दुध मिलावट करने वालों पर अब 10 लाख तक जुर्माना, उम्रकैद भी
दुध उत्पादकों से लेकर ग्राहकों के घर तक पहुंचाने वालों पर एफडीए की नजर

अमरावती/दि.16– राज्य में मिलावटी और नकली दूध की बढ़ती शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने दूध की पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर सख्त निगरानी शुरू कर दी है. खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत दूध में मिलावट करने वालों पर 10 लाख रुपये तक जुर्माना और गंभीर मामलों में उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है.
एफडीए के अनुसार, नए नियम दूध व्यवसाय से जुड़े हर स्तर पर लागू होंगे. इसमें प्राथमिक दूध संग्रह केंद्र, मिल्क कूलिंग सेंटर, दूध प्रसंस्करण इकाइयां, डेयरी फार्म, दूध परिवहन करने वाले टैंकर और ट्रक, स्थानीय दूध विक्रेता तथा डेयरी संचालक शामिल हैं.
* कई तरह से की जाती है मिलावट
जांच में सामने आया है कि अधिक मुनाफा कमाने के लिए दूध में केवल पानी ही नहीं, बल्कि उसे गाढ़ा दिखाने के लिए यूरिया, स्टार्च और कॉस्टिक सोडा जैसी हानिकारक सामग्री भी मिलाई जाती है. इसके अलावा पानी, रिफाइंड तेल, डिटर्जेंट, सफेद रंग और अन्य रसायनों का उपयोग कर नकली दूध तैयार किए जाने की शिकायतें भी मिली हैं.
* स्वास्थ्य पर गंभीर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, मिलावटी दूध का सेवन करने से पेट दर्द, उल्टी, दस्त, फूड पॉइजनिंग, लिवर और किडनी संबंधी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. लंबे समय तक ऐसे दूध का सेवन करने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है.
* डेयरी पर जांच अभियान तेज
एफडीए ने शहर में डेयरियों और दूध विक्रेताओं के खिलाफ विशेष जांच अभियान शुरू किया है. पिछले एक सप्ताह में 10 डेयरियों का निरीक्षण किया गया तथा दूध, दही, पनीर सहित 10 डेयरी उत्पादों के नमूने प्रयोगशाला जांच के लिए भेजे गए हैं. राज्यभर में उपभोक्ताओं को शुद्ध और सुरक्षित दूध उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वच्छ दूध-सुरक्षित स्वास्थ्य-मिलावट मुक्त महाराष्ट्र अभियान भी चलाया जा रहा है. इसके तहत डेयरी संचालकों को खाद्य सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं. एफडीए अमरावती के खाद्य सुरक्षा अधिकारी गजानन गोरे ने कहा कि उपभोक्ताओं तक शुद्ध दूध पहुंचाना विभाग की प्राथमिकता है और मिलावट करने वालों के खिलाफ बिना किसी ढील के कार्रवाई जारी रहेगी.





