प्रश्नोत्तरकाल की पारदर्शकता पर सांसद वानखडे ने उठाया सवाल

लोकसभा अध्यक्ष के पास दी लिखित शिकायत

अमरावती /दि.22- सांसद बलवंत वानखडे ने लोकसभा में प्रश्नोत्तरकाल से संबंधित गंभीर मुद्दा उपस्थित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक लिखित निवेदन सौंपा है. जिसमें 20 जुलाई को लोकसभा की प्रश्नसूचित तारांकित प्रश्नों के लिए बैलेट प्रक्रिया में नाम निश्चित रहने के बावजूद अंतिम प्रश्नसूचित से अपना नाम बिना किसी पूर्व सूचना और कोई कारण न बताते हुए हटा दिए जाने को लेकर शिकायत की गई है.
सांसद बलवंत वानखडे ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से देश की परिक्षाओं से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर सवाल पुछने हेतु सूचना दी थी. नियमानुसार 6 जुलाई को ही बैलेट प्रक्रिया में उनके नाम का चयन 20 जुलाई को तारांकित प्रश्न क्रमांक 3 के लिए किया गया था. इससे संबंधित अधिकृत बैलेट परिणाम भी उपलब्ध है. जिसकी प्रमाणित प्रत सांसद बलवंत वानखडे द्वारा लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत की गई है. परंतु 20 जुलाई को प्रकाशित अंतिम प्रश्नसूचित तारांकित प्रश्नों की सूचि में अपना नाम ही नहीं रहने की बात सांसद बलवंत वानखडे के ध्यान में आयी. खासबात यह है कि, इसके लिए लोकसभा सचिवालय की ओर से सांसद बलवंत वानखडे को कोई सूचना, कारण, स्पष्टीकरण अथवा दुरूस्ती पत्रक नहीं दिया गया था. इसके चलते सांसद बलवंत वानखडे ने संसदीय प्रक्रिया की पारदर्शकता व निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठाए है.
सांसद बलवंत वानखडे ने इसे लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपे गए निवेदन में कहा कि, लोकसभा में प्रश्नोत्तरकाल जनप्रतिनिधियों के लिए सरकार से सार्वजनिक महत्व वाले विषयों पर जानकारी मिलने का सबसे प्रभावी संसदीय मार्ग है. प्रश्न पूछने का अधिकार यह केवल किसी सांसद का व्यक्तिगत अधिकार नहीं है, बल्कि निर्वाचन क्षेत्र के जनता के प्रश्नों को संसद में रखने का एक प्रभावी माध्यम है. जिसके चलते बैलेट में नाम निश्चित हो जाने के बाद कोई भी कारण दिए बिना अंतिम प्रश्नसूचित से नाम को हटाना अपने आप में बेहद गंभीर बात है. जिसे संसदीय परंपरा सहित पारदर्शकता व निष्पक्षता के लिहाज से बाधक भी कहा जा सकता है. इसके साथ ही सांसद बलवंत वानखडे ने यह मांग भी उठाई थी कि, 6 जुलाई के बैलेट रिकॉर्ड तथा 20 जुलाई की अंतिम प्रश्नसूचित की तत्काल पडताल करते हुए इस मामले की सघन जांच की जानी चाहिए. बैलेट में नाम रहने के बावजूद भी अंतिम प्रश्नसूचित से उनके नाम को किस आदेश, नियम अथवा प्रक्रिया के तहत हटाया गया इसकी लिखित जानकारी भी दी जानी चाहिए. लोकसभा नियम 41 से 44 अथवा अध्यक्षिय निर्देशानुसार प्रश्न को यदि अमान्य ठहराया गया है, तो इसकी वजह स्पष्ट करने के साथ ही संबंधित आदेश की प्रतिलिपी उपलब्ध करायी जानी चाहिए. साथ ही इस मामले में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही या कोताही पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ नियमानुसार अनुशासन भंग की कार्रवाई की जानी चाहिए, ऐसी मांग सांसद बलवंत वानखडे द्वारा लोकसभा अध्यक्ष के पास दिए गए लिखित निवेदन में उठाई गई है.

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