चौड़ी सड़क बनी, लेकिन सुरक्षा और मार्गदर्शन की व्यवस्था क्यों नहीं थी?

जेजुरी हादसे के बाद उठा सवाल

जेजुरी/दि.14 – संत ज्ञानेश्वर महाराज पालखी सोहळे के दौरान सोमवार को जेजुरी के पास हुए भीषण सड़क हादसे, जिसमें तीन महिला वारकरियों की मौत और सात श्रद्धालु घायल हुए, के बाद प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था और योजना पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. वारकरी और स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च कर पुणे-पंढरपुर पालखी मार्ग को चौड़ा तो किया गया, लेकिन श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं नहीं की गईं.
वारकरियों का कहना है कि वारी के प्रत्येक पड़ाव पर अगले दिन की यात्रा, समय और मार्ग की जानकारी दी जाती है. लेकिन इस बार जेजुरी मार्ग पर यह स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए कि श्रद्धालु केवल डिवाइडर की बाईं ओर से चलें, क्योंकि उसी मार्ग से पालखी रथ गुजरने वाला था, जबकि डिवाइडर की दाईं ओर का मार्ग केवल वारी के वाहनों के लिए आरक्षित था. श्रद्धालुओं का आरोप है कि मार्ग पर पर्याप्त दिशा-सूचक बोर्ड, बैरिकेडिंग और लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार घोषणाएं भी नहीं की गईं. इसके कारण कई वारकरी मुख्य सड़क, सर्विस रोड और दोनों लेन से चलते रहे, जिससे यातायात प्रभावित हुआ और दुर्घटना का खतरा बढ़ गया.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई स्थानों पर फ्लाईओवर होने के बावजूद श्रद्धालु पुल के नीचे वाले मार्ग से गुजर रहे थे. ऐसे में पुल से तेज गति से उतरने वाले वाहनों के सामने अचानक बड़ी संख्या में वारकरी आ जाते थे. स्थानीय लोगों का कहना है कि संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल, स्वयंसेवकों और प्रभावी यातायात नियंत्रण की व्यवस्था नहीं थी. वारकरी संप्रदाय के वरिष्ठ सदस्यों ने कहा कि केवल चौड़ी सड़क बना देना पर्याप्त नहीं है. सुरक्षित वारी के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश, अनुशासित यातायात व्यवस्था और सख्त सुरक्षा प्रबंधन जरूरी है. उनका आरोप है कि प्रशासन इन पहलुओं पर अपेक्षित तैयारी नहीं कर सका. हादसे के बाद वारी मार्ग की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अलग सुरक्षा योजना तैयार करने की मांग तेज हो गई है.

 

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