योग्य नियोजन, आत्मविश्वास के बल पर विद्यार्थी अपने स्वप्न साकार कर सकते हैं

प्रा. डॉ. नरेशचंद्र काठोले का प्रतिपादन

अमरावती /दि.14- ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों में प्रशासकीय सेवा में सफल होने की अपार क्षमता है. बडे सपने देखकर सतत परिश्रम, योग्य नियोजन और आत्मविश्वास के बल पर सफलता प्राप्त की जा सकती है. स्पर्धा परीक्षा के लिए आज से ही तैयारी शुरु करने पर सफलता निश्चित रुप से मिलेगी, ऐसा प्रतिपादन मिशन आईएएस अकादमी के संचालक प्रा. डॉ. नरेशचंद्र काठोले ने किया. वे जिला परिषद माध्यमिक शाला व कनिष्ठ महाविद्यालय में आयोजित मेधावी विद्यार्थियों के सत्कार समारोह में अध्यक्ष के तौर पर बोल रहे थे.
प्रा. डॉ. काठोले ने कहा कि, आज के स्पर्धा के युग में केवल अंक हासिल करना जरुरी नहीं, बल्कि करिअर की योग्य दिशा और ध्येय निश्चित करना आवश्यक है. 10 वीं और 12 वीं के बाद विद्यार्थियों ने प्रशासकीय सेवा के लिए योग्य नियोजन किया, तो कम समय में वे सफलता हासिल कर सकते है. ग्रामीण क्षेत्र के अनेक विद्यार्थी कडे परिश्रम और जिद्द के बल पर आईएएस, आईपीएस जैसे बडे पदों पर पहुंचे है, ऐसा कहकर उन्होंने विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढाया. उनके मार्गदर्शन की वजह से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास निर्माण हुआ. सभी विद्यार्थियों ने स्पर्धा परीक्षा द्वारा प्रशासकीय सेवा में जाने का निर्धार व्यक्त किया.
सफलता का कोई भी शॉर्टकट नहीं रहता. नियमित अभ्यास, समय का नियोजन और सकारात्मक दृष्टिकोन के बल पर प्रत्येक विद्यार्थी अपना सपना साकार कर सकता है, ऐसा मौलिक संदेश देते हुए प्रा. डॉ. काठोले ने विद्यार्थियों को उज्वल भविष्य की शुभकामना दी. कार्यक्रम में पूर्व विद्यार्थी संघ अध्यक्ष नितिन हटवार, उपाध्यक्ष अरुण राऊत, प्राचार्य देवेंद्र ठाकरे, सार्वजनिक वाचनालय के सचिव राजन देशमुख, प्रा. मोरेश्वर इंगले, विजय कापडे, अविनाश यावले, मनोज मोरे, दिनकर सुंदरकर उपस्थित थे.
कार्यक्रम में 12 वीं परीक्षा में प्राविण्य सूची में आनेवाली आरती डोईफोडे, मुस्कान खरुले, धनश्री रघुवंशी सहित 10 वीं कक्षा की छात्रा राधिका पाटिल, चैताली राजगुरे, स्वरा देशमुख, समृद्धि पलसकर, श्रद्धा वानखेडे, श्रुती रामटेके, रोहित गायगोले, भाविका बोपले, कांचन महानकर, भुवनेश्वरी आखरे, क्रिश ढेवले सानवी सुंदरकर, गौरी समरित, देवानंद भोजने, पायल जामोदकर का मान्यवरों के हस्ते सत्कार किया गया. कार्यक्रम का संचालन आशिया शेख पठान व ज्योति नारखेडे ने किया तथा प्रास्ताविक डॉ. जयश्री इंगले ने रखा व आभार अंबादास बनसोड ने माना.

Back to top button