‘खाना खाकर आंदोलन करो’ मंत्री नरहरी झिरवल की अजीब सलाह
पत्रकारों ने घेरा तो ‘सॉरी’ कहकर निकले

पुणे/दि.27 – विभिन्न मांगों को लेकर पिछले 14 दिनों से अनशन कर रहे आदिवासी विद्यार्थियों से मिलने पहुंचे राज्य के मंत्री और राष्ट्रवादी अजीत पवार गट के नेता नरहरी झिरवल ने उन्हें ‘खाना खाकर आंदोलन करो’ की सलाह दी. मंत्री के इस बयान के बाद विवाद खड़ा हो गया है. विपक्षी नेताओं ने भी झिरवल की जमकर आलोचना की है.
पुणे के मांजरी क्षेत्र में आदिवासी विद्यार्थियों का विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन जारी है. आंदोलन की जानकारी लेने के लिए आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके और नरहरी झिरवल आंदोलन स्थल पर पहुंचे थे. इस दौरान विद्यार्थियों से बातचीत करते हुए झिरवल ने कहा कि आंदोलन करना है तो खाना खाकर और पानी पीकर आंदोलन करें.
* अपने स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न करें
नरहरी झिरवल ने विद्यार्थियों से कहा कि उन्होंने भी कई आंदोलन किए हैं. आंदोलन के दौरान वे छिपकर खाना खाते थे. उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे बहुत कड़ा आंदोलन कर रहे हैं और अपने स्वास्थ्य के साथ बेवजह खिलवाड़ न करें. मंत्री की इस सलाह से आंदोलन स्थल पर मौजूद विद्यार्थियों और अन्य लोगों में आश्चर्य जताया गया. मंत्री के बयान के बाद पत्रकारों ने उन्हें घेर लिया और सवाल पूछे. पत्रकारों ने पूछा कि विद्यार्थी पिछले 14 दिनों से अनशन कर रहे हैं, तो अब तक उनसे मिलने क्यों नहीं आए? साथ ही खाना खाकर आंदोलन करने की सलाह को लेकर भी सवाल किया गया. सवालों के बीच नरहरी झिरवल ने सॉरी कहा और वहां से निकल गए.
* आंदोलनकारियों के नारों पर भी बोले
आंदोलन स्थल पर अपने खिलाफ नारे लगाए जाने पर झिरवल ने कहा कि ये अपने ही लोग हैं और हक से अपनी बात रख रहे हैं. उनकी नाराजगी को समझकर समस्या का समाधान करने का प्रयास किया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि रात में चर्चा के बाद कुछ मुद्दों पर निर्णय तक पहुंचने का प्रयास किया गया है.
* विरोधियों ने साधा निशाना
झिरवल के बयान पर कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शायद झिरवल का संदेश यही था कि खाओ-पीओ और आंदोलन करो, इसलिए उन्होंने ऐसा बयान दिया होगा. ठाकरे गुट के नेता विनायक राऊत ने भी झिरवल के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि उनका यह बयान उनके स्वभाव के अनुरूप है. ठाकरे गुट के नेता अंबादास दानवे ने आरोप लगाया कि झिरवल के बयान से आंदोलन कर रहे आदिवासी विद्यार्थियों का अपमान हुआ है. उन्होंने कहा कि मंत्रियों के ऐसे बयानों से सरकार की किरकिरी हो रही है और ऐसे बयानों पर सरकार को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए. मंत्री नरहरी झिरवल के खाना खाकर आंदोलन करो वाले बयान के बाद आदिवासी विद्यार्थियों का आंदोलन एक बार फिर चर्चा में आ गया है. मामले को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं.





