दृष्टिहीन कलाकारों ने रानफूलों और कबाड वस्तुओं से बनाई पर्यावरणपूरक राखियां
कागज, धागों से दिया सुंदर रुप

* सर्वत्र आकर्षण और डिमांड
वाशीम/दि.27 – रक्षाबंधन के अवसर पर बाजार में जहां तरह-तरह की राखियां उपलब्ध हैं, वहीं वाशीम के केकत उमरा स्थित चेतन सेवांकूर आश्रम के दृष्टिहीन कलाकारों ने अपनी रचनात्मकता से बनाई पर्यावरणपूरक राखियां लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हैं. इन राखियों को रानफूलों की पंखुड़ियों, दालों, कागज, धागों और अन्य टाकाऊ वस्तुओं का उपयोग कर तैयार किया गया है.
* रानफूलों की पंखुड़ियों से आकर्षक राखियां
श्रावण में खिलने वाले रानझेंडू, तेरडा, कास, चाफा और शेवंती जैसे फूलों की पंखुड़ियों का उपयोग राखियां बनाने में किया गया है. इसके अलावा कागज, धागे और विभिन्न अनुपयोगी वस्तुओं से आकर्षक और कलात्मक राखियां तैयार की गई हैं. प्राकृतिक सामग्री के इस्तेमाल से ये राखियां पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ ही देखने में भी बेहद सुंदर हैं.
* आत्मनिर्भरता की दिशा में अनूठी पहल
केकत उमरा स्थित चेतन सेवांकूर आश्रम में करीब एक दर्जन बच्चे रहते हैं. यहां के दृष्टिहीन कलाकार विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गीत प्रस्तुत कर अपनी आजीविका चलाते हैं. हालांकि, बारिश के मौसम में संगीत कार्यक्रम कम होने के कारण उनकी आमदनी प्रभावित होती है. इसी को ध्यान में रखते हुए स्थानीय महिला बचत समूह के सहयोग से इस वर्ष पर्यावरणपूरक राखियां बनाने की पहल शुरू की गई.
* राखियों की बिक्री के लिए विशेष स्टॉल
कलाकारों ने अपनी प्रतिभा और कल्पनाशक्ति का इस्तेमाल करते हुए अलग-अलग डिजाइन की सुंदर राखियां तैयार की हैं. इन राखियों की बिक्री के लिए चेतन सेवांकूर आश्रम परिसर में विशेष स्टॉल लगाया गया है. स्थानीय महिलाओं और नागरिकों की ओर से राखियों को अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है और लोग उत्साह से इनकी खरीदारी कर रहे हैं.
* पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक स्वावलंबन
इस पहल के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के साथ ही दृष्टिहीन कलाकारों को अपनी कला के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है. दिव्यांग व्यक्तियों में भी कला, कौशल और आत्मविश्वास के बल पर स्वावलंबी बनने की क्षमता है, यह पहल इसका प्रेरणादायी उदाहरण बन रही है. इस उपक्रम में चेतन सेवांकूर के कार्यवाहक पांडुरंग उचितकर, चेतन उचितकर, धीरज चोरपगार, कोमल खांडेकर, अश्विनी पवार सहित अन्य कलाकारों ने भाग लिया. स्थानीय बचत समूह की माधुरी नेतन्सकर सहित अन्य महिलाओं ने भी कलाकारों का सहयोग करते हुए राखियों की खरीदारी की.





