13 माह की बच्ची की आंखों में एम्स ने जगाया नया उजाला

जन्म के बाद चली गई थी आंखों की रोशनी

* आरओपी के पांचवें चरण में पहुंच चुकी थी बीमारी
नागपुर/दि.21 – जन्म के बाद दोनों आंखों की रोशनी खो चुकी 13 माह की एक बच्ची के लिए एम्स नागपुर के डॉक्टरों ने उम्मीद की नई किरण जगाई है. बच्ची की एक आंख पर जटिल और दुर्लभ शल्यक्रिया सफलतापूर्वक की गई. सर्जरी के बाद अब उसे प्रकाश का एहसास होने लगा है और चेहरे के पास रखी वस्तुओं की भी पहचान होने लगी है.
समयपूर्व जन्म के कारण बच्ची को रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमैच्योरिटी (आरओपी) नामक गंभीर नेत्र रोग हो गया था. समय पर उपचार नहीं मिलने के कारण उसकी स्थिति बीमारी के पांचवें चरण तक पहुंच गई थी. इस अवस्था में आंख के पर्दे यानी रेटिना पर गंभीर असर पड़ता है और दृष्टि जाने का खतरा काफी बढ़ जाता है.
* जटिल स्थिति में की गई सर्जरी
एम्स नागपुर के नेत्र विशेषज्ञों ने बच्ची की स्थिति का परीक्षण करने के बाद प्रभावित आंखे की जटिल शल्यक्रिया करने का निर्णय लिया. सर्जरी के बाद बच्ची में प्रकाश का अहसास होने के साथ ही चेहरे के पास वाले वस्तुओं का भी अहसास होने लगा. चिकित्सकों के अनुसार, इतनी कम उम्र में आरओपी के पांचवें चरण तक पहुंच चुके मामले में उपचार चुनौतीपूर्ण होता है. ऐसे में सर्जरी के बाद बच्ची में दृष्टि संबंधी प्रतिक्रिया दिखाई देना महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
* दूसरी आंख की सर्जरी की तैयारी
बच्ची की दूसरी आंख भी आरओपी से प्रभावित है. अब उसके माता-पिता दूसरी आंख पर भी जल्द शल्यक्रिया कराने की तैयारी कर रहे हैं. डॉक्टरों की निगरानी में आगे का उपचार और दृष्टि की स्थिति का आकलन किया जाएगा. बच्ची के उपचार ने न केवल उसके परिवार में उम्मीद जगाई है, बल्कि समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों में आंखों की नियमित जांच और आरओपी की समय पर पहचान के महत्व को भी सामने रखा है. शुरुआती अवस्था में बीमारी की पहचान होने पर उपचार के बेहतर विकल्प उपलब्ध हो सकते हैं.

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