अमरावती में 367 स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे

2 हजार से अधिक छात्रों की पढ़ाई प्रभावित

* एक शिक्षक पर कई कक्षाओं का बोझ
* ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में सबसे गंभीर स्थिति
अमरावती /दि.27– अमरावती जिले में सरकारी प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था गंभीर शिक्षक संकट से जूझ रही है. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की यू-डाइस प्लस 2025-26 रिपोर्ट के अनुसार जिले में 367 एकल-शिक्षक (सिंगल-टीचर) स्कूल हैं, जहां 2 हजार से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं. इन स्कूलों में एक ही शिक्षक को एक साथ कई कक्षाओं और विषयों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है.
रिपोर्ट के मुताबिक, महाराष्ट्र में एकल-शिक्षक स्कूलों की संख्या बढ़कर करीब 9 हजार हो गई है. वर्ष 2025-26 में इसमें 1,144 स्कूलों की वृद्धि दर्ज की गई है. शिक्षा विभाग का दावा है कि एकल-शिक्षक स्कूलों में अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया जारी है, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो. हालांकि, जमीनी स्तर पर अभी भी कई स्कूल शिक्षक की कमी से जूझ रहे हैं.
* ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक समस्या
एकल-शिक्षक स्कूलों की सबसे अधिक संख्या ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में है. छात्र संख्या कम होने के कारण सरकारी मानकों के अनुसार केवल एक शिक्षक की नियुक्ति होती है. वहीं, सेवानिवृत्ति, तबादले और रिक्त पद समय पर नहीं भरने से स्थिति और गंभीर हो गई है.
* एक शिक्षक पर कई कक्षाओं की जिम्मेदारी
कई स्कूलों में कक्षा 1 से 5 या 1 से 7 तक की पढ़ाई केवल एक या दो शिक्षकों के भरोसे चल रही है. ऐसे में शिक्षकों को मल्टी-क्लास शिक्षण पद्धति अपनानी पड़ती है, जिससे प्रत्येक कक्षा को पर्याप्त समय देना मुश्किल हो जाता है.
* सरकार की नीति पर उठ रहे सवाल
15 मार्च 2024 से लागू छात्र संख्या आधारित मान्यता और शिक्षक नियुक्ति नीति को लेकर शिक्षा क्षेत्र में असंतोष है. शिक्षकों और शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस नीति के कारण ग्रामीण स्कूलों में शिक्षक संख्या लगातार घट रही है और इसका सीधा असर विद्यार्थियों की शिक्षा पर पड़ रहा है.
* तहसीलनिहाय एकल-शिक्षक स्कूल
धारणी 55, चिखलदरा 47, अंजनगांव सुर्जी 31, चांदूर बाजार 31, दर्यापुर 27, नांदगांव खंडेश्वर 25, भातकुली 21, अचलपुर 20, वरुड 20, अमरावती 19, तिवसा 18, धामणगांव रेलवे 17, मोर्शी 16, चांदूर रेलवे 11.

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