अमरावती ग्रामीण में पहली बार ड्रग तस्कर की संपत्ति फ्रीज

ऑपरेशन ‘कवच’ का असर

* अब शहर में भी हो सकती है ऐसी कार्रवाई
अमरावती/दि.31 – नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कवच’ के तहत अमरावती ग्रामीण पुलिस ने ऐतिहासिक सफलता हासिल की है. अमरावती जिले के इतिहास में पहली बार एनडीपीएस एक्ट के तहत एक ड्रग तस्कर की अवैध संपत्ति फ्रीज करने के प्रस्ताव को भारत सरकार की सक्षम प्राधिकरण ने अंतिम मंजूरी दे दी है. अब इस कार्रवाई के बाद अमरावती शहर में भी ड्रग तस्करों की अवैध संपत्तियों पर इसी तरह की कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है.
28 जुलाई को मुंबई की सक्षम प्राधिकरण ने चांदूर रेलवे पुलिस स्टेशन में दर्ज एनडीपीएस प्रकरण के लालखेड निवासी आरोपी प्रवीण चंदू चव्हाण की संपत्ति फ्रीज करने के आदेश को मंजूरी दी. जांच में सामने आया था कि आरोपी ने मादक पदार्थों की तस्करी से अवैध रूप से संपत्ति अर्जित की थी. तत्कालीन थाना प्रभारी अजय आकरे द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के बैंक खातों में जमा राशि तथा उसके तीन मंजिला मकान को फ्रीज करने का आदेश जारी किया गया है. अमरावती जिले में एनडीपीएस अधिनियम के तहत इस प्रकार की यह पहली कार्रवाई मानी जा रही है. यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक निकेतन कदम तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दत्ता तोटेवाड़ के मार्गदर्शन में की गई. इस अभियान में पुलिस निरीक्षक अशोक लांडे, तत्कालीन थाना प्रभारी अजय आकरे, सहायक पुलिस निरीक्षक विशाल रोकड़े और पुलिस हवलदार अमोल देशमुख सहित अन्य अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही.
पुलिस अधीक्षक निकेतन कदम ने स्पष्ट किया है कि ‘ऑपरेशन कवच’ के तहत नशीले पदार्थों की तस्करी करने वालों के खिलाफ केवल आपराधिक मामले दर्ज करना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनकी अवैध कमाई से अर्जित संपत्तियों को भी जब्त या फ्रीज करने की कार्रवाई की जाएगी, ताकि ड्रग तस्करी की आर्थिक जड़ें खत्म की जा सकें. सूत्रों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्र में मिली इस सफलता के बाद अब अमरावती शहर पुलिस भी एनडीपीएस मामलों में शामिल आरोपियों की अवैध संपत्तियों की जांच कर इसी तरह की कानूनी कार्रवाई पर विचार कर सकती है. हालांकि, शहर में ऐसी कार्रवाई संबंधित मामलों की जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी के बाद ही की जाएगी. पुलिस का मानना है कि अपराधियों की अवैध संपत्ति पर कार्रवाई से मादक पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी और संगठित अपराध के आर्थिक नेटवर्क को कमजोर किया जा सकेगा.

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