एसआईआर में पिछडे अमरावती व बडनेरा
दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में अब तक आधा ही हो पाया काम

* बडनेरा में 50 व अमरावती में 40 फीसद मतदाताओं का पंजीयन बाकी
* शहरी क्षेत्र रहनेवाले दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में कट सकते है 5 से 6 लाख मतदाताओं के नाम
* 26 जुलाई तक चलेगी नाम पंजीयन की प्रक्रिया, मतदाताओं से लिए जा रहे गणना पत्रक
* जिले में अब 7.65 लाख मतदाताओं ने जमा नहीं कराए अपने इन्यूमरेशन फॉर्म
अमरावती /दि.23- भारत निर्वाचन आयोग द्वारा महाराष्ट्र में चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत अमरावती जिले में मतदाता सूची के अद्यतन का कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है. हालांकि जिले के दो प्रमुख शहरी विधानसभा क्षेत्र अमरावती और बडनेरा इस अभियान में सबसे पीछे चल रहे हैं. प्रशासन के ताजा आंकड़ों के अनुसार दोनों क्षेत्रों में अब भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के एन्यूमरेशन फॉर्म (गणना पत्रक) जमा नहीं हुए हैं, जिसके कारण लाखों मतदाताओं के नाम आगामी प्रारूप मतदाता सूची से बाहर होने की आशंका जताई जा रही है. क्योंकि आगामी 26 जुलाई तक चलनेवाले एसआईआर अभियान में अब ज्यादा से ज्यादा एक से सवा लाख मतदाताओं के नामों की पडताल व पंजीयन का काम हो सकता है. जिसके चलते पंजीयन प्रक्रिया में शामिल नहीं होनेवाले दोनों निर्वाचन क्षेेत्रों के करीब 5 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से कट सकते है. इसे आगामी चुनावों के मद्देनजर दोनों विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों सहित अमरावती संसदीय क्षेत्र के लिए भी चिंताजनक स्थिती माना जा रहा है.
इस संदर्भ में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बडनेरा विधानसभा क्षेत्र में लगभग 50 प्रतिशत मतदाताओं का पंजीयन और डिजिटाइजेशन कार्य अभी बाकी है, जबकि अमरावती विधानसभा क्षेत्र में करीब 40 प्रतिशत मतदाता अब तक प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं. रिपोर्ट के अनुसार बडनेरा विधानसभा क्षेत्र में 3,74,243 गणना पत्रक वितरित किए गए, लेकिन केवल 2,22,148 फॉर्म डिजिटाइज हो पाए हैं. डिजिटाइजेशन प्रतिशत करीब 59.18 प्रतिशत है. वहीं अमरावती विधानसभा क्षेत्र में 3,72,919 गणना पत्रक वितरित हुए, जिनमें से केवल 2,06,396 फॉर्म डिजिटाइज हुए हैं. यहां डिजिटाइजेशन करीब 55 प्रतिशत के आसपास है. चूंकि दोनों क्षेत्र जिला मुख्यालय वाले तथा सबसे अधिक शहरी और घनी आबादी वाले निर्वाचन क्षेत्र हैं, इसलिए यहां फॉर्म जमा न होने की स्थिति में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं. ऐसे में इन दोनोें निर्वाचन क्षेत्रों के 5 से 6 लाख मतदाताओं के नामों पर खतरा मंडरा रहा है. जिसके चलते राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के बीच इस बात को लेकर चिंता बढ़ रही है कि अमरावती और बडनेरा में अभी भी लाखों मतदाताओं का सत्यापन और पंजीयन शेष है. जिसका तय समय के भीतर पूरा होना काफी मुश्किल है. ऐसे में यदि निर्धारित समय सीमा तक ये मतदाता एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं करते हैं, तो 5 से 6 लाख मतदाताओं के नाम प्रारूप मतदाता सूची में दिखाई नहीं देगा. यही कारण है कि प्रशासन ने विशेष अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने की कोशिश शुरू कर दी है.
