सास ने अपनी किडनी देकर दामाद को दिया नया जीवन

ममता का अनोखा उपहार

* अमरावती सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में 75वां सफल किडनी प्रत्यारोपण
अमरावती/दि.4- अमरावती के विभागीय संदर्भ सेवा (सुपर स्पेशलिटी) अस्पताल में मानवता और रिश्तों की मिसाल पेश करते हुए एक सास ने अपनी किडनी दान कर अपने दामाद को नया जीवन दिया. अस्पताल में 75वां सफल किडनी प्रत्यारोपण किया गया, जो पूरी तरह आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत निःशुल्क संपन्न हुआ.
अचलपुर तहसील के पारडी निवासी 40 वर्षीय देवानंद किसन चव्हाण पिछले कई महीनों से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. करीब दस वर्ष पहले मुंबई में उनका एक बार किडनी प्रत्यारोपण हो चुका था, लेकिन समय के साथ प्रत्यारोपित किडनी ने भी काम करना बंद कर दिया. इसके बाद वे लगातार डायलिसिस पर निर्भर थे. डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि लंबे समय तक डायलिसिस स्थायी समाधान नहीं है और किडनी प्रत्यारोपण ही बेहतर विकल्प है. यह सुनकर मरीज की 55 वर्षीय सास रंजना श्रीराम सोलंके ने बेटी और दामाद के भविष्य को देखते हुए अपनी एक किडनी दान करने का निर्णय लिया. उनकी किडनी से दामाद का सफल प्रत्यारोपण किया गया और उसे नया जीवन मिला.
यह जटिल ऑपरेशन अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने सफलतापूर्वक पूरा किया. पूरी प्रक्रिया आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत मरीज को बिना किसी खर्च के उपलब्ध कराई गई. यह प्रत्यारोपण चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अमोल नरोटे और विशेष कार्य अधिकारी डॉ. मंगेश मेंढे के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ. ऑपरेशन में नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. हितेश गुल्हाने, यूरो सर्जन डॉ. राहुल पोटोडे, डॉ. विक्रम देशमुख, डॉ. प्रतीक चिरडे, एनेस्थीसिया विशेषज्ञों तथा नर्सिंग, डायलिसिस, फार्मेसी, आहार एवं समाजसेवा विभाग सहित विभिन्न विभागों के डॉक्टरों और कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि अमरावती का सुपर स्पेशलिटी अस्पताल अब विदर्भ ही नहीं, बल्कि अन्य जिलों और राज्यों के मरीजों के लिए भी किडनी प्रत्यारोपण का भरोसेमंद केंद्र बन चुका है. सास द्वारा दामाद को किडनी दान करने की यह घटना रिश्तों में प्रेम, त्याग और मानवता की एक प्रेरणादायक मिसाल बन गई है.

* अब जटिल किडनी प्रत्यारोपण के लिए मुंबई या नागपुर जाने की जरूरत नहीं
सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. हितेश गुल्हाने ने बताया कि अस्पताल में अत्यंत जटिल दूसरी बार किडनी प्रत्यारोपण की शल्यक्रिया सफलतापूर्वक की गई है. उन्होंने कहा कि मरीज का पहला किडनी प्रत्यारोपण लगभग दस वर्ष पहले मुंबई में हुआ था, लेकिन प्रत्यारोपित किडनी ने काम करना बंद कर दिया, जिसके बाद दोबारा प्रत्यारोपण करना पड़ा. विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम के संयुक्त प्रयासों से यह चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन सफल रहा और मरीज को नया जीवन मिला. डॉ. गुल्हाने ने कहा कि अब ऐसे जटिल किडनी प्रत्यारोपण के लिए मरीजों को मुंबई या नागपुर जाने की आवश्यकता नहीं है. अमरावती के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में ही अत्याधुनिक सुविधाओं और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम के माध्यम से उच्चस्तरीय उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है.

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