सरकारी छात्रावासों में अब ‘इन कैमरा’ ई-टेंडरिंग, मिलीभगत पर लगेगी रोक
भोजन आपूर्ति में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आदिवासी विकास विभाग का फैसला

* पूरी प्रक्रिया होगी रिकॉर्ड
अमरावती /दि.4- आदिवासी विकास विभाग ने सरकारी छात्रावासों में भोजन आपूर्ति के ठेकों में पारदर्शिता लाने और कथित मिलीभगत पर अंकुश लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. अब परतवाड़ा परियोजना अंतर्गत सरकारी छात्रावासों में फूड सप्लाई के लिए ‘इन कैमरा’ ई-टेंडरिंग प्रक्रिया अपनाई जाएगी. इस संबंध में धरनी परियोजना अधिकारी सिद्धार्थ शुक्ला ने 29 जुलाई को आदेश जारी किया है.
विभाग को शिकायतें मिली थीं कि कुछ सरकारी छात्रावासों में हाउसकीपर अपनी पसंद के ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए भोजन आपूर्ति के ठेके दिला रहे हैं. शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने पहले जारी टेंडर रद्द कर दोबारा पारदर्शी प्रक्रिया से निविदाएं आमंत्रित करने का निर्णय लिया है.
* शिकायत के बाद हुई कार्रवाई
बताया गया कि मोर्शी और परतवाड़ा के सरकारी छात्रावासों में पसंदीदा फूड सप्लायरों को ठेके दिए जाने की शिकायत 25 जुलाई को प्रदीप ठाकरे ने अतिरिक्त आयुक्त संदीप गोलाईट और परियोजना अधिकारी सिद्धार्थ शुक्ला को दस्तावेजों के साथ सौंपी थी. जांच के बाद पूरी प्रक्रिया को दोबारा कराने का निर्णय लिया गया.
* टेंडर के लिए ये दस्तावेज अनिवार्य
नई ई-टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने वाले ठेकेदारों के लिए जीएसटी पंजीकरण प्रमाणपत्र, फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन लाइसेंस, शॉप एक्ट लाइसेंस, पैन कार्ड, आधार कार्ड आदि दस्तावेज अनिवार्य किए गए हैं. इच्छुक आपूर्तिकर्ता 4 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
* पूरी प्रक्रिया होगी कैमरे की निगरानी में
विभाग के अनुसार, पूरी ई-टेंडर प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी, ताकि किसी भी स्तर पर पक्षपात या अनियमितता की गुंजाइश न रहे. इससे गुणवत्ताहीन भोजन की आपूर्ति करने वाले ठेकेदारों और मिलीभगत करने वाले कर्मचारियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी या नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ तत्काल निलंबन सहित कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
* अधिकारी ने क्या कहा
शिकायतें मिली थीं कि कुछ छात्रावासों में हाउसकीपर अपनी पसंद के आपूर्तिकर्ताओं के साथ मिलीभगत कर भोजन आपूर्ति के ठेके दे रहे थे. विद्यार्थियों के हित में पूरी प्रक्रिया दोबारा कराई जा रही है और इस बार संपूर्ण ई-टेंडरिंग ‘इन कैमरा’ होगी, ताकि पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके.
– सिद्धार्थ शुक्ला, परियोजना अधिकारी, धरनी