बता दे कि, भारत के केंद्रीय निर्वाचन आयोग के निर्देश पर राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा महाराष्ट्र में 29 जून से एसआईआर की प्रक्रिया शुरू की गई. जिसके तहत मतदाता सूची में नए मतदाताओं के नाम पंजिकृत कराने के साथ ही मतदाता सूचियों में दुबार-तिबार रहनेवाले नामों को निकालने के साथ-साथ पिछली एसआईआर की प्रक्रिया में शामिल मतदाताओं के नामों की पडताल करते हुए मतदाता सूचि को पारदर्शक तरीके से बनाने का काम शुरू किया गया. राज्य स्तर पर शुरू की गई एसआईआर की प्रक्रिया के तहत विगत 29 जून से अमरावती जिले के अमरावती, बडनेरा, धामणगाव, तिवसा, दर्यापुर, मेलघाट, अचलपूर व मोर्शी-वरूड निर्वाचन क्षेत्रों में भी मतदाताओं के नामों की पडताल व पंजीयन का काम शुरू किया गया. जिसके तहत जहां एक ओर दर्यापुर, मोर्शी, तिवसा, मेलघाट में एसआईआर की प्रक्रिया को उत्कृष्ट प्रतिसाद मिला और 70 फीसद से अधिक मतदाताओं के नाम पंजीकृत हुए. वहीं दूसरी ओर अमरावती और बडनेरा विधानसभा क्षेत्रों में एसआईआर अभियान की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी है. जिसके चलते जिला निर्वाचन अधिकारी तथा जिलाधिकारी आशीष येरेकर ने नागरिकों से अपील की है कि वे 24 से 26 जुलाई के बीच आयोजित विशेष शिविरों का लाभ उठाकर अपने गणना पत्रक अवश्य जमा करें. ऐसा नहीं करने पर उनका नाम 17 अगस्त को प्रकाशित होने वाली प्रारूप मतदाता सूची में शामिल नहीं हो सकेगा.
* जिले में 25.45 लाख मतदाता, 7.65 लाख ने अब तक नहीं भरा फॉर्म
एसआईआर अभियान की 23 जुलाई सुबह 8 बजे तक की रिपोर्ट के अनुसार अमरावती जिले के आठ विधानसभा क्षेत्रों में कुल 25 लाख 45 हजार 677 मतदाता दर्ज हैं. इनमें से 17 लाख 80 हजार 734 मतदाताओं ने अपने गणना पत्रक जमा कर दिए हैं, जबकि 7 लाख 64 हजार 943 मतदाता अब भी इस प्रक्रिया से बाहर हैं. निर्वाचन विभाग का कहना है कि जिन मतदाताओं ने फॉर्म जमा नहीं किया है, उनके नाम प्रारूप मतदाता सूची में शामिल होने पर प्रश्नचिह्न लग सकता है. हालांकि बाद में दावा-आपत्ति प्रक्रिया के माध्यम से सुधार का अवसर रहेगा, लेकिन प्रारंभिक सूची से नाम गायब होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
* जिले में 99.62 प्रतिशत फॉर्म वितरित, लेकिन डिजिटाइजेशन 69.83 प्रतिशत
निर्वाचन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जिले में गणना पत्रकों के वितरण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है. कुल 25,36,005 गणना पत्रक वितरित किए जा चुके हैं, जो कुल लक्ष्य का 99.62 प्रतिशत है. इसके विपरीत डिजिटाइजेशन का कार्य अभी अपेक्षाकृत धीमा है. अब तक केवल 17,77,524 फॉर्म डिजिटल प्रणाली में दर्ज किए गए हैं, जो कुल का 69.83 प्रतिशत है.
* शहरों के बनिस्बत ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन
जिले के कई ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों ने एसआईआर अभियान में उल्लेखनीय प्रगति दिखाई है. डिजिटाइजेशन का काम मोर्शी में 83.12 प्रतिशत, दर्यापुर में 83.11 प्रतिशत, धामणगांव रेलवे में 80.17 प्रतिशत, अचलपुर में 71.08 प्रतिशत, मेलघाट में 69.66 प्रतिशत पूरा हो चुका है. इन क्षेत्रों में प्रशासन, बीएलओ और स्थानीय प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी के कारण कार्य अपेक्षाकृत तेजी से आगे बढ़ा है.
