पश्चिम विदर्भ की 45 तहसीलों में अतिवृष्टि, 6 की मौत
सीजन में पहलीबार हुई मूसलाधार बारिश, सभी नदी नालों में आयी बाढ

अमरावती /दि.1- बीते 24 घंटोे के दौरान अमरावती संभाग के पांचों जिलों में औसत 108 मिमी बारिश दर्ज हुई. बारिश को लेकर जारी रेड अलर्ट के दौरान पांचों जिलों की करीब 45 तहसीलों में अतिवृष्टि दर्ज की गई है. जिसके चलते संभाग के सभी नदी नालों में जबर्दस्त उफान रहा और अलग-अलग स्थानों पर आयी बाढ में पांच लोगों के बह जाने की प्राथमिक जानकारी है. जबकि बारिश की वजह से दीवार ढह जाने के चलते मलवे के नीचे दबकर एक महिला की मौत बुलढाणा जिले में हुई. इसके अलावा लगभग 120 छोटे-बडे जानवरों की मौत भी बाढ व बारिश की वजह से होने की जानकारी सामने आयी है.
बता दें कि आयएमडी द्बारा अमरावती संभाग में बारिश को लेकर रेड अलर्ट दिया गया था और इस दौरान विगत 24 घंटों में अमरावती जिले में 76 मिमी, यवतमाल जिले में 135 मिमी, अकोला जिले में 74.6 मिमी, वाशिम जिले में 110 मिमी और बुलढाणा जिले में सर्वाधिक 124.6 मिमी बारिश हुई. एक दिन के दौरान हुई बारिश ने अमरावती संभाग में बारिश के 26 फीसद बैकलॉग को पूरा कर दिया है. बारिश का आधा सीजन बीतने के बाद हुई मूसलाधार बारिश की वजह से संभाग के सभी नदी नालों में जल प्रवाह तेज होकर जबर्दस्त बाढ आ गई जिसके चलते कई जगहों पर आवाजाही पूरी तरह से बंद रही. इसके अलावा निचले इलाकों के कई घरों में बाढ व बारिश का पानी जा घुसा. इस दौरान लोगों के बाढ में अटक जाने के चलते अमरावती जिले में दो तथा यवतमाल जिले में एक स्थान पर रेस्क्यू ऑपरेशन करते हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. ऐसी जानकारी विभागीय आयुक्त कार्यालय के कक्ष द्बारा दी गई. साथ ही यह भी बताया गया कि अतिवृष्टि वाले क्षेत्रों में बारिश का पानी खेत खलिहानों में घुस जाने तथा नदी नालों में बाढ आने की वजह से फसलें व उपजाउ मिट्टी का काफी नुकसान हुआ है. इसे लेकर राजस्व एवं कृषि विभाग के पथकों द्बारा सर्वेक्षण किया जा रहा है.
* बोरमाला के तालाब में डूबकर 9 वर्षीय बच्चे की मौत
चंद्रपुर जिले की सावली तहसील अंतर्गत बोरमाला परिसर स्थित तालाब में डूबकर 9 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई. यह घटना शुक्रवार की शाम 5 बजे के आसपास घटित हुई. मृतक बच्चे का नाम ध्रुप दिवाकर कारमेंगे बताया गया है. जानकारी के मुताबिक ध्रुप की मां धान रोपाई का काम करने हेतु किसी अन्य राज्य में गई हुई है और उसके पिता गांव में रहकर ही मजदूरी का काम करते हैं. शुक्रवार की शाम ध्रुप अपने कुछ दोस्तों के साथ तालाब परिसर की ओर गया था और तालाब के किनारे घूमते समय पांव फिसल जाने की वजह से गहरे पानी में जा गिरा. इस समय साथ मौजूद बच्चों द्बारा चीख पुकार मचाए जाने के बाद आसपास के लोग तुरंत मौके की ओर दौडे और घटना की सूचना पाथरी पुलिस थाने को दी गई. पश्चात पुलिस के पथक एवं नागरिकों के दल ने अथक प्रयासों के बाद ध्रुप कारमेंगे को पानी में से खोज निकाला. लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और काफी समय तक पानी में डूबे रहने की वजह से ध्रुप कारमेंगे दम तोड चुका था.
* नदी में बहकर आनेवाले लकडों को जमा करने ग्रामीणों की दौडभाग
– मेलघाट में नदी के उफान भरते ही कई जगहों पर होता है जानलेवा काम
विगत दो दिनों के दौरान हुई मूसलाधार बारिश के चलते इस समय मेलघाट की धारणी व चिखलदरा तहसीलों से होकर गुजरनेवाले नदी नालों में जबर्दस्त बाढ आयी हुई है. पानी के इस तेज बहाव में बडे पैमाने पर लकडियां भी बहकर आती है. जिन्हें इकट्ठा करने के लिए इस समय मेलघाट के कई गांवों में लोगबाग अपनी जान का खतरा उठाते हुए पानी के तेज बहाव में उतरते हैं. साथ ही साथ कई स्थानों पर उफनती नदी में जाल डालते हुए मच्छीमारी भी की जाती है. हालांकि ऐसा करना जानलेवा भी साबित हो सकता है. जिसके चलते प्रशासन ने नागरिकों से ऐसा काम नहीं करने का आवाहन भी किया है.
उल्लेखनीय है कि इस बार बारिश का आगमन अन्य क्षेत्रों की तरह मेलघाट में भी थोडा विलंब से हुआ. लेकिन पिछले दो तीन दिनों से मेलघाट में मूसलाधार बारिश हो रही है. जिसके चलते इस पहाडी क्षेत्र में सभी नदी नालों में पानी का जबर्दस्त उफान आया हुआ है और कुछ स्थानों पर नदिया बाढ में डूबी हुई है. सिपना नदी में आयी बाढ के जरिए बडे पैमाने पर जंगल की लकडियां भी बहकर आ रही है. जिन्हें जमा करते हुए घर ले जाने हेतु लोगबाग अपनी जान की भी परवाह नहीं कर रहे. धारणी तहसील में उतावली में उनके उपर से पानी भरते समय नागरिकों द्बारा बाढ में बहकर आनेवाली लकडियों को इकट्ठा करने हेतु की जा रही जद्दोजहद के खतरनाक व रोमांचक कहा जा सकता है. क्योंकि सिपना नदी से बहकर आनेवाले लकडियों को जमा करने हेतु कई लोग पानी में डूबे हुए पूल पर ठिया जमाए खडे थे. इसकी जानकारी मिलते ही धारणी के राजस्व एवं पुलिस महकमें के अधिकारियों ने उन्हें वहां से हटाया और इस तरह का कृत्य नहीं करने हेतु कहा.
ज्ञात रहे कि मेलघाट में घने जंगल रहने के चलते अवैध तरीके से वृक्ष कटाई बडे पैमाने पर होती है. साथ ही गर्मी के मौसम में सूखे हुए पेडों की टहनियां बारिश के मौसम दौरान टूटकर गिरती है, ऐसी टूटी हुई लकडियां बारिश के मौसम दौरान पानी के तेज बहाव में बहकर आगे निकल जाती है. जिन्हें जमा करते हुए जलाउ इंधन के लिए इकट्ठा करने का काम प्रतिवर्ष बारिश के मौसम दौरान मेलघाट में जगह-जगह पर होता है.