‘शशिसूर्य गजारूढा शनिभौमे तुरंगमे…’

माता का यह आगमन जनकल्याण और खुशहाली की आशा जगाता

अमरावती /दि.10- शारदीय नवरात्रि कल अश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा रविवार 11 अक्तूबर से प्रारंभ हो रहा है. ऐसे में अमरावती के वेदमूर्ति लक्ष्मण पंचारिया ने ग्रह संयोग और पूजन मुहूर्त आदि को लेकर अमरावती मंडल से विशेष जानकारी प्रस्तुत की है. आपने ‘शशिसूर्य गजारूढा शनिभौमे तुरंगमे, गुरौ शुक्रे च दोलायां बुधे नौका प्रकीर्तिता’ श्लोक का उल्लेख कर कहा कि, जिस वार को नवरात्र प्रारंभ होते हैं, उस वार के अनुसार भगवती के वाहन का उल्लेख होता है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि, माता का यह आगमन जनकल्याण और खुशहाली की आशा जगाता है.
पं. लखन पंचारिया ने ‘सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वित:, मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:’ श्लोक का उल्लेख कर पुन: आशा व्यक्त की कि, मां दुर्गा की कृपा से मनुष्य सभी बाधाओं और कष्टों से मुक्त होगा. धन, अनाज और संतान सुख प्राप्त करेगा, इसमें कोई संशय नहीं. आपने भगवती की आराधना करने से शत्रु बाधा अथवा कोई भी बाधा हो, तो सभी का निवारण भगवती की साधना से संभव बतलाया. यह भी कहा कि, मनोवांछित फल प्राप्त होता है. इसलिए इस नवरात्रि में अधिकाधिक भगवती की आराधना करें.
पं. पंचारिया ने कल रविवार 11 अक्तूबर के घटस्थापना मुहूर्त भी बतलाए. प्रात: 8 बजकर 5 मिनट से 9 बजकर 31 मिनट तक, 9.31 से 11.42 तक और 11.42 से 12.29 तक एवं सायं. 5.48 से 6.34 तक घटस्थापना करना श्रेष्ठ बतलाए. लखन पंचारिया ने बताया कि, भगवती को नौ स्वरुप में प्रणाम करने का श्लोक है – प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं बह्मचारिणी, तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम, पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनी तथा सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्, नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिता:, उक्तान्येतानि नामानि बह्मणैव महात्मना.

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