भगवान श्री रामदेवबाबा के सभी 24 पर्चो का संगीतमय बखान
जम्मा गायक श्रीनिवास आसोपा की सुमधूर वाणी में सुमधूर भजनों की प्रस्तुति ने किया मंत्रमुग्ध

अमरावती/दि.24– भगवान रामदेवबाबा के सभी 24 पर्चो का संगीतमय बखान करते हुए जम्मा गायक श्रीनिवास आसोपा व उनकी टीम ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया. प्रयाल परिवार द्बारा पहली बार जम्मा जागरण का आयोजन किया गया था. जिसमें जम्मा गायक श्रीनिवास आसोपा की सुमधूर वाणी में श्रोताओं को भजन सुनने का अवसर मिला. इस अवसर पर ‘म्हाने घोडलियो मंगवा म्हारी मां, म्हाने घोडलियो मंगवा, घोडे चढने घुमण जासा, घोडलियो मंगवा म्हारी मां…’ जैसे भजन गाते हुए इस कथा का सार बताने का प्रयास किया गया.
स्थानीय राजापेठ स्थित रामदेवबाबा मंदिर में रविवार 23 अगस्त की शाम 4.30 बजे प्रयाल परिवार की ओर से जम्मा जागरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. जिसमें सर्व प्रथम रामदेवबाबा की विधी विधान से आरती की गई और पश्चात अखंड ज्योत प्रज्वलित कर बाबा के 24 पर्चे प्रारंभ किए गए. इस संगीतमय प्रस्तुति के माध्यम से रामदेवबाबा के 24 पर्चे यानी प्रमाण या फरमान कहे जाते है.उसका बखान करते हुए उन्होंने कहा कि, राजस्थान के प्रसिध्द लोकदेवता बाबा रामदेव पीर ने अपने जीवन काल में दलितों, गरिबों और समाज के कल्याण के लिए कई दिव्य चमत्कार (पर्चे) दिखाए और समाधी लेने से पहले अपने भक्तों को 24 आध्यात्मिक उपदेश दिए.
लोक मान्यताओं और भजनों के अनुसार, बाबा ने अपने जीवन में माता मैनादे को पर्चो दिया जिसमें बाल्यकाल में चूल्हे पर उफनते हुए दुध के बर्तन को हाथ के इशारे से नीचे उतारकर अपनी माता को पहला चमत्कार दिखाया. वहीं एक दर्जी ने बाबा के कपडे के घोडे के लिए चोरी किए थे. जिसके बाद वह घोडा आकाश में उडने लगा. दर्जी ने माफी मांगने पर वह सामान्य हुआ. इसी तरह पोखरण क्षेत्र में आंतक मचानेवाले क्रुर भैरव राक्षस का संहार करके वहां के लोगों को भयमुक्त किया. समुद्र में डूबते हुए व्यापारी बोहितराज के जहाज को अपनी शक्ति से डूबने से बचाया. मिश्री को नमक में और नमक को वापस मिश्री में बदलकर घमंडी व्यापारी का अहंकार तोडा.
उसी प्रकार मक्का से आए पांच पीरों को उनके अपने ही बर्तनों में पलक झपकते ही भोजन कराया. इसके बाद उन्होंने बाबा को ‘रामशाह पीर’ की उपाधी दी. अपनी पत्नी नेतलदे को पूरी तरह स्वस्थ और चलने-फिरने योग्य बनाया. अपनी बहन सुगनाबाई के मृत पुत्र को पुन:जीवित किया.बाबा रामदेव ने जो 24 फरमान जारी किए थे उनके अनुसार हमें हमेशा जीवन के कल्याण के लिए पूर्ण और सच्चे गुरू की शरण में जाना चाहिए. समाज के भूखे, अनाथ और बेसहारा लोगों की सेवा करना ही ईश्वर की असली पूजा है. धार्मिक आडंबरों, झुठे कर्मकांडों और अंधविश्वास से दूर रहे. जाती-पाती, छुआ-छूत और उच-नीच के भेदभाव का पूरी तरह त्याग करे.
हमेशा सत्य के मार्ग पर चले और जीविका उपार्जन में इमानदारी बरते. महिलाओं और बहनों का सदैव आदर व सम्मान करे, किसी भी बेजुबान जीव की हत्या न करे और प्रकृति की रक्षा करे यह सीख देने की कोशिश की गई. कार्यक्रम की समाप्ती रात 11 बजे महाप्रसादी के वितरण से की गई. इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने जितेंद्र प्रयाल, मनीष प्रयाल, रोहन प्रयाल ने अथक प्रयास किए. इस समय जयेश जोशी, हिमांशु बावेशी, राजेंद्र प्रयाल, हरिश प्रयाल, सुभाष प्रयाल, अक्षद प्रयाल, सुशील प्रयाल, कुंज प्रयाल, राशी प्रयाल,एकांशी प्रयाल, प्रथ प्रयाल, आरूष, प्रथम, पिंहु के साथ बडी संख्या में भाविक भक्त उपस्थित थे.





