कॉकरोच आंदोलन से देशभर से युवाओं के राजधानी पहुंचने से घबराई सरकार

दिल्ली ठप, इंटरनेट, मेट्रो, रेस्टॉरेंट सब बंद

* नीट पेपर लीक पर प्रधानमंत्री मोदी बोले, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाएंगे
युवाओं के कल्याण और भविष्य से बढकर कुछ नहीं, दोषी बख्शे नहीं जाएंगे
* सरकारी बोली – कॉकरोच पार्टी को चार बार बातचीत के लिए बुलाया
* कॉकरोच ने कहा – नड्डा के घर नहीं जाएंगे, बात करनी हैं तो सरकार जंतर-मंतर पर आएं
* कनाट पैलेस में शाम 6.30 बजे तक दुकाने, रेस्टारेंट बंद करने के आदेश
* संसद के बाहर एनडीए-इंडिया ब्लॉक आमने-सामने
* राहुल बोले – पीएम एज्युकेशन सिस्टम की बर्बादी के जिम्मेदार
* गुरुग्राम – मेदांता में 600 जवानों की सिक्युरिटी में सोनम वांगचुक
* ठाकरे बंधु रविवार को उतरेंगे समर्थन में सडकों पर
* अन्ना हजारे ने शुरु किया छात्र समर्थनार्थ मौन आंदोलन
दिल्ली/दि.23 – नीट पेपर लीक के मुद्दे पर देश की राजधानी से लेकर विभिन्न राज्यों में आंदोलन की आपाधापी और सरकार की घोषणाबाजी लगातार चौथे दिन भी जारी रही. राजधानी में चल रहे कॉकरोच पार्टी के आंदोलन के कारण देशभर से हजारों युवा पहुंच रहे है. ऐसे में यहां इंटरनेट, मेट्रो रेल सेवा, रेस्टॉरेंट सभी बंद कर दिए गए है. उधर संसद के ठीक बाहर भाजपा और कांग्रेस के नेतृत्व में पक्ष-विपक्ष ने जमकर नारेबाजी की. वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा के पर्चे लीक करने के मामले में दोषियों पर कडी कार्रवाई करने का ऐलान करते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट की भी घोषणा कर दी. उधर कॉकरोच जनता पार्टी ने मंत्री जे.पी. नड्डा के मंत्रालय जाकर चर्चा करने से मना कर दिया. सरकार को जंतर-मंतर पर ही चर्चार्थ बुलाया. उधर मुंबई में ठाकरे बंधुओं उद्धव व राज ने आगामी रविवार 26 जुलाई को विद्यार्थियों के समर्थन में सडक पर उतरने का ऐलान किया है. जबकि गांधीवादी समाजसेवी अन्ना हजारे ने अपने ग्राम में मौन आंदोलन शुरु कर विद्यार्थियों के समर्थन की घोषणा की है.
* क्या कहा प्रधानमंत्री ने
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी कर देश को विश्वास दिलाया कि, दोषी बख्शे नहीं जाएंगे. पेपर लीक मामलों की सुनवाई हेतु फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित होंगे. इतना ही नहीं, तो पीएम मोदी ने कहा कि, युवाओं के कल्याण और भविष्य से बढकर कुछ नहीं. आइंदा एक्झाम के लिए फुल प्रुफ व्यवस्था रहेगी. इस संबंध में निर्देश दे दिए गए है. संबंधित विभाग कार्यवाही में जुट गए हैं. भविष्य से खिलवाड करनेवाले बख्शे नहीं जाएंगे. उन्हें फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कर कडी से कडी सजा दिलाने का प्रयत्न होगा.
* जंतर-मंतर पर 32वें दिन प्रदर्शन जारी
दूसरी ओर सीजेपी ने सरकार का प्रस्ताव ठुकरा दिया. सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि अगर सरकार बातचीत करना चाहती है तो जंतर-मंतर आए या प्रदर्शन स्थल के पास किसी न्यूट्रल जगह पर बातचीत करे. सौरव ने कहा – हमें पुलिस ने बताया कि सरकार ने बातचीत के लिए बुलाया है, लेकिन हम किसी के घर या ऑफिस नहीं जाएंगे.
* राहुल बोले- पीएम एजुकेशन सिस्टम की बर्बादी के जिम्मेदार
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ’द’ पर पोस्ट में आरोप लगाया कि देश के शिक्षा तंत्र को बर्बाद करने और युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री खुद जिम्मेदार हैं. छात्रों की मांगे है कि, प्रधान को हटाए जाए. छात्रों पर हिंसा करनेवाले दोषियों पर कडी कार्रवाई हो.
* संसद के बाहर एनडीए-इंडिया ब्लॉक आमने-सामने
संसद के मानसून सत्र के चौथे दिन गुरुवार को संसद भवन के बाहर छऊ- और विपक्ष आमने-सामने आ गए. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत विपक्षी सांसदों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. विपक्ष के सामने एनडीए के सांसद भी विरोध प्रदर्शन में उतर गए. इस दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. एनडीए सांसद पीएम आवास के बाहर 21 जुलाई को राहुल के धरने का विरोध कर रहे हैं. वहीं इंडिया ब्लॉक नीट पेपर लीक को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है. प्रदर्शन के दौरान प्रियंका गांधी छऊ- सांसदों के बिल्कुल करीब चली गईं. सुरक्षाकर्मियों ने बीच में आकर उन्हें रोका. संसद के भीतर भी हंगामा जारी रहा. इसके कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है. 2 बजे लोकसभा में कार्यवाही शुरू हुई तो भारी हंगामा शुरू हो गया. इस पर सदन की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी गई.
* 600 जवानों की सिक्योरिटी में सोनम वांगचुक
सोनम वांगचुक के अनशन का आज यानी गुरुवार को 26वां दिन है. गुरुग्राम के मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती हुए उन्हें दो दिन हो चुके हैं. बुधवार को उनसे मिलने पहुंचे आम आदमी पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा और समाजवादी पार्टी के 15 विपक्षी सांसदों को पुलिस ने रोक दिया. उनके लिए अस्पताल में 600 जवानों को तैनात किया गया है.

