राधाकृष्ण मंदिर में 1100 तुलसी पौधों का वितरण
आषाढी एकादशी का अपार उत्साह

* विठ्ठल रंग में रंगे सभी, महाआरती के तीन वर्ष पूर्ण
अमरावती /दि.25- राधा कृष्ण सेवा समिति द्वारा धनराज लेन स्थित राधा कृष्ण मंदिर में राधा कृष्ण समिति द्वारा आयोजित एकादशी उत्सव को 3 वर्ष पूर्ण होने पर देवशयनी एकादशी का भव्य और दिव्य आयोजन किया गया. शून्य से शिखर कीओर बढ़ता यह आयोजन मंदिर में आने वाले भक्तों की आस्था, श्रद्धा और विश्वास की वजह से संभव हो रहा हैं. सनातन धर्म आने वाली युवा पीढ़ी को जोड़ने और समाज को आध्यात्मिक सूत्र में बांधने के लिए कुछ लोगों ने संकल्प लेकर इस आयोजन की शुरुआत की थी.
समूचे विदर्भ में सर्वप्रथम इस आयोजन की शुरुआत संतो की नगरी अमरावती से हुई है. 3 वर्ष पूर्ण होने पर समिति द्वारा 1100 तुलसी के पौधों का वितरण किया गया. मंदिर की सुंदर सजावट, हर एकादशी को संतों का आगमन, उनकी वाणी से एकादशी का महत्व, विविध उत्सव पर झांकियां, पालखी आदि आयोजन समिति समय-समय पर करते रहती है, इसमें सभी सेवादारीअपनी निष्ठा से सेवा देते हैं. आषाढी एकादशी को भक्तों को संस्कार वाटिका के छोटे-छोटे बच्चों द्वारा विट्ठल रुक्मिणी की झांकी, वारकरी पालखी के दर्शन हुए. हजारों भक्तों की आस्था का यह मंदिर साक्षात पंढरपुर लग रहा था. राधा कृष्ण के अलौकिक श्रृंगार पंढरपुर के दर्शन कर रहे थे. इतनी सुंदर छवि को अपने मोबाइल में कैद करने के लिए भक्तों की होड़ लगी थी.
पंढरपुरी एकादशी को सु श्री रामप्रिया जी (माई ) के मुखारविंद से एकादशी महातम सुनने का सौभाग्य भक्तों को प्राप्त हुआ. माई ने समिति को बधाई देते हुए इस आयोजन की खास विशेषता बताइए इसमें विशेष रूप से वैष्णव का सानिध्य, प्रभु सकीर्तन, निरंतरता, संकल्प, समय की सीमा, सेवा सहयोग सद्भाव है जो इस आयोजन को सफल बनाता है. के जीवन में नियम का होना बहुत जरूरी है. भारत एक पावर हाउस है जहां जन्म लेने भगवान तरसते हैं. माई ने कहां की पंढरपुर एक ऐसा मंदिर है जहां प्रभु के चरणों को स्पर्श करने का सौभाग्य भक्तों को प्राप्त होता है. व्रत का राजा एकादशी व्रत करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. के जीवन में तीन निष्ठा का होना बहुत जरूरी है जिसमें नाम जप गले में तुलसी की माला और एकादशी व्रत बताया गया हैं.
* महाआरती, प्रसाद वितरण
आज के यजमान श्री राधेश्याम जी नीरज जी डागा, स्व. शांताबाई गोपाल दास जी भूतड़ा स्मृति, श्री संजय जी गोपालदास जी भूतडा, श्री अमित जी ओमप्रकाश जी भूतडा, पुणे, स्व. श्रीमती शांताबाई सचिननंद जी चिरानिया, स्व. श्री तुलसी राम जी बागड़ी, प्रप्या आदित्य मानधने, पुणे, स्व. श्रीमती नीता देवी भंवरी लाल जी भंडारी, डॉ अमिता उमेश जी राठी, शांताबाई ओमप्रकाश जी लड्डा, उर्मिला संजय जी गांधी, श्री मोहित जी संतोष जी बलदवा, श्री अनिल जी पनपालिया, स्व. कौशल्या देवी मदन लाल जी टावरी, स्व. सूरजदेवी भीकमचंद जी भूतड़ा, नकुल मुकुंद जी राठी कापली वाले, जानवी श्याम जी राठी, राम साईं हार्ट मेटरनिटी हॉस्पिटल, स्व. सददीबाई मुगीलाल जी सोमानी, मुंबई, श्री गोविंदा प्रकाश जी केला, अर्चना रमन कुमार जी झंवर, स्व. हेमवंती चंपालाल जी हेड़ा, श्री गायल माता परिवार आसोप, गोपालदास जी राठी सायत थे. ध्वजा के यजमान मनमोहन जी गग्गड रहे. समिति ने सभी के सहयोग के प्रति आभार माना.