अमरावती में जलप्रलय जैसे हालात, बाढ़ में फंसे 23 लोगों को बचाया गया

तीन स्थानों पर जिला खोज एवं बचाव दल ने पूरी रात चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन

* रेस्क्यू टीम ने उफनती नदियों, अंधेरे और विषैले सांपों के बीच दिखाई अदम्य बहादुरी
* 24 घंटे में 111 मिमी बारिश, शहर से गांव तक जनजीवन अस्त-व्यस्त
अमरावती/दि.31- मानसून ने इस बार ऐसा रौद्र रूप दिखाया है कि अमरावती जिला पिछले 24 घंटों में लगभग बाढ़ जैसी स्थिति का सामना करने को मजबूर हो गया. लगातार हुई मूसलाधार बारिश ने शहर और ग्रामीण क्षेत्रों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया. भारतीय मौसम विभाग के अनुसार अमरावती में मात्र 24 घंटों के भीतर 111 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जिसने इस मानसून का नया रिकॉर्ड स्थापित कर दिया. शहर के प्रमुख अंडरपास पानी में डूब गए, सैकड़ों घरों और दुकानों में पानी घुस गया, कई गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों से टूट गया और नदियां-नाले उफान पर पहुंच गए. इसी संकट के बीच अमरावती जिला प्रशासन की जिला खोज एवं बचाव टीम (डीडीआरएफ) लोगों के लिए किसी देवदूत से कम साबित नहीं हुई. टीम ने 30 जुलाई की रात से 31 जुलाई की सुबह तक तीन अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत जोखिमपूर्ण अभियान चलाकर 23 लोगों को सुरक्षित बचाने में सफलता प्राप्त की. तेज जलप्रवाह, घना अंधेरा, नदी में बहकर आ रही विशाल लकड़ियां, पेड़, झाड़ियां, मलबा और विषैले सांपों के बीच बचाव दल ने अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों तक पहुंच बनाई और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया. जिला प्रशासन का मानना है कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं होती तो बड़ी जनहानि हो सकती थी. यह संपूर्ण अभियान जिलाधिकारी आशीष येरेकर के निर्देश तथा निवासी उपजिलाधिकारी संतोष काकड़े एवं जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी सुरेंद्र रामेकर के मार्गदर्शन में संचालित किया गया.
* संग्रामपुर में छत पर फंसे 9 लोगों को मिला जीवनदान
30 जुलाई की रात लगभग 11 बजे जिला नियंत्रण कक्ष को सूचना मिली कि नांदगांव खंडेश्वर तहसील के संग्रामपुर गांव के समीप बहने वाली बेमडा नदी में अचानक आई बाढ़ के कारण कई लोग चारों ओर से पानी में घिर गए हैं. सूचना मिलते ही जिला खोज एवं बचाव दल तत्काल रवाना हुआ और रात करीब 12 बजे घटनास्थल पर पहुंचा. तब तक पानी का स्तर इतना बढ़ चुका था कि लोग एक मकान की छत पर शरण लेने को मजबूर हो गए थे. चारों ओर तेज बहाव और लगातार बारिश के कारण हालात बेहद भयावह हो चुके थे. बचाव दल ने सबसे पहले फंसे लोगों से संपर्क स्थापित कर उनका मनोबल बढ़ाया. इसके बाद रबर बोट की सहायता से एक-एक कर सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. बचाए गए लोगों में हनुमंत उके, रवी मेश्राम, सुभाष भोयर, सतीश मारभते, आशीष उके, गौरव मारबले, ओम गिरी, अमोल भोयर और अनिकेत केवट शामिल हैं. रात के घुप अंधेरे और तेज बहाव के बीच यह अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन टीम ने सभी नौ लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर एक बड़ी दुर्घटना टाल दी.
* एक ही परिवार के सात सदस्य बाढ़ में घिरे, समय रहते बचाया
इसी दौरान प्रशासन को एक अन्य स्थान पर सूचना मिली कि एक परिवार के सात सदस्य बाढ़ के पानी में फंस गए हैं. सूचना मिलते ही बचाव दल घटनास्थल पर पहुंचा और तत्काल अभियान शुरू किया. टीम ने साहसिक प्रयास करते हुए पूरे परिवार को सुरक्षित बाहर निकाल लिया. बचाए गए लोगों में साहेबराव भाऊसिंग जाधव, सावित्री जाधव, पूनम जाधव, जेतालाल जाधव, अनन्या जाधव, सोनम जाधव और रीना जाधव शामिल हैं. इस परिवार में चार महिलाएं, दो पुरुष और दो वर्ष का एक मासूम बच्चा भी शामिल था. बढ़ते जलस्तर को देखते हुए यदि कुछ देर और हो जाती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी.