26 जुलाई को राज और उद्धव उतरेंगे सडकों पर
उधर मुंबई से आई ताजा खबर के अनुसार नीट पेपर लीक मामले और देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने गुरुवार को संयुक्त पत्रकार परिषद कर 26 जुलाई को मुंबई में छात्रों के समर्थन में विशाल संयुक्त मार्च निकालने की घोषणा की. दोनों नेताओं ने अभिभावकों और नागरिकों से भी बड़ी संख्या में मार्च में शामिल होने की अपील की. राज ठाकरे ने कहा कि देशभर में छात्रों का आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, लेकिन उसे दबाने के लिए छात्रों पर लाठीचार्ज और दबाव की कार्रवाई की गई. उन्होंने कहा कि यदि किसी विभाग में विफलता होती है तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित मंत्री को लेनी चाहिए. उनके अनुसार, छात्रों की शुरुआती मांग केवल केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी, लेकिन आंदोलन पर हुई कार्रवाई के बाद यह मुद्दा अब प्रधानमंत्री तक पहुंच गया है. उन्होंने कहा कि यदि सरकार आंदोलन कर रहे छात्रों से बातचीत करती और उनकी समस्याएं सुनती तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती. राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि सरकार ने किसान आंदोलन, मणिपुर और आदिवासी मुद्दों पर भी संवाद के बजाय दमन का रास्ता अपनाया. उन्होंने यह भी कहा कि वे शुरू से ही नीट जैसी केंद्रीकृत परीक्षा प्रणाली के विरोध में रहे हैं. उनका दावा है कि उन्होंने पहले ही प्रधानमंत्री को चेताया था कि यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो छात्रों में भी निराशा बढ़ेगी.
* शिवाजी पार्क से सिद्धिविनायक तक मार्च
राज ठाकरे ने बताया कि 26 जुलाई को शिवाजी पार्क से सिद्धिविनायक मंदिर तक संयुक्त मार्च निकाला जाएगा. उन्होंने कहा कि यह केवल विरोध मार्च नहीं बल्कि छात्रों, अभिभावकों और आम नागरिकों की भावनाओं का शांतिपूर्ण प्रदर्शन होगा. उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह आंदोलन केवल नीट परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों से विभिन्न सरकारी निर्णयों को लेकर जनता में बढ़ रहे असंतोष का भी प्रतीक है. उन्होंने दावा किया कि दिल्ली दौरे के दौरान विभिन्न राज्यों से आए लोगों ने भी सरकार के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की. उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि दिल्ली में आंदोलन में शामिल कुछ छात्राओं ने पुलिस द्वारा कथित दुर्व्यवहार की जानकारी उन्हें दी है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ छात्राओं के साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार किया गया. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. उद्धव ठाकरे ने कहा कि प्रधानमंत्री को सोशल मीडिया पर संदेश देने के बजाय आंदोलन कर रहे छात्रों से सीधे बातचीत करनी चाहिए थी. उनका कहना था कि यदि सरकार ने पहले ही दिन संवाद का रास्ता अपनाया होता तो हालात इतने नहीं बिगड़ते.
* शांतिपूर्ण मार्च की अपील
दोनों नेताओं ने कहा कि 26 जुलाई का मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा. उन्होंने कार्यकर्ताओं से किसी भी प्रकार की हिंसा या कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधियों से दूर रहने की अपील की. उनका कहना था कि यह मार्च छात्रों, अभिभावकों और नागरिकों की लोकतांत्रिक भावनाओं को शांतिपूर्वक व्यक्त करने का माध्यम होगा.

