गई थी. एफडीए का मानना है कि ऐसी स्थिति में मरीज को इच्छित दवा के बजाय दूसरी दवा मिल सकती थी, जिससे उपचार प्रभावित होने या स्वास्थ्य संबंधी जोखिम उत्पन्न होने की आशंका थी.
* तीन शहरों में 2.45 करोड़ रुपये का स्टॉक जब्त
एफडीए की कार्रवाई के तहत राज्य में कुल 2 करोड़ 45 लाख 37 हजार 490 रुपये मूल्य का दवा स्टॉक जब्त किया गया. जिसके तहत पुणे में लगभग 89 लाख 45 हजार रुपये का स्टॉक, नागपुर में लगभग 98 लाख 71 हजार रुपये का स्टॉक व भिवंडी में लगभग 57 लाख 20 हजार रुपये का स्टॉक जब्त किया गया. विभाग ने इस पूरे स्टॉक की बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है.
* मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए कार्रवाई
एफडीए अधिकारियों के अनुसार पुरानी और नई दोनों दवाएं एक ही समय बाजार में उपलब्ध थीं. नाम और पैकेजिंग में समानता के कारण डॉक्टरों, फार्मासिस्टों और मरीजों के भ्रमित होने की संभावना थी. इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा मानते हुए विभाग ने एहतियाती कदम उठाया. विशेषज्ञों का कहना है कि दवा का नाम समान होने के बावजूद यदि उसमें प्रयुक्त औषधीय घटक अलग हो, तो मरीज को अपेक्षित उपचार नहीं मिल सकता. कुछ मामलों में इसके दुष्परिणाम भी सामने आ सकते हैं.
* कंपनी को रिकॉल के आदेश
एफडीए ने संबंधित दवा निर्माता कंपनी को बाजार में उपलब्ध पूरा स्टॉक तत्काल वापस मंगाने के निर्देश दिए हैं. इसके साथ ही कंपनी से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और जांच रिपोर्ट के आधार पर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
* तुकाराम मुंढे ने क्या कहा?
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कहा कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. यदि किसी दवा के नाम, पैकेजिंग या प्रस्तुतीकरण के कारण डॉक्टर, दवा विक्रेता अथवा मरीज भ्रमित होने की आशंका हो, तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर विषय बन जाता है. उन्होंने कहा कि औषधि निर्माण कंपनियों को दवा के नाम, लेबलिंग, पैकेजिंग और विपणन से जुड़े सभी नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए. सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवा उपलब्ध कराना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है तथा इस अधिकार से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा.
* नागरिकों और दवा विक्रेताओं से अपील
एफडीए ने नागरिकों, डॉक्टरों और दवा विक्रेताओं से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है. विभाग ने कहा है कि दवा खरीदते या वितरित करते समय केवल नाम नहीं, बल्कि उसमें मौजूद मुख्य औषधीय घटक की भी जांच की जानी चाहिए. विभाग ने सलाह दी है कि यदि किसी दवा के नाम या पैकेजिंग को लेकर संदेह हो तो डॉक्टर अथवा फार्मासिस्ट से परामर्श लें. साथ ही किसी भी संदिग्ध दवा या अनियमितता की जानकारी तुरंत एफडीए को दें.





