बोंडे व पोटे की सख्ती का दिखा असर, एक दिन में बदली तस्वीर
नाले की सफाई के लिए मैदान में उतरा मनपा व कोणार्क अमला

* मालवीय चौक पर जलजमाव के असली कारण आए सामने
* गत रोज डफरीन अस्पताल की बैठक में उठा था मुद्दा
* अगले ही दिन जेसीबी-पोकलेन के साथ शुरू हुई कार्रवाई
* इर्विन से मर्च्यूरी तक अतिक्रमण हटाए गए, चोक नाला खोला गया
* अब वालकट कंपाउंड क्षेत्र पर प्रशासन की नजर
अमरावती/दि.27 – डफरीन जिला महिला अस्पताल में हुए अग्निकांड के बाद अस्पताल परिसर और आसपास की मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा के दौरान उठे एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर आखिरकार प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी पड़ी. सांसद डॉ. अनिल बोंडे और विधायक प्रवीण पोटे पाटिल द्वारा मनपा प्रशासन को कड़ी फटकार लगाए जाने के महज कुछ घंटों के भीतर ही मनपा प्रशासन और कोणार्क कंपनी का अमला भारी मशीनरी के साथ मैदान में उतर आया. गुरुवार सुबह से इर्विन अस्पताल के पीछे से गुजरने वाले नाले की सफाई, गहरीकरण और अवरोध हटाने का अभियान शुरू कर दिया गया. इस कार्रवाई ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति हो तो वर्षों से लंबित समस्याओं का समाधान कुछ ही घंटों में शुरू किया जा सकता है.
बता दे कि, बुधवार को भाजपा नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल डफरीन अस्पताल पहुंचा था. यहां सांसद डॉ. अनिल बोंडे, विधायक प्रवीण पोटे पाटिल, राज्यसभा सांसदों और भाजपा पदाधिकारियों ने प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. विनोद पवार से अस्पताल की स्थिति, अग्निकांड के कारणों तथा भविष्य में सुरक्षा उपायों को लेकर चर्चा की. इसी दौरान सीएस डॉ. पवार ने नेताओं को बताया कि रेलवे स्टेशन परिसर में चल रहे निर्माण कार्य और नाले की सफाई नहीं होने के कारण इर्विन अस्पताल के पीछे से निकलने वाली जलनिकासी व्यवस्था प्रभावित हो गई है. परिणामस्वरूप मालवीय चौक, वालकट कंपाउंड, इर्विन अस्पताल और डफरीन अस्पताल परिसर में थोड़ी सी बारिश होने पर भी पानी भर जाता है. डॉ. पवार ने यह भी बताया कि इस संबंध में मनपा को कई बार लिखित रूप से अवगत कराया गया था, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई. यह जानकारी मिलते ही सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने तत्काल नगर निगम आयुक्त डॉ. मंगेश गोंदावले को फोन लगाया. फोन स्पीकर मोड पर था और बैठक में मौजूद सभी लोगों ने बातचीत सुनी. इस समय जब आयुक्त की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिला तो विधायक प्रवीण पोटे का धैर्य टूट गया. उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सवाल किया कि जब अस्पताल प्रशासन ने लिखित पत्र दिया था तो उस पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई. उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि प्रशासन जनता की समस्याओं के समाधान के लिए है, न कि फाइलें दबाकर बैठने के लिए. विधायक पोटे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रेलवे स्टेशन परिसर में चल रहे निजी निर्माण की चिंता छोड़कर पहले नागरिकों की सुविधा और अस्पतालों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. उन्होंने आयुक्त को निर्देशात्मक अंदाज में कहा कि मनपा में उपलब्ध पोकलेन मशीनें लेकर अगले दिन मौके पर पहुंचें और नाले की खुदाई व सफाई शुरू करें. साथ ही यह भी कहा कि वे स्वयं तथा सांसद डॉ. बोंडे मौके पर मौजूद रहेंगे और देखेंगे कि कार्य में बाधा कौन उत्पन्न करता है.