* मोखड नदी में फंसे सात लोगों को मात्र 30 मिनट में निकाला
30 जुलाई की रात लगभग 8.35 बजे जिला नियंत्रण कक्ष को सूचना मिली कि राजुरा क्षेत्र की मोखड नदी में सात लोग बाढ़ के कारण फंस गए हैं. सूचना मिलते ही खोज एवं बचाव दल रात 9.20 बजे घटनास्थल पर पहुंचा और तुरंत अभियान शुरू कर दिया. टीम के गोताखोरों ने पहले नदी की स्थिति का निरीक्षण किया और फिर रबर बोट के जरिए बचाव कार्य शुरू किया. इस दौरान दल को तेज जलप्रवाह, बहते पेड़, लकड़ियां, झाड़ियां, मलबा, विषैले सांप और घने अंधेरे जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद टीम ने केवल 30 मिनट के भीतर सभी सात लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर तहसील प्रशासन के सुपुर्द कर दिया.
* घटनास्थलों पर उमड़ी भीड़, बचाव दल की बहादुरी को मिला सलाम
तीनों रेस्क्यू अभियानों के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थलों पर मौजूद रहे. लोगों ने बचाव दल के साहस, समर्पण और तत्परता की खुलकर सराहना की. अभियानों में पुलिस विभाग, राजस्व विभाग तथा स्थानीय प्रशासन ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. ग्रामीणों का कहना था कि जिस परिस्थिति में बचाव दल ने काम किया, वह किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था.
* इन जांबाजों ने निभाई जिम्मेदारी
संग्रामपुर और मोखड नदी बचाव अभियान में विशाल निमकर, कौस्तुभ वैद्य, पी.एस. गायकवाड़, गणेश कायदेकर, सूरज ठाकूर, दीपक भोईटे, मनीष उताणे, गोकुल मुंडे, सचिन धरमकर, आकाश निमकर, मुकेश सदाशिव, सचिन पवार, चैतन्य पोहाणे, प्रफुल भुसारी, अजय आसोले तथा आपदा मित्र तुलशीराम गोडाणे और भूषण काले ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इन सभी जवानों और स्वयंसेवकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों तक पहुंच बनाई और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला.
* अमरावती शहर बना जलमग्न, अंडरपास बने तालाब
– घरों और दुकानों में घुसा पानी, लाखों का नुकसान
बुधवार देर रात से शुरू हुई तेज बारिश ने गुरुवार सुबह तक पूरे शहर को जलमग्न कर दिया. भारतीय मौसम विभाग के अनुसार अमरावती में 24 घंटों के भीतर 111 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो इस मानसून की सबसे बड़ी वर्षा घटनाओं में से एक है.
लगातार बारिश के कारण अमरावती शहर के अनेक हिस्से जलमग्न हो गए. सबसे गंभीर स्थिति राजापेठ रेलवे अंडरपास में देखने को मिली, जहां लगभग दो फीट पानी भर गया. अंडरपास के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और कई वाहन पानी में बंद हो गए. इसके अलावा नवाथे, अकोली और चांगापुर अंडरपास भी पूरी तरह जलमग्न हो गए. राजापेठ, मालटेकड़ी, फ्रेजरपुरा, दस्तूर नगर, नवाथे नगर, कैंप क्षेत्र, इर्विन चौक और बडनेरा रोड सहित अनेक इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी रही.
बारिश का सबसे अधिक असर निचले इलाकों में देखने को मिला. अनेक घरों में पानी घुस जाने से लोगों को रातभर जागकर घरेलू सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा. फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, खाद्यान्न और अन्य घरेलू सामग्री पानी में भीगकर खराब हो गई. कई व्यापारिक प्रतिष्ठानों के बेसमेंट भी पानी से भर गए, जिससे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. कई दुकानों में रखा लाखों रुपये का माल खराब होने की आशंका व्यक्त की जा रही है.
* गांवों का संपर्क टूटा, खेत बने तालाब
जिले की नदियां और नाले उफान पर होने के कारण नांदगांव खंडेश्वर, चांदूर रेलवे, धारणी, मोर्शी, दर्यापुर, वरूड और अंजनगांव सुर्जी क्षेत्रों में कई पुलों के ऊपर से पानी बहने लगा. धामक सहित कई गांवों का संपर्क घंटों तक मुख्य मार्गों से कट गया. प्रशासन को ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्थाएं करनी पड़ीं. लगातार बारिश के कारण हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई है और खरीफ फसलों को नुकसान की आशंका बढ़ गई है.


* उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने लिया स्थिति का जायजा
जिले में बाढ़ जैसी स्थिति को देखते हुए महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने जिलाधिकारी आशीष येरेकर से दूरभाष पर संपर्क कर हालात की विस्तृत जानकारी ली. उन्होंने प्रशासन को निर्देश दिए कि राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और प्रभावित नागरिकों तक हर संभव सहायता तत्काल पहुंचाई जाए. उपमुख्यमंत्री ने संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर रखने और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए.
* अगले 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र और सक्रिय मानसूनी ट्रफ के कारण विदर्भ सहित महाराष्ट्र के कई हिस्सों में अगले 48 घंटों तक भारी से अति भारी वर्षा जारी रह सकती है. नदियों का बढ़ता जलस्तर, बांधों से छोड़ा जा रहा पानी और लगातार हो रही बारिश आने वाले समय में स्थिति को और गंभीर बना सकती है. अमरावती में एक ओर जिला खोज एवं बचाव दल की बहादुरी ने 23 लोगों को नया जीवन दिया है, वहीं दूसरी ओर यह आपदा एक बार फिर शहरी जलनिकासी व्यवस्था, अंडरपास प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण तंत्र की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल भी खड़े कर रही है. फिलहाल पूरा जिला हाई अलर्ट पर है और प्रशासन नागरिकों से सतर्क रहने तथा किसी भी जोखिम से बचने की लगातार अपील कर रहा है.


* वर्धा में आधी रात का रोमांच, पेड़ बना युवक का जीवनदाता
जहां यवतमाल में बारिश ने एक परिवार को तबाह कर दिया, वहीं वर्धा जिले में एक युवक चमत्कारिक रूप से मौत के मुंह से लौट आया. हिंगणघाट तहसील के अल्लीपुर-टाकली मार्ग पर स्थित यशोदा नदी में गुरुवार रात अचानक बढ़े जलप्रवाह में अक्षय माटे नामक युवक बह गया. करीब 200 मीटर तक बहने के बाद उसे नदी के बीच एक पेड़ दिखाई दिया. उसने किसी तरह पेड़ की शाखा पकड़ ली और उसी पर चढ़ गया. पूरी रात वह उफनती नदी के बीच पेड़ पर बैठा रहा.
सूचना मिलते ही प्रशासन, राजस्व विभाग, एसडीआरएफ और जिला आपदा प्रतिक्रिया दल मौके पर पहुंच गए. पूरी रात चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शुक्रवार सुबह करीब चार बजे युवक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया.
विदर्भ में रिकॉर्ड बारिश, कई जिलों में खतरे की घंटी
पिछले 24 घंटों में विदर्भ के विभिन्न जिलों में भारी वर्षा दर्ज की गई. जानकारी के मुताबिक विगत 24 घंटे के दौरान वर्धा में 160 मिमी, यवतमाल में 142 मिमी, बुलढाणा में 128 मिमी, वाशिम में 112 मिमी, अमरावती में 111 मिमी, अकोला में 96 मिमी, गडचिरोली में 76.8 मिमी तथा नागपुर में 52.6 मिमी पानी बरसा है. लगातार बारिश के कारण नदियों और जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है. पूरे क्षेत्र में तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस नीचे दर्ज किया गया है.
* महाराष्ट्र में बारिश को लेकर रेड अलर्ट
– कई स्थानों पर बांधों से छोड़ा जा रहा पानी
मौसम विभाग ने यवतमाल, नाशिक और जलगांव जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है. अगले 24 से 48 घंटों में अत्यधिक वर्षा की संभावना व्यक्त की गई है. नाशिक में गंगापुर धरण से पानी छोड़ा जा रहा है. जलगांव में हतनूर धरण के 36 दरवाजे खोल दिए गए हैं. वाशिम में पैनगंगा नदी उफान पर है, जबकि सोलापुर में भीमा नदी के बढ़े जलप्रवाह से महाराष्ट्र-कर्नाटक संपर्क प्रभावित हुआ है. उजनी बांध भी ओवरफ्लो की स्थिति में पहुंच चुका है, जिससे प्रशासन की चिंता और बढ़ गई है.

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