* दर्यापुर, धामणगांव रेलवे और मोर्शी वितरण में सबसे आगे
रिपोर्ट के अनुसार, वितरण के मामले में दर्यापुर विधानसभा क्षेत्र सबसे आगे रहा, जहां लगभग 99.93 प्रतिशत फॉर्म वितरित किए गए हैं. वहीं धामणगांव रेलवे विधानसभा क्षेत्र में 99.83 प्रतिशत, बडनेरा में 99.57 प्रतिशत, अमरावती में 99.69 प्रतिशत, दर्यापुर में 99.93 प्रतिशत, मेलघाट में 99.59 प्रतिशत, अचलपुर में 99.69 प्रतिशत तथा मोर्शी में 99.87 प्रतिशत गणना पत्रकों का वितरण किया जा चुका है. जबकि डिजिटाइजेशन में धामणगांव रेलवे अव्वल स्थान पर है. डिजिटाइजेशन की स्थिति पर नजर डालें तो धामणगांव रेलवे विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 80.17 प्रतिशत फॉर्म ऑनलाइन दर्ज किए जा चुके हैं.
* बारिश बनी बड़ी चुनौती, 24 से 26 जुलाई तक विशेष शिविर
जिले में लगातार हो रही बारिश के कारण बीएलओ का घर-घर संपर्क अभियान प्रभावित हुआ है. कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पहुंचने में कठिनाइयों के चलते फॉर्म संग्रहण और सत्यापन कार्य निर्धारित गति से नहीं हो पाया. इसी कारण निर्वाचन आयोग ने पुनरीक्षण कार्यक्रम की समय-सारिणी में संशोधन किया है. जिसके तहत शेष मतदाताओं को अंतिम अवसर देने के लिए 24, 25 और 26 जुलाई को जिले के सभी मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं. सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक बीएलओ मतदान केंद्रों पर मौजूद रहेंगे. प्रशासन ने मतदाताओं से अपील की है कि वे उसी मतदान केंद्र पर जाएं, जहां उन्होंने वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में मतदान किया था और वहां अपना गणना पत्रक भरकर जमा करें.
* जिले में दो से ढाई लाख मतदाताओं के नाम कट सकते है
उल्लेखनिय है कि, आज 23 जुलाई से शुरू हुए विशेष पंजीयन अभियान के बाद अब एसआईआर की प्रक्रिया में 8 अगस्त तक 15 दिनों का समय शेष है. जिसके चलते उम्मीद जताई जा सकती है कि, मतदाताओं के पंजीयन का आंकडा बढ भी सकता है. लेकिन इसके बावजूद पंजीयन की रफ्तार को देखते हुए कहा जा सकता है कि, जब एसआईआर की प्रक्रिया के बाद मतदाताओं के आंकडे अंतिम यानी फाइनल किए जाएंगे. तब तक जिले के कुल 25 लाख में से लगभग दो से ढाई लाख मतदाताओं के ना कट सकते है. ऐसे में जिला प्रशासन द्वारा इस आंकडे को घटाने तथा मतदाता सूची से बाहर होनेवाले मतदाताओं की संख्या को कम रखने को लेकर जबरदस्त प्रयास किए जा रहे है.
* पूरे राज्य के शहरी क्षेत्रों में मतदाताओं का प्रतिसाद कम
यहां यह भी विशेष उल्लेखनिय है कि, अमरावती व बडनेरा निर्वाचन क्षेत्रों की तरह महाराष्ट्र के सभी शहरी निर्वाचन क्षेत्रों में एसआईआर की प्रक्रिया के तहत मतदाताओं के पंजीयन की रफ्तार बेहद सुस्त है. खास बात यह भी है कि, शहरी क्षेत्रों मेें नोकरी पेशा रहनेवाले मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी रहती है. जिनमें सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ-साथ निजी आस्थापनाओं व प्रतिष्ठानों में काम करनेवाले लोगों का समावेश होता है. इसके अलावा शहरों में कई ऐसे मतदाता भी रहते है, जो अपने छोटे-बडे व्यवसाय चलाते हुए अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में व्यस्त रहते है और मतदाता पंजीयन व एसआईआर प्रक्रिया के लिए समय नहीं निकाल पाते. इसके अलावा विगत 20-25 वर्षों के दौरान शहरी क्षेत्रों में पदस्थ रहनेवाले सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों सहित शिक्षकों का अन्य शहरों या क्षेत्रों में तबादला भी हो जाता है. इससे भी मतदाता पंजीयन व मतदाता संख्या प्रभावित होते है.