बैठक में हुई इस तीखी चर्चा का असर अगले ही दिन दिखाई दिया. आज सुबह नगर निगम और कोणार्क कंपनी के कर्मचारी जेसीबी, पोकलेन और अन्य मशीनों के साथ इर्विन अस्पताल के पीछे पहुंच गए. सबसे पहले नाले के किनारे बने अस्थायी और स्थायी अतिक्रमणों को हटाया गया. इर्विन अस्पताल से जिला शवागार तक सड़क किनारे मौजूद कई संरचनाओं को तोड़कर रास्ता साफ किया गया, ताकि मशीनें आसानी से नाले तक पहुंच सकें. इसके बाद नाले में वर्षों से जमा गाद, कचरा और मलबा निकालने का कार्य शुरू किया गया. कर्मचारियों ने कई स्थानों पर नाले को गहरा और चौड़ा करने का काम भी किया. निरीक्षण के दौरान सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि जिस रेलवे स्टेशन परिसर में चल रहे निर्माण कार्य को अब तक जलजमाव का मुख्य कारण माना जा रहा था, वहां की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर पाई गई. अधिकारियों ने पाया कि रेलवे स्टेशन क्षेत्र से गुजरने वाला नाला काफी गहरा, चौड़ा और साफ-सुथरा है. वहां जल प्रवाह में कोई बड़ी बाधा नहीं है. इससे यह स्पष्ट हो गया कि समस्या का मुख्य कारण रेलवे परिसर नहीं बल्कि उसके आगे का क्षेत्र है, जहां नाले का प्राकृतिक स्वरूप कई स्थानों पर बाधित हो चुका है.
* मालवीय चौक में मिला जलभराव का असली कारण
जैसे-जैसे सफाई अभियान आगे बढ़ा, वैसे-वैसे जलजमाव की वास्तविक वजहें सामने आने लगीं. अधिकारियों ने पाया कि रेलवे स्टेशन परिसर से बाहर निकलने के बाद मालवीय चौक क्षेत्र में नाला पूरी तरह अवरुद्ध अवस्था में था. कई स्थानों पर गाद और कचरे के कारण पानी का प्रवाह लगभग रुक चुका था. इसके अलावा मालवीय चौक से वालकट कंपाउंड तक सीमेंट की सड़क के नीचे पाइपलाइन के माध्यम से नाले को आगे बढ़ाया गया है. इसी मार्ग से बिजली विभाग और दूरसंचार विभाग की केबलें भी डाली गई हैं, जिससे पानी की निकासी प्रभावित हो रही है.
* नाले पर बनी दीवार भी बनी बड़ी समस्या
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि वालकट कंपाउंड क्षेत्र स्थित डॉ. मुरके अस्पताल के पीछे नाले के हिस्से पर पक्की दीवार का निर्माण किया गया है. तकनीकी अधिकारियों का मानना है कि इस निर्माण के कारण नाले का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हुआ है. परिणामस्वरूप बारिश का पानी तेजी से आगे नहीं बढ़ पाता और मालवीय चौक सहित आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन जाती है.
* अब दूसरे चरण की तैयारी
मनपा और तकनीकी अधिकारियों ने प्राथमिक रिपोर्ट तैयार करना शुरू कर दिया है. सूत्रों के अनुसार अब दूसरे चरण में वालकट कंपाउंड क्षेत्र से गुजरने वाले नाले की व्यापक सफाई, चौड़ीकरण और अतिक्रमणों की जांच की जाएगी. यदि नाले की जमीन पर बने निर्माण अवैध पाए जाते हैं तो उन्हें हटाने की कार्रवाई भी की जा सकती है. इसके लिए कानूनी और तकनीकी पहलुओं का अध्ययन शुरू कर दिया गया है.
* स्थानीय नागरिकों ने जताया संतोष
कार्रवाई शुरू होने के बाद क्षेत्र के नागरिकों और व्यापारियों ने राहत व्यक्त की है. उनका कहना है कि वर्षों से वे इस समस्या को लेकर आवाज उठा रहे थे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही थी. नागरिकों ने उम्मीद जताई कि यह अभियान केवल एक-दो दिन की औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि नाले की पूरी श्रृंखला का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर स्थायी समाधान निकाला जाए ताकि हर वर्ष बरसात में होने वाली परेशानी से लोगों को छुटकारा मिल सके.
* राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद तेज हुई प्रशासनिक मशीनरी
पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब अस्पताल प्रशासन पहले ही लिखित रूप से समस्या की जानकारी दे चुका था, तब मनपा ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की. वहीं दूसरी ओर सांसद डॉ. अनिल बोंडे और विधायक प्रवीण पोटे की सख्त नाराजगी के बाद जिस तेजी से प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय हुई, उसने यह भी साबित कर दिया कि समस्या के समाधान के लिए केवल इच्छाशक्ति और जवाबदेही की आवश्यकता होती है. फिलहाल नाले की सफाई का कार्य जारी है और शहरवासियों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि प्रशासन इस अभियान को स्थायी समाधान तक पहुंचाने में कितना सफल होता है.





