तिवसा की ज्वार खरीदी में बडा भंडाफोड
राजस्व विभाग की जांच से बचे सरकार के 6.59 करोड

* 504 में से केवल 49 किसान ही पात्र पाये गये
अमरावती/दि.8 – सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत न्यूनतम आधारभूत मूल्य (एमएसपी) योजना के तहत रबी ज्वार खरीदी प्रक्रिया को लेकर तिवसा तहसील में काफी बडी विसंगति सामने आयी है. राजस्व विभाग द्बारा की गई घर पहुंच व खेत स्तर की प्रत्यक्ष पडताल में पंजीकृत किए गये 504 किसानों में से केवल 49 किसान ही प्रत्यक्ष ज्वार उत्पादक रहने की बात सामने आयी है. कडाई के साथ की गई इस पडताल के चलते राज्य सरकार का करीब 6 करोड 59 लाख 98 हजार 571 रूपए का संभावित व अनावश्यक खर्च बचने की बात अंतिम रिपोर्ट में दर्ज की गई है.
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लाभार्थियों को ज्वार की नियमित आपूर्ति हो इस हेतु राज्य सरकार प्रतिवर्ष न्यूनतम आधारभूत मूल्य पर रबी ज्वार की खरीदी करती है. तिवसा तहसील में यह प्रक्रिया सरकारी धान्य गोदाम के मार्फत चलाई जाती है. रबी ज्वार के पिछले खरीदी सीजन 2024-25 में 683 किसानों का पंजीयन किया गया था. जिसमें से 518 किसानों द्बारा 21 हजार 971 क्विंटल ज्वार की प्रति क्विंटल 3 हजार 371 रूपए की दर पर खरीदी की गई थी. परंतु रबी ज्वार के मौजूदा खरीफ सीजन 2025-26 में कुछ किसानों ने प्रशासन को निवेदन सौंपते हुए बताया कि तहसील के कुछ व्यापारियों द्बारा किसानों से कम दरों पर रबी ज्वार की खरीदी कर उसे सरकार के खरीदी केन्द्रों पर जाकर बेचा जा रहा है. जिसके चलते असल ज्वार उत्पादक किसान इस एमएसपी की योजना के लाभ से वंचित रह रहे हैं. इसी दौरान तहसील कृषि अधिकारी द्बारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में तिवसा तहसील में रबी ज्वार का बुआई क्षेत्र केवल 21 हेक्टेयर रहने की बात दर्ज की गई. जबकि पंजीयन किए गये किसानों की संख्या इससे कहीं अधिक दिखाई दे रही थी. ऐसे में इस विसंगति की गंभीर दखल लेते हुए तिवसा तहसील प्रशासन ने सभी ग्राम राजस्व अधिकारियों को प्रत्येक पंजीकृत किसानों की प्रत्यक्ष पडताल करने का आदेश जारी किया.
इस आदेश के मुताबिक ग्राम राजस्व अधिकारियों ने प्रत्येक किसान के घर पर भेंट देने, खेतों का प्रत्यक्ष मुआयना करने, ज्वार के स्टॉक की पडताल करने, अडोस पडोस के किसानों व ग्रामीणों से जानकारी हासिल करने तथा राजस्व अभिलेखों के जरिए बुआई के ब्यौरे की पडताल करने जैसे काम करते हुए स्वतंत्र रिपोर्ट प्रस्तुत की. इन सभी रिपोर्टो का संकलन व विश्लेषण करने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि 504 पंजीकृत किसानों में से केवल 49 यानी 7.72 फीसद किसान ही प्रत्यक्ष ज्वार उत्पादक है. इन पात्र किसानों से ही सरकारी धान्य गोदाम में प्रति क्विंटल 3699 रूपए की एमएसपी दर पर 2180.50 क्विंटल ज्वार खरीदी गई. जिसके लिए राज्य सरकार ने 80 लाख 65 हजार 670 रूपए खर्च किए. जबकि पिछले सीजन में ज्वार खरीदी पर 7 करोड 40 लाख 64 हजार 241 रूपये का खर्च हुुआ था. ऐसे में प्रत्यक्ष क्षेत्र पडताल की वजह से राज्य सरकार का 6 करोड 59 लाख 98 हजार 571 रूपए का संभावित अनावश्यक आर्थिक बोझ टल गया.
* पंजीकृत किसान – 504
प्रत्यक्ष पात्र किसान – 49 (7.72 फीसद)
ज्वार खरीदी – 2180.50 क्विंटल
एमएसपी दर – 3699 रूपए प्रति क्विंटल
सरकार का खर्च – 80.65 लाख रूपए
अनुमानित बचत – 6.59 करोड रूपए





