चांदूर रेल्वे जंगल में दो तेंदुए की विद्युत शॉक देकर हत्या!
वन्यजीव अंगों की तस्करी के बड़े रैकेट का पर्दाफाश

* मृतक तेंदुए के अवयवों की हो रही थी तस्करी
* वाईल्ड लाईफ कंट्रोल ब्युरो ने वनविभाग के साथ की छापेमारी
* कार्रवाई में दो शिकारी व तस्कर गिरफ्तार, एक फरार
* तेंदुओं की हड्डियां, नाखून, मूंछ के बाल और चंदन की लकड़ी बरामद; खाल अब भी गायब, कई बड़े खुलासों की उम्मीद
* अमरावती से वन्यजीव के अवयवों की बिक्री का रैकेट चलने की संभावना
* अंतरराष्ट्रीय तस्कर टोली के सक्रिय रहने का भी पूरा संदेह, मामले में जांच जारी
अमरावती /दि.24- जिले के चांदूर रेलवे वनपरिक्षेत्र में दो तेंदुओं की विद्युत करंट देकर हत्या किए जाने तथा उनके शरीर के अंगों की तस्करी किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. इस घटना ने न केवल वन विभाग बल्कि पूरे वन्यजीव संरक्षण तंत्र को झकझोर कर रख दिया है. मुंबई की वाइल्ड लाइफ कंट्रोल ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) से प्राप्त गुप्त सूचना के आधार पर वन विभाग ने एक संयुक्त अभियान चलाकर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक अन्य आरोपी फरार बताया जा रहा है. प्रारंभिक जांच में यह मामला वन्यजीवों के अवैध शिकार और उनके अंगों की तस्करी से जुड़े बड़े नेटवर्क की ओर संकेत कर रहा है.
वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, वाइल्ड लाइफ कंट्रोल ब्यूरो को कुछ दिनों पूर्व विश्वसनीय जानकारी मिली थी कि अमरावती क्षेत्र से संरक्षित वन्यजीवों के अंगों की अवैध खरीद-फरोख्त की जा रही है. सूचना में यह भी बताया गया था कि हाल ही में दो तेंदुओं का शिकार कर उनके अवयव तस्करी के लिए तैयार किए गए हैं. सूचना की गंभीरता को देखते हुए ब्यूरो के अधिकारी तत्काल अमरावती पहुंचे और स्थानीय वन अधिकारियों के साथ मिलकर एक विशेष टीम का गठन किया गया. सूचना के आधार पर चांदूर रेलवे रोड स्थित रत्नापुर फाटा के समीप नाकाबंदी की गई. संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हुए वन विभाग की टीम ने एक वाहन को रोककर उसकी तलाशी ली. तलाशी के दौरान जो सामग्री बरामद हुई, उसने अधिकारियों को भी चौंका दिया. वाहन से दो मृत तेंदुओं की हड्डियां, नाखून, मूंछ के बाल और बड़ी मात्रा में चंदन की लकड़ी बरामद की गई. बरामद सामग्री से यह स्पष्ट हो गया कि आरोपियों का संबंध न केवल वन्यजीव तस्करी बल्कि चंदन की अवैध कटाई और तस्करी से भी है.
इस कार्रवाई में पूरण प्रल्हाद राठोड (55, निवासी चिरोडी) और प्रकाश किसन जाधव (31, निवासी पाखरगांव) को गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क में मंगेश शेषराव जाधव नामक व्यक्ति भी शामिल है, जो कार्रवाई के दौरान फरार हो गया. वन विभाग और अन्य एजेंसियां उसकी तलाश में जुटी हैं. सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी तेंदुओं के अवयव और चंदन की लकड़ी अमरावती में किसी खरीदार तक पहुंचाने जा रहे थे. माना जा रहा है कि वे केवल सप्लायर की भूमिका में थे और उनके पीछे एक बड़ा गिरोह सक्रिय है.
