स्त्रीभ्रूण हत्या और अवैध गर्भपात रोकने के लिए राज्यस्तरीय टास्क फोर्स गठित
तीन माह में देनी होगी रिपोर्ट, डॉ. नीलम गोर्हे को सौंपी गई कमान

* राज्य भर में सोनोग्राफी और गर्भपात केंद्रों पर होगी कड़ी निगरानी
मुंबई/दि.9- महाराष्ट्र में स्त्रीभ्रूण हत्या, अवैध गर्भपात और जन्म के समय घटते लिंगानुपात पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने डॉ. नीलम गोर्हे की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय विशेष कृती दल (टास्क फोर्स) के गठन का शासन निर्णय जारी किया है. इस दल का उद्देश्य पीसीपीएनडीटी और मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करना तथा राज्य में कन्या जन्म दर में सुधार लाना है.
सरकारी निर्णय के अनुसार हाल के वर्षों में गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम तथा चिकित्सा गर्भपात अधिनियम के उल्लंघन के कई मामले सामने आए हैं. इसे देखते हुए सोनोग्राफी केंद्रों, निदान केंद्रों और गर्भपात केंद्रों पर प्रभावी नियंत्रण तथा विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए यह राज्यस्तरीय कृती दल गठित किया गया है.
* कई महिला जनप्रतिनिधियों को किया गया शामिल
डॉ. नीलम गोर्हे की अध्यक्षता वाले इस कृती दल में विधान परिषद सदस्य डॉ. प्रज्ञा सातव, भावना गवली, चित्रा वाघ, उमा खापरे और डॉ. मनीषा कायंदे को सदस्य बनाया गया है. वहीं विधानसभा सदस्य स्नेहा दुबे पंडित और श्वेता महाले भी दल का हिस्सा होंगी. राज्य परिवार कल्याण कार्यालय, पुणे के अतिरिक्त संचालक को सदस्य सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
* जिलों और महानगरों में होंगे औचक निरीक्षण
कृती दल राज्य के विभिन्न जिलों और महानगरपालिका क्षेत्रों का दौरा कर पीसीपीएनडीटी और एमटीपी कानूनों के पालन की समीक्षा करेगा. टीम संबंधित अधिकारियों के साथ सोनोग्राफी केंद्रों और मेडिकल गर्भपात केंद्रों का औचक निरीक्षण भी करेगी. यदि किसी केंद्र पर कानून के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो कृती दल संबंधित प्राधिकरण को तत्काल कानूनी कार्रवाई के निर्देश दे सकेगा. इससे अवैध लिंग परीक्षण और गैरकानूनी गर्भपात पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.
* शासन को देगा सुधार संबंधी सुझाव
टास्क फोर्स कानूनों के क्रियान्वयन में आ रही खामियों की पहचान कर सरकार को सुधारात्मक सुझाव भी देगी. इसके अलावा जिला स्तर पर समन्वय बैठकों का आयोजन, अधिकारियों के बीच तालमेल बढ़ाना तथा कन्या भ्रूण संरक्षण और बालिका जन्म के महत्व को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाने की रणनीति तैयार करना भी इसकी जिम्मेदारी होगी.
* तीन वर्ष का होगा कार्यकाल
सरकार ने जिलाधिकारियों, महानगरपालिका आयुक्तों और संबंधित प्राधिकरणों को कृती दल को आवश्यक प्रशासनिक, तकनीकी और दस्तावेजी सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं. यह दल प्रत्येक तीन महीने में अपनी निरीक्षण रिपोर्ट और सिफारिशें सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग को सौंपेगा. सरकार द्वारा गठित इस विशेष कृती दल का कार्यकाल तीन वर्ष निर्धारित किया गया है. राज्य सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से स्त्रीभ्रूण हत्या और अवैध गर्भपात पर प्रभावी अंकुश लगेगा तथा जन्म के समय लिंगानुपात में सुधार होगा.





