राम मंदिर की आलोचना करनेवाले पढ रहे रामरक्षा स्त्रोत
डेप्युटी सीएम शिंदे ने साधा उध्दव ठाकरे पर निशाना

नागपुर/दि.11 – जिन लोगों ने शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे के हिंदुत्ववादी विचारों को त्यागते हुए अयोध्या में साकार राम जन्मभूमि मंदिर की आलोचना की थी. आज वहीं लोग सडकों पर उतरकर रामरक्षा स्त्रोत का पाठ कर रहे है. इसे या तो मजाक समझा जा सकता है या फिर देर से सुझी समझदारी कहा जा सकता है. इस आशय के शब्दों में राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना उबाठा के पार्टी प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री उध्दव ठाकरे पर निशाना साधा.
आज नागपुर में मीडिया कर्मियों के साथ संवाद साधते हुए डेप्युटी सीएम एकनाथ शिंदे ने किसान कर्जमाफी, उध्दव ठाकरे, शरद पवार जैसे विषयों के साथ ही शिवसेना की संगठनात्मक मजबुती तथा विपक्षियों की भूमिका पर अपनी बात रखी. इस समय उध्दव ठाकरे के प्रस्तावित रामरक्षा पाठ की जबरदस्त आलोचना करते हुए डेप्युटी सीएम शिंदे ने कहा कि, उध्दव ठाकरे ने जिस दिन बालासाहब ठाकरे के विचारों को छोडकर कांग्रेस के साथ हाथ मिलाया था उसी दिन उनका हिंदुत्व खत्म हो गया था. सबसे बडी बात यह है कि, कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने के बाद उध्दव ठाकरे ने अयोध्या में साकार राम जन्मभूमि मंदिर को लेकर हमेशा ही विरोधी भूमिका अपनायी तथा हनुमान चालिसा का पाठ करनेवालों को जेल में डाला. ऐसे में अब उनके द्वारा रामरक्षा स्त्रोत का पाठ करने की बात कहना किसी ढोंग से ज्यादा कुछ नहीं है.
इसके साथ ही उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने किसान कर्जमाफी को लेकर कहा कि महायुती सरकार हमेशा से ही किसानों के साथ खडी है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अंतिम सप्ताह प्रस्ताव पर दिए गए जवाब में कर्जमाफी योजना से शर्तों को हटाने की घोषणा की. जिसके चलते दो लाख रूपयों तक का कर्ज रहनेवाले लाखों किसानों को काफी बडी राहत मिलेगी.
इस समय राकांपा प्रमुख शरद पवार द्वारा कर्जमाफी के निर्णय की प्रशंसा किए जाने की बात का उल्लेख करते हुए डेप्युटी सीएम शिंदे ने कहा कि, शरद पवार काफी वरिष्ठ नेता है तथा उनकी वृत्ती अच्छे निर्णय को अच्छा कहने की रही है. परंतु कुछ विरोधी नेता सरकार के अच्छे कामों की आलोचना ही करते है. जिन्हें शरद पवार ने योग्य जवाब दिया है. इसके अलावा पार्टी के विस्तार के बारे में मीडिया से बातचित करते हुए डेप्युटी सीएम शिंदे ने कहा कि, पार्टी के विस्तार हेतु हमेशा ही कुछ राजनीतिक समिकरणों को साधना पडता है. यदि पार्टी का विस्तार होता है तो सभी कार्यकर्ताओं को अवसर मिलते है. शिवसेना में सभी कार्यकर्ताओं को उनकी क्षमता व योग्यता के अनुसार अवसर प्रदान किए जाते है. यही वजह है कि अब कई लोग इसी विश्वास के साथ पार्टी में प्रवेश कर रहे है.





