शासकीय विभागीय ग्रंथालय में अभिजात मराठी भाषा सप्ताह उत्साह से मनाया
प्रत्येक को स्वयं की भाषा की प्रगति करनी चाहिए- संजय घरडे

अमरावती/दि.10 – दैनिक जीवन में समाचार पत्र व पुस्तक वाचन, सही करते समय, श्रवण व संवाद साधने ऐसे विविध माध्यम से प्रत्येक को अपनी भाषा की प्रगति करनी चाहिए. उसका अधिक से अधिक उपयोग प्रसार के साथ ही संवर्धन कर अभिजात मराठी भाषा को आगे करने में अपना योगदान दे, ऐसा प्रतिपादन साहित्यिक संजय घरडे ने किया. वे सहायक ग्रंथालय संचालक कार्यालय, शासकीय विभागीय ग्रंथालय और जिला ग्रंथालय अधिकारी कार्यालय की ओर से अभिजात मराठी भाषा सप्ताह निमित्त से आयोजित विशेष मार्गदर्शन कार्यक्रम में वे बोल रहे थे.
साहित्यक संजय घरडे ने कहा कि भाषा यह विचार व्यक्त करने का सशक्त माध्यम है. व्यंजन व स्वर की सार्थक रहनेवाला अन्य भारतीय भाषा के साथ मराठी भाषा का विविध चरण में हुआ विकास व उसमें स्त्रियों की महत्वपूर्ण भूमिका उन्होंने समझाकर बताई. सांकेतिक भाषा, चित्र लिपि ऐसे मानवी समाज के विकास के साथ भाषा की प्रगति और देश की विविध राजनीति भाषा को मिला राजाश्रय जिसका विस्तारपूर्वक उन्होंने वर्णन किया. मराठी भाषा को अभिजात भाषा का दर्जा मिलने के बाद प्रत्येक मराठी भाषी पर आयी जिम्मेदारी समझाकर बताने में कोई भी भाषा का उपयोग न कर स्वयं की भाषा को आगे बढाए यानी मराठी भाषा को आगे करने में अपना योगदान दे, ऐसा भी उन्होंने बताया.
जिला ग्रंथालय अधिकारी संजय बनसोड ने अभिजात मराठी भाषा सप्ताह का महत्व व 3 से 9 अक्तूबर को राज्यभर में चलाया तथा इस उपक्रम संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी. सहायक ग्रंथालय संचालक डॉ. राजेश पाटील ने उपस्थितों को मार्गदर्शन किया व आभार माना. विभागीय ग्रंथालय के निरीक्षक गजानन कुरवाले ने कार्यक्रम का सूत्रसंचालन किया. इस समय ग्रंथालय के सभासद और स्पर्धा परीक्षा का अभ्यास करनेवाले विद्यार्थी उपस्थित थे.





