‘कोणार्क’ को लेकर मनपा की बढी मुश्किले

अब प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने मनपा के नाम जारी किया शो कॉज

* 7 दिन के भीतर जवाब देने का दिया अल्टिमेटम
* जैव चिकित्सा कचरे के निपटान को लेकर उठाई गंभीर आपत्ती
अमरावती/दि.12 – शहर की साफसफाई का ठेका कोणार्क इंन्फ्रा कंपनी को देने के बाद से लगातार विवादों एवं आलोचनाओं में घिरी हुई अमरावती महानगरपालिका की मुश्किले अब इसी मुद्दे को लेकर और भी अधिक बढती नजर आ रही है. क्योंकि जैव चिकित्सा कचरे की निपटान में होनेवाली अनियमिताओं एवं पर्यावरण संबंधी नियमों के पालन में कमी को लेकर अब महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने अमरावती महानगरपालिका के नाम कारण बताओ नोटीस जारी करते हुए 7 दिन के भीतर जवाब पेश करने का अल्टिमेटम दिया है. साथ ही निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है. जिसके चलते माना जा रहा है कि, शहर में साफसफाई का ठेका कोणार्क कंपनी के पास रहने के बावजूद शहर में कचरे व गंदगी की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है.
इस संदर्भ में मिली जानकारी के मुताबिक, प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा जारी की गई नोटीस में शहर की मौजुदा स्वच्छता व्यवस्था व घनकचरा प्रबंधन संबंधी नियमों के पालन को लेकर बेहद गंभीर आपत्तीयां दर्ज की गई है. जारी नोटीस में कहा गया है कि, कोणार्क कंपनी की लापरवाही व कोताही के चलते पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंच रहा है. साथ ही साथ अमरावती शहर में जैव चिकित्सा कचरे यानी बायोमेडिकल वेस्ट के उचित निपटान को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए है. नोटीस में कहा गया है कि, शहर में साफसफाई की व्यवस्था को बनाए रखने एवं पर्यावरणीय नियमों का पालन करने की मुख्य जिम्मेदारी स्थानीय स्वायत्त निकाय के तौर पर अमरावती महानगरपालिका की है. साथ ही साथ मनपा की ओर से नियुक्त किए गए ठेकेदार को भी इसके लिए जिम्मेदार माना जा सकता है. ऐसे में वास्तविक जिम्मेदारी को लेकर मनपा प्रशासन द्वारा जवाब पेश किया जाना चाहिए.
* पहले से मुश्किलों में घिरी हुई है मनपा
बता दे कि, सुकली कंपोस्ट डिपो मामले में करीब 47 करोड रूपये के संभावित दंड के चलते अमरावती महानगरपालिका पहले से ही काफी हद तक दबाव एवं मुश्किलों में है. वहीं अब कचरा प्रबंधन में खामियों को लेकर प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से जारी नोटीस ने मनपा की चिंताओं व मुश्किलों को और अधिक बढा दिया है. यदी मनपा द्वारा निर्धारित समय में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया जाता है, तो प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा आगे चलकर मनपा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. साथ ही जरूरत पडने पर इस मामले की रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण यानी नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के सामने भी रखी जा सकती है. जिसके चलते अमरावती मनपा को फिलहाल कचरे व साफसफाई के मामले पर मुश्किलों में कहा जा सकता है.
* कोणार्क पर पहले ही लग चुका 3.50 करोड का जुर्माना
यहां यह भी विशेष उल्लेखनिय है कि, साफसफाई के कामों में बढे पैमाने पर अनियमितताएं पाए जाने के चलते अमरावती मनपा प्रशासन ने कोणार्क कंपनी के कामकाज की जांच व समिक्षा की थी तथा काम में लापरवाही व कोताही के आरोपों को सही पाते हुए मनपा प्रशासन द्वारा कोणार्क कंपनी पर 3.50 करोड रूपये का जुर्माना लगाया गया था. जिसकी वसुली के लिए कंपनी के बिलों का भुगतान रोक दिया गया था और स्पष्ट किया गया था कि, जुर्माने की राशी को भुगतान के समय समायोजित किया जाएगा. लेकिन इसके बावजूद कोणार्क कंपनी के कामों में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ. जिसका ताजा उदाहरण महाराष्ट्र राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से मनपा के नाम जारी नोटीस को कहा जा सकता है.
* मनपा प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं
इस पूरे मामले को लेकर जानकारी एवं प्रतिक्रिया हेतु मनपा के स्वच्छता अधिकारी डॉ. अजय जाधव एवं विधि अधिकारी श्रीकांतसिंह चौहान से संपर्क करने का प्रयास करने पर दूसरी ओर से कोई प्रतिसाद नहीं मिला. जिसके चलते यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि, इस शो कॉज नोटीस को लेकर मनपा द्वारा कौनसी भूमिका तय की जा रही है तथा शो कॉज नोटीस का जवाब देने हेतु क्या रणनीति अपनाई जा रही है.

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