बस की पास गुमी, तो एफआयआर दर्ज कराने थाने पहुंचा छात्र
मासूम की हिम्मत देख पुलिस भी रह गई हैरान

वर्धा/हिंगणघाट /दि.28- आमतौर पर छोटे बच्चे पुलिस थाने का नाम सुनकर घबरा जाते हैं, लेकिन वर्धा जिले के हिंगणघाट में एक नौवीं कक्षा के छात्र ने अपनी समझदारी और साहस से सभी का दिल जीत लिया. बस पास गुम होने पर घबराने या घर बैठने के बजाय वह अपने मित्र के साथ सीधे पुलिस थाने पहुंच गया और पुलिसकर्मियों से कहा कि, मेरा बस पास खो गया है, मेरी एफआईआर लिख लीजिए. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग छात्र की जागरूकता व आत्मविश्वास की सराहना कर रहे हैं.
जानकारी के अनुसार हिंगणघाट तहसील के परडा गांव स्थित डॉ. बी. आर. आंबेडकर विद्यालय में नौवीं कक्षा में अध्ययनरत समर्थ अनिल महाकालकर का एसटी बस सेवा का छात्र पास कहीं गुम हो गया था. उसे बताया गया कि नया पास प्राप्त करने के लिए पहले पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करानी होगी. यह सुनकर समर्थ कुछ समय के लिए चिंतित जरूर हुआ, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी. उसने अपने एक सहपाठी को साथ लिया और दोनों सीधे हिंगणघाट पुलिस स्टेशन पहुंच गए.
* दो बच्चों को थाने में देखकर पुलिस भी चौंकी
पुलिस थाने में जब ड्यूटी पर मौजूद पुलिस कर्मचारी राकेश आष्टणकर की नजर इन दोनों बच्चों पर पड़ी तो उन्हें आश्चर्य हुआ. उन्होंने बच्चों को अपने पास बुलाकर पूछा कि वे किस काम से आए हैं. तब समर्थ और उसके मित्र ने पूरी घटना बताई. मित्र ने पुलिसकर्मियों को बताया कि समर्थ का बस पास खो गया है और नया पास बनवाने के लिए पुलिस रिपोर्ट आवश्यक है. बच्चों की बात सुनकर पुलिसकर्मी भी उनकी जिम्मेदारी और जागरूकता से प्रभावित हुए. पुलिस कर्मचारी राकेश आष्टणकर ने दोनों बच्चों को शांत किया और उन्हें पूरी प्रक्रिया सरल भाषा में समझाई. उन्होंने समर्थ को भरोसा दिलाया कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है तथा आवश्यक शिकायत दर्ज कर उसके लिए बस पास गुम होने का प्रमाणपत्र उपलब्ध कराया. इसके साथ ही नया पास बनवाने की प्रक्रिया भी विस्तार से समझाई गई. शिकायत की औपचारिकता पूरी होते ही दोनों बच्चों के चेहरे पर संतोष और खुशी दिखाई दी.
* 1988 के नियम के अनुसार जरूरी है पुलिस शिकायत
हिंगणघाट बस स्थानक प्रमुख संजय शेडमाके ने बताया कि एसटी महामंडल के वर्ष 1988 के परिपत्र के अनुसार यदि किसी छात्र अथवा एसटी कर्मचारी का पास खो जाता है तो उसके लिए पुलिस शिकायत दर्ज कराना आवश्यक होता है. इसी नियम के तहत समर्थ को भी पुलिस स्टेशन जाने की सलाह दी गई थी.
* पुलिस अधिकारियों ने की सराहना
उपविभागीय पुलिस अधिकारी सुशील कुमार नायक ने छात्र की प्रशंसा करते हुए कहा कि बच्चों ने समस्या छिपाने के बजाय स्वयं पुलिस के पास आकर मदद मांगी, यह सराहनीय है. उन्होंने कहा कि नागरिकों को भी किसी समस्या या घटना की शिकायत करने में संकोच नहीं करना चाहिए. समय पर शिकायत मिलने से समस्या का त्वरित समाधान संभव हो पाता है.
* सोशल मीडिया पर हो रही तारीफ
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद लोग समर्थ की समझदारी और साहस की जमकर प्रशंसा कर रहे हैं. कई लोगों ने कहा कि इतनी कम उम्र में कानून और प्रक्रिया के प्रति जागरूकता का यह उदाहरण अन्य बच्चों के लिए भी प्रेरणादायी है. एक तरफ जहां अक्सर पुलिस और आम नागरिकों के बीच दूरी की बात की जाती है, वहीं हिंगणघाट की यह घटना बताती है कि सही मार्गदर्शन मिलने पर बच्चे भी अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों को समझते हुए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकते हैं. यह घटना पुलिस की संवेदनशील कार्यशैली और एक जागरूक विद्यार्थी की साहसिक पहल का सकारात्मक उदाहरण बन गई है.