* दमन नहीं, संवाद चाहिए
छात्रों के समर्थन में अन्ना हजारे का मौन आंदोलन
अहिल्यानगर – नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में जारी छात्र आंदोलन के बीच समाजसेवी अन्ना हजारे गुरुवार को छात्रों के समर्थन में मैदान में उतर आए. उन्होंने अहिल्यानगर के वाडिया पार्क स्थित गांधी स्मारक में मौन आंदोलन शुरू करते हुए सरकार से दमन की बजाय संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की. आंदोलन स्थल पर लगाए गए बैनर के माध्यम से अन्ना हजारे ने संदेश दिया कि दडपशाही नहीं, संवाद चाहिए. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में समस्याओं का समाधान बातचीत से होना चाहिए, न कि बल प्रयोग से. इस अवसर पर आंदोलन स्थल को प्रतीकात्मक रूप से नगर का जंतर-मंतर नाम भी दिया गया.
* सरकार से संवाद की अपील
अन्ना हजारे ने कहा कि छात्रों की मांगों को कानून-व्यवस्था का विषय मानने के बजाय जनभावनाओं से जुड़ा मुद्दा समझा जाना चाहिए. सरकार को छात्रों और आंदोलनकारियों से बातचीत कर समाधान निकालना चाहिए. उन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करने का भी आग्रह किया.
* प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
मौन आंदोलन शुरू करने से पहले अन्ना हजारे ने मंदिर में दर्शन किए और इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा. पत्र में उन्होंने नीट पेपर लीक, बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर चिंता व्यक्त की. उन्होंने लिखा कि छात्रों का आंदोलन केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य और जनभावनाओं से जुड़ा विषय है. इसलिए सरकार को छात्रों से संवाद स्थापित करना चाहिए.
* भावुक हुए अन्ना
आंदोलन के दौरान अन्ना हजारे भावुक भी नजर आए और उनकी आंखों में आंसू आ गए. उनके इस मौन आंदोलन की राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा हो रही है. छात्रों के समर्थन में उठाए गए इस कदम पर सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों की नजर बनी हुई है.

 

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