* करंट लगाकर की गई थी तेंदुओं की हत्या
जांच में सामने आया है कि दोनों तेंदुओं की मौत बिजली के करंट से हुई. वन अधिकारियों के अनुसार, जंगल और खेतों के आसपास कई बार जंगली सूअरों अथवा अन्य वन्यजीवों को मारने के लिए अवैध रूप से बिजली के तार बिछाए जाते हैं. इन्हीं विद्युत जालों में फंसकर तेंदुओं की मौत होने की आशंका है. हालांकि यह भी जांच की जा रही है कि कहीं आरोपियों ने जानबूझकर तेंदुओं को निशाना बनाकर यह जाल तो नहीं बिछाया था. विशेषज्ञों का कहना है कि तेंदुए जैसे दुर्लभ और संरक्षित वन्यजीवों की हत्या केवल शिकार के उद्देश्य से नहीं की जाती, बल्कि उनके अंगों की तस्करी के लिए भी की जाती है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेंदुए की खाल, नाखून, दांत, हड्डियां और मूंछों की भारी मांग रहती है.
* सबसे बड़ा सवाल: तेंदुओं की खाल कहां गई?
वन विभाग की कार्रवाई में तेंदुओं के कई अवयव बरामद हुए, लेकिन दोनों तेंदुओं की खाल नहीं मिली. यही जांच का सबसे महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है. अधिकारियों का मानना है कि तेंदुओं की खाल पहले ही किसी खरीदार को बेची जा चुकी हो सकती है. वन्यजीव अपराधों की जांच करने वाले विशेषज्ञों के अनुसार, तेंदुए की खाल अवैध बाजार में सबसे महंगे उत्पादों में से एक मानी जाती है. इसलिए आशंका जताई जा रही है कि खाल किसी बड़े तस्कर या अंतरराज्यीय गिरोह के पास पहुंच चुकी है. पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों से इस संबंध में विस्तृत पूछताछ की जाएगी.
* अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह से जुड़े हो सकते हैं तार
वन विभाग और वाइल्ड लाइफ कंट्रोल ब्यूरो को संदेह है कि मामला केवल स्थानीय स्तर का नहीं है. बरामद सामग्री और आरोपियों की गतिविधियों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी नेटवर्क की भूमिका की भी जांच की जा रही है. सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ समय से अमरावती और विदर्भ क्षेत्र से वन्यजीव अंगों की तस्करी की सूचनाएं मिल रही थीं. हालांकि इस तरह का प्रत्यक्ष मामला पहली बार सामने आया है. जांच एजेंसियां आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन और संपर्क सूत्रों की जांच कर रही हैं ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके.
* स्थानीय वन विभाग को नहीं थी जानकारी
इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि दो तेंदुओं की मौत होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर इसकी कोई जानकारी सामने नहीं आई. वाइल्ड लाइफ कंट्रोल ब्यूरो से सूचना मिलने के बाद ही कार्रवाई की गई. वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि जब दो संरक्षित वन्यजीवों की मौत हुई, तो इसकी सूचना वन विभाग के स्थानीय अमले तक क्यों नहीं पहुंची? क्या शिकारियों ने पूरी घटना को छिपाने में सफलता हासिल की थी या फिर निगरानी तंत्र में कहीं न कहीं कमी रही? इन सवालों के जवाब भी जांच के दौरान तलाशे जा रहे हैं.
* कानून के तहत कड़ी सजा का प्रावधान
तेंदुआ भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अंतर्गत अनुसूची-1 में शामिल अत्यंत संरक्षित वन्यजीव है. इसकी हत्या, शिकार, अंगों का संग्रहण, परिवहन अथवा व्यापार करना गंभीर और गैर-जमानती अपराध माना जाता है. वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, दोष सिद्ध होने पर आरोपियों को तीन से सात वर्ष तक के कठोर कारावास और भारी आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है. आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 (संशोधन 2022), भारतीय वन अधिनियम 1927 तथा महाराष्ट्र वन नियम 2014 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.
* दोनों आरोपियों को न्यायालय ने 27 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर भेजा
गिरफ्तार दोनों आरोपियों को अमरावती न्यायालय में पेश किया गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने उन्हें 27 जुलाई तक पुलिस रिमांड (पीसीआर) पर भेज दिया है. जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान फरार आरोपी, तेंदुओं की खाल, खरीदारों और पूरे तस्करी नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आएगी.
* वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुई कार्रवाई
यह पूरी कार्रवाई उपवन संरक्षक अर्जुना के. आर., विभागीय वन अधिकारी (विजिलेंस) कमलेश पाटिल तथा सहायक वन संरक्षक ज्ञानेश्वर देसाई के मार्गदर्शन में की गई. अभियान का नेतृत्व चांदूर रेलवे की वनपरिक्षेत्र अधिकारी शीतल घुटे और वडाली के वनपरिक्षेत्र अधिकारी प्रदीप भट ने किया. कार्रवाई में वनपाल ए.ए. वानखेडे, ए.आई. शेख, होमकांत सुरते, बाबूराव खैरकर, प्रशांत पाटिल, गजानन लादे, अमित गोफने, सुनील कालपांडे, विपिन बुंदेले, रूपाली वर्हाडे, दिनेश धारपवार, रजनीकांत आडे और राधिका पोहेकर सहित वन विभाग के अनेक अधिकारी और कर्मचारी शामिल रहे. वहीं वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र में कार्यरत आदि गुडे, कुणाल दातेराव और शुभम मिश्रा ने भी अभियान में सहयोग किया.
* वन्यजीव संरक्षण के लिए चेतावनी
दो तेंदुओं की हत्या और उनके अंगों की तस्करी का यह मामला विदर्भ क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे गिरोहों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो क्षेत्र के दुर्लभ वन्यजीवों के अस्तित्व पर खतरा बढ़ सकता है. फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और वन विभाग को उम्मीद है कि फरार आरोपी की गिरफ्तारी तथा पुलिस रिमांड के दौरान होने वाली पूछताछ से इस तस्करी नेटवर्क के कई और चेहरे बेनकाब होंगे. अब सबकी नजर इस बात पर है कि दो तेंदुओं की मौत के पीछे छिपा यह काला कारोबार आखिर कितना बड़ा है और इसके तार कहां तक जुड़े हुए हैं.
* तेंदुओं की शिकार कहां व कब हुई, यह जांच का विषय
इस पूरे मामले को लेकर जानकारी व प्रतिक्रिया हेतू संपर्क किए जाने पर चांदूर रेल्वे वनविभाग की आरएफओ शीतल घुटे ने बताया कि, चांदूर रेल्वे वनपरिक्षेत्र में शामिल जंगलों में उनके अधिनस्थ वनरक्षकों एवं वनपालों की नियमित गश्त चलती रहती है और वे स्वयं कई बार जंगल परिसर का दौरा करते हुए गश्त के दौरान दिखाई देनेवाली बातों की जानकारी प्राप्त करती है. परंतु इस दौरान उनके कार्यक्षेत्र अंतर्गत कहीं पर भी किसी तेंदूए की करंट लगकर मौत होने का मामला सामने नहीं आया. साथ ही आरएफओ शीतल घुटे ने यह भी बताया कि, गिरफ्तार आरोपियों के पास से बरामद तेंदुए के अवशेष काफी पुराने है. जिसका एक मतलब यह भी है कि, जिस तेंदुए के अवशेष बरामद हुए है, उसकी मौत काफी पहले हुई थी. इसके अलावा चांदूर रेल्वे से अमरावती के बीच हो रही वन्यजीव अवयव तस्करी के बारे में स्थानीय अधिकारियों को कोई जानकारी नहीं रहने के संदर्भ में पुछे गए सवाल पर आरएफओ शीतल घुटे का कहना रहा कि, वैसे तो वनविभाग का खुफिया दस्ता भी ऐसी जानकारीयां निकालने हेतु कार्यरत रहता है. लेकिन कहीं बार वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाओं के कार्यकर्ताओं द्वारा वनविभाग को ऐसी जानकारी देने की बजाए सीधे वाईल्ड लाईफ कंट्रोल ब्यूरो से संपर्क कर जानकारी साझा की जाती है. क्योंकि ऐसे कार्यकर्ताओं को यह डर भी रहता है कि, उनके द्वारा संरक्षित वन्यक्षेत्र में बिना अनुमती प्रवेश किए जाने को लेकर उनके खिलाफ वनविभाग द्वारा कार्रवाई की जा सकती है. इसके अलावा आरएफओ शीतल घुटे ने यह भी कहा कि, हिरासत में लिए गए दोनों आरोपी इस समय वनविभाग की कस्टडी में है. जिनसे कडाई के साथ पुछताछ करते हुए उनके संपर्क सुत्रों को खंगाला जा रहा है. ताकि वन्यजीवों की अवैध शिकार तथा वन्यजीवों के अवयवों की बिक्री व तस्करी के साथ जुडे पूरे रैकेट का पर्दाफाश किया जा सके.





