जरांगे के अनशन का 11वां दिन, सरकार से आर-पार के संकेत

तबीयत बिगड़ी, शुगर-बीपी गिरा, सात किलो वजन कम

* सीएम फडणवीस व मंत्री विखे पाटील पर तीखा हमला
* बोले – एक साल मराठों को गुमराह किया, राजनीतिक कीमत चुकानी होगी
जालना/मुंबई/दि.8- मराठा आरक्षण और हैदराबाद गजट के आधार पर कुणबी रिकॉर्ड को मान्यता देने की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटील का अंतरवाली सराटी में चल रहा आमरण अनशन मंगलवार को 11वें दिन में पहुंच गया. लंबे उपवास के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई है. उनका करीब सात किलो वजन कम हुआ है और शुगर तथा रक्तचाप गिरने की जानकारी सामने आई है. सोमवार मध्यरात्रि करीब ढाई बजे स्वास्थ्य जांच के बाद मंत्री उदय सामंत और विधायक प्रसाद लाड ने उनसे फोन पर बातचीत की. सरकार की ओर से मांगों पर कार्रवाई शुरू करने का आश्वासन मिलने के बाद जरांगे ने सलाइन लेने की अनुमति दी, लेकिन मांगें पूरी होने तक अनशन जारी रखने की घोषणा की. इसी बीच मराठा आरक्षण मंत्रिमंडलीय उपसमिति के अध्यक्ष राधाकृष्ण विखे पाटील ने कहा कि सरकार अब जरांगे के पास शिष्टमंडल नहीं भेजेगी. इस पर जरांगे ने विखे पाटील और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तीखा हमला बोला.
जरांगे ने आरोप लगाया कि विखे पाटील ने एक वर्ष तक आश्वासन और मीठी बातों के जरिए मराठा समाज को गुमराह किया और अब जिम्मेदारी से पीछे हट रहे हैं. उन्होंने कहा कि उपसमिति और मंत्रिमंडल में पद पर रहते हुए विखे पाटील को मराठा समाज की मांगों पर काम करना ही होगा. जरांगे ने सातारा संस्थान के गजट पर एक महीने में निर्णय लेने के आश्वासन का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष बीतने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई. हैदराबाद गजट के आधार पर कुणबी प्रमाणपत्र देने के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार से जवाब मांगा. उन्होंने दावा किया कि 58 लाख मराठा-कुणबी रिकॉर्ड उपलब्ध होने की बात कही जा रही है, लेकिन पात्र लोगों को उसका वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा. जरांगे ने फडणवीस से भी सवाल किया कि हैदराबाद गजट के आधार पर दो महीने में आरक्षण देने की बात कही गई थी, उसका क्या हुआ.
जरांगे ने यह आरोप भी लगाया कि, आंदोलन को कमजोर करने के लिए सत्ताधारी नेताओं की बैठकों में रणनीति बनाई जा रही है और मुंबई मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के जरिए आंदोलन को बदनाम करने की साजिश हो सकती है. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. उन्होंने आंदोलनकारियों से पुलिस के साथ टकराव से बचते हुए शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ने की अपील की, लेकिन किसी आंदोलनकारी के साथ गंभीर ज्यादती होने पर महाराष्ट्र बंद की चेतावनी भी दी.
जरांगे ने कहा कि 12 सितंबर को अंतरवाली सराटी में राज्यभर के मराठा समाज की बैठक होगी. इसी बैठक में आंदोलन की आगे की दिशा तय होगी और मुंबई कूच की तारीख घोषित की जा सकती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का शिष्टमंडल आए या नहीं, आंदोलन पर इसका असर नहीं पड़ेगा.
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* विखे पाटील का दावा : सरकार ने जरूरी फैसले लिए
वहीं दूसरी ओर विखे पाटील ने पत्रकार परिषद में कहा कि मराठा समाज के हित में सरकार आवश्यक निर्णय ले चुकी है और उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया जारी है. उनका कहना है कि अब जरांगे को भी सरकार के कदमों का सकारात्मक मूल्यांकन करना चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का शिष्टमंडल अब दोबारा उनके पास नहीं जाएगा. विखे पाटील के अनुसार 58 लाख रिकॉर्ड ग्राम पंचायतों में उपलब्ध कराए गए हैं और 10 से 17 सितंबर तक शिविरों के जरिए पात्र लोगों से आवेदन लिए जा रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि प्रमाणपत्रों से संबंधित करीब 200 से 300 आवेदन ही प्राप्त हुए हैं. कानून के दायरे में पात्र लोगों के लिए आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी. उन्होंने यह भी दावा किया कि मराठवाड़ा में करीब 3.5 लाख मराठा नागरिकों ने एसीबीसी प्रमाणपत्र लिए हैं. उनके मुताबिक इससे सरकार के फैसलों के अमल की स्थिति स्पष्ट होती है.
विखे पाटील ने मुख्यमंत्री फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का बचाव करते हुए कहा कि मौजूदा सरकार ने मराठा समाज के लिए पिछले 25-30 वर्षों की तुलना में महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं. उन्होंने फडणवीस सरकार के कार्यकाल में दिए गए आरक्षण और बाद में न्यायालयीन प्रक्रिया में उसके निरस्त होने का भी उल्लेख किया.
* संविधान और अदालत की चौखट में जो संभव है, वह करेंगे
– सीएम फडणवीस ने मराठा समाज को किया आश्वस्त
उरण में वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के लोकार्पण के दौरान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मराठा समाज को अब तक जो महत्वपूर्ण निर्णय मिले हैं, वे उनकी सरकार ने लिए हैं और आगे भी आवश्यक फैसले सरकार ही करेगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि संविधान में जो प्रावधान होगा, वह निश्चित रूप से लागू किया जाएगा और न्यायालय के अधीन विषयों पर अदालत की प्रक्रिया का पालन होगा. साथ ही उन्होंने कहा कि किसी एक समाज को न्याय देने के लिए दूसरे समाज के अधिकारों को प्रभावित नहीं किया जाएगा. सीएम फडणवीस ने कहा कि, सरकार ने चर्चा के दरवाजे बंद नहीं किए हैं. यदि मराठा समाज को सरकार के फैसलों में कोई कमी या शंका दिखाई देती है तो वह सामने रखी जाए, सरकार उसे स्पष्ट करने के लिए तैयार है.
* 12 सितंबर पर टिकी नजर
मराठा आरक्षण को लेकर अब सरकार और जरांगे के बीच मुख्य विवाद निर्णयों की घोषणा बनाम उनके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर दिखाई दे रहा है. सरकार अपने फैसलों और शुरू की गई प्रक्रियाओं को पर्याप्त बता रही है, जबकि जरांगे ठोस परिणाम की मांग पर अड़े हैं. मनोज जरांगे की बिगड़ती तबीयत, शिष्टमंडल न भेजने का सरकार का फैसला और 12 सितंबर की प्रस्तावित बैठक इन तीनों घटनाक्रमों के बीच महाराष्ट्र में आंदोलन के अगले चरण को लेकर राजनीतिक और सामाजिक तनाव बढ़ गया है.

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