5 अधिकारियों पर कार्रवाई और दो कंपनी को ब्लैकलिस्ट के निर्देश
डफरीन अग्निकांड ः तीन नवजातों की मौत के बाद जांच समिती ने सौंपी अपनी रिपोर्ट

* सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों को भी दोषी पाया गया, उन पर भी कार्रवाई के निर्देश
* जान जोखिम में डालकर बच्चों को बचाने वाले कर्मचारियों का होगा सम्मान
* वेंटिलेटर के रखरखाव से लेकर फायर सिस्टिम तक पायी गई खामियां
* तीन महीने में होगा विद्युत और फायर सेफ्टी ऑडिट
* अब राज्यभर के अस्पतालों का सुरक्षा ऑडिट मुंबई/अमरावती/दि.9- अमरावती जिला स्त्री रुग्णालय के नवजात शिशु विशेष देखभाल कक्ष में 24 अगस्त 2026 को लगी आग में तीन नवजातों की मौत के मामले में उच्चस्तरीय जांच पूरी हो गई है. जांच समिति की रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने रिपोर्ट में सामने आई गंभीर खामियों के आधार पर जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं. दुर्घटना के दौरान एनआयसीयू में मौजूद 36 अन्य नवजातों को तत्काल दूसरे अस्पतालों में सुरक्षित स्थानांतरित किया गया था. जांच में अस्पताल की अग्निसुरक्षा व्यवस्था, चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव, विद्युत एवं तकनीकी व्यवस्था तथा अधिकारियों के पर्यवेक्षण में गंभीर कमियां सामने आने की बात कही गई है.
उच्चस्तरीय जांच समिति के अनुसार अस्पताल में इस्तेमाल हो रहे वेंटिलेटर की आवश्यक समय-समय पर देखभाल और मरम्मत नहीं की गई थी. इसके अलावा फायर अलार्म और स्प्रिंकलर प्रणाली कार्यरत नहीं थी, जबकि फायर पंप हाउस भी लॉक पाया गया. जांच में उपकरणों के रखरखाव और तकनीकी जांच में भी गंभीर त्रुटियां सामने आई हैं. इन खामियों को दुर्घटना के संदर्भ में महत्वपूर्ण मानते हुए संबंधित स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई है.
कामकाज में लापरवाही, गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार, पर्यवेक्षण में खामियां और गंभीर उपेक्षा के लिए संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारियों के खिलाफ महाराष्ट्र नागरी सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1979 के नियम 8 के तहत विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं. संविदा कर्मचारियों के खिलाफ भी प्रशासनिक कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं. पर्यवेक्षण में प्रथमदृष्टया जिम्मेदार पाए गए अधिकारियों में स्वास्थ्य सेवा, अकोला परिमंडल के उपसंचालक, अमरावती स्त्री रुग्णालय के चिकित्सा अधीक्षक, अमरावती के अतिरिक्त जिला शल्यचिकित्सक, अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारी तथा विद्युत मिस्त्री शामिल हैं. इनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा सार्वजनिक निर्माण विभाग के उन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, जिनकी भूमिका दुर्घटना से संबंधित व्यवस्थाओं में सामने आई है.
जांच समिति की रिपोर्ट में मेसर्स एओवी इंटरनेशनल एलएलपी को दोषी पाए जाने के बाद कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. वहीं शिलार कंपनी की सेवाओं में भी प्रथमदृष्टया खामियां पाए जाने की बात सामने आई है. सरकार ने संबंधित फॉरेंसिक रिपोर्ट तत्काल प्राप्त करने तथा रिपोर्ट के आधार पर कंपनी को भी ब्लैकलिस्ट करने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.
सरकार ने दुर्घटना के दौरान आग के खतरे में फंसे नवजातों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने और अपना कर्तव्य निभाने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के योगदान को भी सराहा है. ऐसे कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बच्चों को सुरक्षित स्थानांतरित किया था. सरकार ने उनके कार्य का गौरव एवं सम्मान करने के निर्देश दिए हैं. तीन नवजातों की मौत के बाद हुई उच्चस्तरीय जांच में सामने आई खामियों पर अब कार्रवाई शुरू होने से इस मामले में जिम्मेदारी तय होने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है. साथ ही राज्यभर के अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा को भी सरकार ने प्राथमिकता दी है.
अमरावती की घटना के बाद सरकार ने राज्य के सरकारी अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक कदम उठाने का निर्णय लिया है. सभी एनआयसीयू और एसएनसीयू में सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा सभी अस्पतालों में नियमित फायर सेफ्टी मॉक ड्रिल अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए हैं. अग्निसुरक्षा, विद्युत सुरक्षा और चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव के लिए निर्धारित मानक कार्यप्रणाली को सख्ती से लागू करने को कहा गया है.
स्वास्थ्य सेवा आयुक्त संजय काटकर को सार्वजनिक निर्माण, विद्युत, अग्निशमन, बायोमेडिकल इंजीनियरिंग तथा रखरखाव-दुरुस्ती से जुड़े विभागों के साथ नियमित बैठकें लेकर अस्पतालों की सुरक्षा की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं. राज्य के सभी जिलाधिकारियों, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और महानगरपालिका आयुक्तों को अपने-अपने क्षेत्र के सभी अस्पतालों का विद्युत एवं अग्निसुरक्षा ऑडिट तीन महीने के भीतर पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं. सरकारी एवं निजी अस्पतालों में फायर ऑडिट के क्रियान्वयन, उसकी निगरानी और अनुपालन रिपोर्ट सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी जिला शल्यचिकित्सकों के माध्यम से तय करने के निर्देश भी स्वास्थ्य सेवा आयुक्त को दिए गए हैं.





