वीर तालाब में पड़ी दरारें, पानी का रिसाव शुरू
तालाब फूटा तो चिखलदरा में घुस सकता है पानी

* नगरपालिका प्रशासन की लापरवाही पर भाजपा गुटनेता राजेश मांगलेकर का सवाल
अमरावती/दि.8– चिखलदरा के ऐतिहासिक वीर तालाब की दीवार में दरारें पड़ने और वहां से लगातार पानी का रिसाव होने की शिकायत सामने आई है. तालाब की स्थिति को लेकर स्थानीय नागरिकों में चिंता बढ़ गई है. यदि तालाब की दीवार को नुकसान पहुंचा और वह टूट गई तो निचले इलाकों में बड़े पैमाने पर पानी घुसने की आशंका है. इससे जान-माल के नुकसान का खतरा भी पैदा हो सकता है.
भाजपा गुटनेता एवं नगरसेवक राजेश मांगलेकर ने आरोप लगाया कि ब्रिटिशकालीन इस ऐतिहासिक तालाब की देखभाल और मरम्मत की ओर नगरपालिका प्रशासन का ध्यान नहीं है. उन्होंने प्रशासन से तालाब की तत्काल तकनीकी जांच कराकर आवश्यक मरम्मत कराने की मांग की है. चिखलदरा विदर्भ का प्रमुख पर्यटन स्थल होने के साथ ही वीर तालाब यहां की जलापूर्ति व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखता है. इतिहासकारों के अनुसार, ब्रिटिश काल में स्थानीय प्राकृतिक जलस्रोतों का अध्ययन कर जलसंचय के उद्देश्य से इस तालाब का निर्माण किया गया था. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक करीब 125 वर्ष पहले चूना-मिट्टी, पत्थर और पारंपरिक निर्माण तकनीक का इस्तेमाल कर इसका निर्माण किया गया था. लंबे समय के बाद भी तालाब की मूल संरचना काफी हद तक कायम है. इसी वजह से इसे ब्रिटिशकालीन इंजीनियरिंग कौशल का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है. बताया जाता है कि तालाब के निर्माण से संबंधित इंजीनियरिंग कार्य में स्पीलटन नामक इंजीनियर तथा मो. हुसैन खान सुपरवाइजर के रूप में जुड़े थे.
* दरारों से पानी का रिसाव चिंता का विषय
वर्तमान में तालाब की दीवार में जगह-जगह दरारें दिखाई देने तथा उनमें से पानी रिसने की शिकायत है. लगातार पानी का रिसाव और निर्माण संरचना में हो रही टूट-फूट भविष्य में तालाब की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है. बारिश के मौसम में जलस्तर बढ़ने पर स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है. राजेश मांगलेकर ने कहा कि कुछ दिन पहले उन्होंने स्वयं तालाब का निरीक्षण किया था. उस दौरान दीवार में दरारों से पानी का रिसाव होता दिखाई दिया. इसके बावजूद नगरपालिका प्रशासन की ओर से अब तक आवश्यक मरम्मत नहीं की गई है. उन्होंने मांग की कि प्रशासन केवल औपचारिक निरीक्षण तक सीमित न रहे, बल्कि विशेषज्ञों की समिति गठित कर तालाब की संपूर्ण तकनीकी जांच कराए और तत्काल सुरक्षा उपाय शुरू करे.
* ऐतिहासिक धरोहर को बचाने की जरूरत
इतिहास अभ्यासक राहुल पंडित के अनुसार, वीर तालाब चिखलदरा के इतिहास और जलव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है. ब्रिटिशकालीन स्थापत्य एवं इंजीनियरिंग कौशल के इस नमूने का संरक्षण जरूरी है. तालाब की मूल संरचना को नुकसान पहुंचाए बिना वैज्ञानिक तरीके से मरम्मत, बांध की मजबूती की जांच और पानी के रिसाव को तत्काल रोकना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक जलस्रोत आज भी मरम्मत की प्रतीक्षा में है. प्रशासन को मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कदम उठाने चाहिए. राजेश मांगलेकर, भाजपा गुटनेता एवं नगरसेवक ने कहा- वीर तालाब के टूटने की नौबत आने से पहले ही प्रशासन को विशेषज्ञों की समिति गठित कर इसकी गहन तकनीकी जांच करनी चाहिए. पानी के रिसाव का कारण पता लगाकर तत्काल प्रतिबंधात्मक उपाय किए जाएं. नगरपालिका प्रशासन अब भी लापरवाही न बरते और तालाब की तुरंत मरम्मत कराए.





