शहजाद भट्टी सोशल मीडिया कनेक्शन मामला
अमरावती के दोनों युवक पूछताछ के बाद रिहा

* दिनभर चली पूछताछ के बाद एटीएस को नहीं मिले ठोस सबूत
* पूछताछ के दौरान दोनों युवकों ने अनजान लिंक पर क्लिक करते ही एक ग्रुप से जुडने की बात कही
* एटीएस की टीम अकोला वापिस लौटी, डिजिटल फॉरेंसिक जांच जारी
* जांच में जरूरत पड़ने पर दोनों युवकों को दोबारा भी बुलाया जा सकता है
अमरावती/दि.11- पाकिस्तान के कथित गैंगस्टर शहजाद भट्टी से जुड़े सोशल मीडिया नेटवर्क की जांच के सिलसिले में महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दस्ता (एटीएस) द्वारा अमरावती जिले में की गई कार्रवाई के बाद पूछताछ के दायरे में आए दोनों युवकों को फिलहाल छोड़ दिया गया है. दिनभर चली गहन पूछताछ के बावजूद एटीएस के हाथ कोई ठोस या आपत्तिजनक सुराग नहीं लगा. हालांकि जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल फॉरेंसिक जांच पूरी होने तक मामला खुला रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर दोनों युवकों को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है.
बता दे कि, गुरुवार को अकोला एटीएस की दो अलग-अलग टीमों ने अमरावती जिले के माहुली जहांगीर तथा वलगांव थाना क्षेत्र के टाकरखेड़ा शंभू परिसर में एक साथ छापेमार कार्रवाई की थी. यह कार्रवाई पाकिस्तान में बैठे कथित गैंगस्टर शहजाद भट्टी से जुड़े सोशल मीडिया ग्रुपों और ऑनलाइन संपर्कों की जांच के तहत की गई थी.
* लिंक पर क्लिक होने से ग्रुप में जुड़ने का दावा
पूछताछ के दौरान दोनों युवकों ने एटीएस अधिकारियों को बताया कि उनके मोबाइल फोन पर एक लिंक आया था, जिस पर अनजाने में क्लिक हो गया. इसके बाद वे एक सोशल मीडिया अथवा व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ गए. युवकों का कहना है कि न तो वे उस ग्रुप के किसी सदस्य को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और न ही पाकिस्तान के कथित गैंगस्टर शहजाद भट्टी या उसके नेटवर्क से उनका कोई संबंध है. सूत्रों के अनुसार, एटीएस ने दोनों युवकों के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट, चैट हिस्ट्री, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल गतिविधियों की विस्तृत जांच की. प्रारंभिक स्तर पर कोई संदिग्ध संवाद, आर्थिक लेन-देन या राष्ट्रविरोधी गतिविधि सामने नहीं आई. इसके बाद दोनों को छोड़ दिया गया और एटीएस की टीम वापस अकोला लौट गई.
* डिजिटल जांच के बाद ही होगा अंतिम निर्णय
हालांकि एटीएस अधिकारियों का मानना है कि केवल प्रारंभिक पूछताछ के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा. जब्त किए गए डिजिटल डेटा का फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है. मोबाइल फोन, सोशल मीडिया गतिविधियों, आईपी लॉग, चैट रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित व्यक्तियों की भूमिका केवल ग्रुप सदस्य तक सीमित थी या वे किसी सक्रिय गतिविधि से जुड़े थे. जांच एजेंसियों का कहना है कि किसी सोशल मीडिया ग्रुप में शामिल होना अपने आप में अपराध नहीं है, लेकिन यदि जांच में किसी प्रकार की संदिग्ध भूमिका, संपर्क या आपत्तिजनक सामग्री सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी.
* विदर्भ के कई जिलों में एक साथ कार्रवाई
ज्ञात रहे कि, शहजाद भट्टी सोशल मीडिया कनेक्शन मामले में एटीएस ने केवल अमरावती ही नहीं, बल्कि विदर्भ और महाराष्ट्र के कई जिलों में एक साथ जांच अभियान चलाया है. मुंबई, ठाणे, नागपुर, वर्धा, गोंदिया, गढ़चिरोली, सातारा और अन्य स्थानों पर भी संदिग्ध सोशल मीडिया संपर्कों की जांच की जा रही है.
* गोंदिया की महिला ने कहा, मुझे तो मोबाइल चलाना भी ठीक से नहीं आता
गोंदिया जिले के पांढराबोडी गांव की 51 वर्षीय महिला से भी एटीएस ने पूछताछ की. महिला ने बताया कि वह अधिक पढ़ी-लिखी नहीं है और उसे मोबाइल तथा सोशल मीडिया का सीमित ज्ञान है. उसके अनुसार मोबाइल पर आए एक लिंक पर गलती से क्लिक हो गया था, जिसके बाद वह एक व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ गई. जांच में उसका किसी भी संदिग्ध गतिविधि या शहजाद भट्टी से कोई संबंध सामने नहीं आया.
* वर्धा और गढ़चिरोली में भी पूछताछ
वर्धा जिले के वडनेर क्षेत्र में एक युवक को एटीएस ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था. कई घंटे की जांच और मोबाइल परीक्षण के बाद उसे भी छोड़ दिया गया. इसी प्रकार गढ़चिरोली जिले की कुरखेड़ा तहसील के एक युवक से भी पूछताछ की गई. युवक ने किसी भी गैंग या आपराधिक नेटवर्क से संबंध होने से इनकार किया. उसके मोबाइल और लैपटॉप की जांच के बाद उसे भी फिलहाल राहत मिली है.
* अंतिम रिपोर्ट का इंतजार
सूत्रों के अनुसार, अब पूरी जांच का केंद्र डिजिटल फॉरेंसिक विश्लेषण है. एटीएस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संबंधित सोशल मीडिया ग्रुपों में जुड़े लोगों की भूमिका केवल तकनीकी रूप से जुड़ने तक सीमित थी या फिर किसी प्रकार का सक्रिय संपर्क और संवाद भी हुआ था. फिलहाल अमरावती के दोनों युवकों सहित विदर्भ के अधिकांश लोगों का यही दावा है कि वे केवल गलती से आए लिंक पर क्लिक करने के कारण संबंधित ग्रुपों में जुड़े थे. प्रारंभिक जांच में उनके खिलाफ कोई आपत्तिजनक तथ्य सामने नहीं आया है, लेकिन एटीएस की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.





