शहर में चार हत्याओं ने उजाड़ दिए चार घर
इकलौते बेटों की मौत से बिखर गए परिवार

* माताओं की आंखों से नहीं थम रहे आंसू
* शहर में बढ़ते अपराध पर उठे सवाल
अमरावती/दि.23- अमरावती शहर में पिछले कुछ महीनों के दौरान हुई चार सनसनीखेज हत्याओं ने न केवल चार युवाओं की जिंदगी छीन ली, बल्कि चार परिवारों की उम्मीदों, सपनों और भविष्य को भी गहरे अंधेरे में धकेल दिया है. इन चारों घटनाओं में मारे गए अफाक, जाहिद हुसैन, संजोग जोशी और ऋतिक उर्फ पंडित अपने-अपने परिवारों के इकलौते बेटे थे. उनकी असमय मौत के बाद परिवारों पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूटा है, जिससे उबरना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया है. इन घटनाओं ने शहर में बढ़ते अपराध और युवाओं के बीच बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है. जिन परिवारों ने अपने बेटों को बड़े अरमानों से पाला-पोसा, आज वही परिवार न्याय की आस लगाए बैठा है.
* अफाक की मौत से मां सदमे में, घर का सहारा छिना
अफाक अपने परिवार का इकलौता बेटा था. घर की जिम्मेदारियां उसी के कंधों पर थीं. परिवार में एक बहन है और मां बेटे के सहारे जीवन गुजार रही थीं. अफाक की हत्या की खबर मिलते ही परिवार पर मानो आसमान टूट पड़ा. बेटे की मौत का सदमा उसकी मां सहन नहीं कर सकीं और उनकी तबीयत बिगड़ गई. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. परिजनों का कहना है कि अफाक केवल बेटा नहीं, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीद था. उसकी कमाई और जिम्मेदारी पर ही घर का भविष्य टिका हुआ था. अब परिवार आर्थिक और मानसिक संकटों से गुजर रहा है.
* लूडो के विवाद में गई जाहिद हुसैन की जान
विद्या भारती कॉलेज के सामने हुई जाहिद हुसैन की हत्या ने पूरे शहर को झकझोर दिया था. मामूली विवाद और लूडो खेल को लेकर शुरू हुआ झगड़ा इतना बढ़ गया कि उसकी जान चली गई. जाहिद अपने परिवार का इकलौता बेटा था. उसके पिता दिव्यांग हैं और परिवार में चार बहनें हैं. घर की आर्थिक जिम्मेदारी जाहिद के कंधों पर थी. वह अपने परिवार के लिए संघर्ष कर रहा था और बहनों के भविष्य को बेहतर बनाने का सपना देख रहा था. उसकी मौत के बाद परिवार पूरी तरह टूट चुका है. पिता की शारीरिक स्थिति पहले से कमजोर है और अब बेटे के निधन ने उन्हें मानसिक रूप से भी झकझोर दिया है. परिवार के सामने आज रोजमर्रा के खर्च से लेकर भविष्य की चिंताएं खड़ी हो गई हैं.
* संजोग जोशी की हत्या से मां और नानी बेसहारा
वलगांव क्षेत्र में हुए बहुचर्चित हत्याकांड में जान गंवाने वाले संजोग जोशी की कहानी भी बेहद मार्मिक है. संजोग के पिता का पहले ही निधन हो चुका था. घर में केवल उसकी मां थीं और वही उनका इकलौता सहारा था. संजोग अपनी नानी के घर रहकर जीवन की कठिन परिस्थितियों से लड़ रहा था. वह परिवार की जिम्मेदारियां संभालने का प्रयास कर रहा था और मां को बेहतर जीवन देना चाहता था. लेकिन उसकी हत्या ने मां और नानी दोनों को गहरे सदमे में डाल दिया. परिजनों का कहना है कि जिस बेटे के सहारे भविष्य की उम्मीद थी, उसकी मौत के बाद घर में सन्नाटा पसरा हुआ है. मां की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे.
* ऋतिक उर्फ पंडित की मौत से बहनों पर संकट
इसी हत्याकांड में जान गंवाने वाले ऋतिक उर्फ पंडित की स्थिति भी बेहद दर्दनाक थी. उसके माता-पिता का पहले ही निधन हो चुका था. परिवार में दो बहनें हैं. एक बहन की शादी हो चुकी है, जबकि दूसरी बहन की जिम्मेदारी उसी पर थी. माता-पिता के साए के बिना बड़ा हुआ पंडित अपने परिवार को संभालने के लिए संघर्ष कर रहा था. वह अपनी बहन के भविष्य को सुरक्षित बनाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसकी हत्या ने उस परिवार का भी एकमात्र सहारा छीन लिया. अब परिवार के सामने आर्थिक संकट के साथ-साथ भविष्य की चिंता भी खड़ी हो गई है.
* चार परिवार, एक जैसी त्रासदी
इन चारों मामलों में सबसे दर्दनाक समानता यह है कि सभी मृतक अपने-अपने परिवारों के इकलौते बेटे थे. किसी परिवार की मां अस्पताल में है, किसी के पिता दिव्यांग हैं, किसी के सिर से पहले ही पिता का साया उठ चुका था, तो किसी के माता-पिता दोनों दुनिया छोड़ चुके थे. इन युवाओं की मौत ने केवल चार जिंदगियां नहीं छीनीं, बल्कि चार परिवारों के सपने, सहारे और भविष्य भी खत्म कर दिए. आज इन परिवारों में मातम का माहौल है और हर घर में एक ही सवाल गूंज रहा है-हमारा बेटा वापस कौन लाएगा?
* बढ़ते अपराधों पर उठे सवाल
लगातार सामने आ रही हत्या और गंभीर अपराध की घटनाओं ने अमरावती शहर की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. नागरिकों का कहना है कि छोटी-छोटी बातों पर हिंसा और हत्या तक पहुंच जाने वाली मानसिकता चिंताजनक है. सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने पुलिस प्रशासन से अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने, असामाजिक तत्वों पर सख्त निगरानी रखने और युवाओं में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्ति पर अंकुश लगाने की मांग की है. शहरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो न जाने कितने और परिवार अपने इकलौते सहारे को खो देंगे. आज अफाक, जाहिद, संजोग और पंडित के घरों में पसरा सन्नाटा पूरे समाज के लिए एक चेतावनी है कि अपराध केवल एक व्यक्ति की जान नहीं लेता, बल्कि पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ देता है.