‘उन’ दो मरीजों से मिले विधायक बच्चू कडू

पार्षद दिनेश बुब ने न्यू आजाद मंडल पर करवाई मुलाकात

* स्वास्थ्य विभाग ने अपने ही दोनों ही कर्मचारियों को छोड दिया भगवान भरोसे
अमरावती/दि.7 – स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत रहनेवाले दो कर्मचारी विगत लंबे समय से गंभीर तौर पर बीमार चल रहे है. जिनकी स्वास्थ्य महकमे द्बारा कोई सुध नहीं ली जा रही. इसमें से मुंह काा कैंसर रहनेवाले एक स्वास्थ्य कर्मी को स्वास्थ्य विभाग ने सेवा से निष्कासित कर दिया है. वहीं विगत 3 वर्षो से एक सडक हादसे के चलते कोमा में रहनेवाले स्वास्थ्य कर्मी के परिवार को वेतन सहित अन्य कोई आर्थिक लाभ नहीं दिया जा रहा. इन दोनों स्वास्थ्य कर्मियों की कहानी व व्यथा से अवगत होने के साथ ही मनपा पार्षद दिनेश बूब ने इसकी जानकारी विधायक बच्चू कडू को दी थी. जिसके चलते विधायक बच्चू कडू ने गत रोज खापर्डे बगीचा परिसर स्थित न्यू आजाद मंडल पहुंचकर मुंह का कैंसर रहनेवाले स्वास्थ्य कर्मी से मुलाकात करनेे के साथ ही विगत तीन वर्षो से कोमा में पडे स्वास्थ्य कर्मी की मां और भतीजी से मुलाकात की. साथ ही इस बारे में स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय अधिकारियों सहित सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री से बातचीत कर जल्द ही कोई समाधानकारक रास्ता निकालने का आश्वासन दिया.
बता दें कि दैनिक अमरावती मंडल ने दो दिन पूर्व ही इन दोनों स्वास्थ्य कर्मियों की कहानियों को उजागर किया था जिसमें से पहली कहानी नागपुर जिला परिषद के स्वास्थ्य विभाग में विगत 14 वर्षो से स्वास्थ्य सेवक के तौर पर कार्यरत रहे अभिजीत बनकर की है. मूलत: अमरावती से वास्ता रखनेवाले अभिजीत बनकर को वर्ष 2022 में मुंह का कैंसर रहने की जानकारी सामने आयी थी. जिसके बाद से लेकर अब तक अभिजीत बनकर की 28 बार लाईट थेरेपी व 12 बार किमो थेरेपी हो चुकी है. अभिजीत बनकर ने अपनी बीमारी और उसे लेकर चल रहे इलाज की जानकारी वर्ष 2022 में ही अपने महकमे को दे दी थी. लेकिन इसकी अनदेखी करते हुए नागपुर जिला परिषद ने एक वर्ष बाद आनन-फानन में एक आदेश जारी करते हुए अभिजीत बनकर को सेवा से सीधे निष्कासित ही कर दिया. तब से लेकर अब तक अभिजीत बनकर अपने खुद के खर्च पर अपना इलाज करवा रहे है. साथ ही उनके पास अपना व अपने परिवार का उदरनिर्वाह करने हेतु आय का कोई अन्य स्त्रोत भी नहीं है. जिसके चलते बनकर परिवार आर्थिक तंगी व भूखमरी का शिकार है.
वहीं दूसरी कहानी इर्विन अस्पताल में समाज कार्य वैद्यकीय अधिकारी के तौर पर कार्यरत रहे अजय हत्तेसिंह सोलंकी की है. 21 मई 2023 को अजय सोलंकी एक सडक हादसे का शिकार हुए थे. जिन्हें इलाज के लिए इर्विन अस्पताल में भर्ती कराया गया था और तब से लेकर अब तक यानी करीब 3 वर्षो से अजय सोलंकी कोमा में है. इस दौरान अजय सोलंकी के परिवार को उनका वेतन तक नहीं दिया रहा है. क्योंकि इर्विन अस्पताल का प्रबंधन अब तक यह प्रमाणपत्र नहीं दे पाया है कि अजय सोलंकी कोमा में है. हैरत और आश्चर्य की बात है कि इर्विन अस्पताल में कार्यरत रहनेवाला व्यक्ति इर्विन अस्पताल में ही इलाज हेतु भर्ती है और तीन वर्षो से कोमा में है. लेकिन इस बात की पुष्टि खुद इर्विन अस्पताल मात्र एक प्रमाणपत्र जारी कर अब तक नहीं कर पाया है. इसके चलते सोलंकी का परिवार तीन वर्षो से जैेसे-तैसे गुजर बसर कर रहा है. इस कहानी का दुखदायी पहलू यह भी है कि अजय सोलंकी के बडे भाई की कुछ समय पहले मौत हो गई थी. जिसकी बेटी का पालन पोषण अजय सोलंकी ही कर रहे थे और अब अजय सोलंकी भी तीन वर्षो से कोमा में पडे हैं. जिसके चलते अजय सोलंकी की मां सहायता की गुहार लेकर दर-दर भटकने पर मजबूर है.
इन दोनों कहानियों से अवगत होने के साथ ही मनपा पार्षद दिनेश बुब ने इसकी जानकारी विधायक बच्चू कडू को दी थी. जिसके चलते विधायक बच्चू कडू ने गत रोज खुद न्यू आजाद मंडल पहुंचकर अभिजीत बनकर से चर्चा करने के साथ ही अजय सोलंकी के परिजनों से मुलाकात की तथा उन्हें इस मामले में हर संभव कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया.

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