711 घटों की स्थापना से मालखेड़ में भक्तिमय माहौल
अंबा माता नवरात्रोत्सव का उत्साह के साथ शुभारंभ

1997 से अखंड ज्योति स्थापना की परंपरा जारी
चांदूर रेलवे /दि. 12- चांदूर रेलवे तहसील में भानामती नदी के तट पर बसे मालखेड़ गांव के ग्रामदैवत अंबा माता एवं शिव मंदिर में नवरात्रोत्सव का उत्साह के साथ शुभारंभ हुआ. अखंड ज्योति सप्ताह के अवसर पर इस वर्ष मंदिर में विधि-विधान के साथ 711 घटों की स्थापना की गई. सुबह और शाम होने वाली महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं. भजन, कीर्तन, देवी स्तोत्रों का पाठ और महाप्रसाद सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों से मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया है.
बता दें कि इस मंदिर में वर्ष 1997 से अखंड ज्योति स्थापना की परंपरा निरंतर जारी है. इस वर्ष भी परंपरा के अनुसार 711 घट स्थापित किए गए हैं. पूजा-विधि का नियोजन पंडित संजयपंत जोशी महाराज करते हैं. नवरात्रोत्सव के दौरान प्रतिदिन सुबह-शाम महाआरती के साथ धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.
* केतुमाल की आराधना से जुड़ी है मंदिर की मान्यता
स्थानीय आख्यायिका के अनुसार, विदर्भ के राजा वृषभदेव के पुत्र केतुमाल के नाम पर इस क्षेत्र को पहले ‘मालकेतु’ कहा जाता था. कालांतर में इसका नाम बदलकर ‘मालखेड़’ हो गया. मान्यता है कि केतुमाल ने भानामती नदी के तट पर अंबा माता की आराधना की थी. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवी यहां स्वयंभू स्वरूप में विराजमान हुईं. इसी श्रद्धा के चलते यह स्थान लंबे समय से भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों के साथ ही अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. सातारा जिले के महाबलेश्वर सहित अनेक स्थानों के परिवारों की अंबा माता कुलदेवता हैं. विशेष रूप से महाबलेश्वर के भिल्लारे परिवार की कई पीढ़ियों से यहां दर्शन के लिए आने की परंपरा कायम है.
* नदी किनारे प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा श्रद्धास्थल
दक्षिणवाहिनी भानामती नदी, हरियाली से घिरा परिसर तथा अंबा माता और शिवशंकर मंदिर इस स्थान को धार्मिक और प्राकृतिक दृष्टि से विशेष महत्त्व प्रदान करते हैं. मुंबई-नागपुर रेलमार्ग मंदिर के पास से गुजरता है. इस मार्ग से यात्रा करने वाले यात्रियों को मंदिर का परकोटा, गुंबद और कलश दिखाई देते हैं. बताया जाता है कि देवी भागवत सहित अन्य पुराणग्रंथों में मालखेड़ की भानामती नदी और अंबा माता का उल्लेख मिलता है. ‘क्षत्रियों का इतिहास’ पुस्तक में भी मालखेड़वासिनी अंबा माता का संदर्भ होने की बात कही जाती है. सातारा जिला अंतर्गत महाबलेश्वर निवासी माविक प्रदीप भिल्लारे के अनुसार, उनके परिवार के पूर्वज हर वर्ष महाबलेश्वर से यहां दर्शन के लिए आते थे. परिवार ने आज भी इस परंपरा को कायम रखा है. उन्होंने बताया कि अंबा माता के प्रति उनके परिवार की गहरी आस्था है और पीढ़ियों से इस धार्मिक परंपरा का पालन किया जा रहा है.
* तीन दशक से अधिक समय से मंदिर की सेवा
मंदिर के महंत शिवानंद पुरी महाराज पिछले 32 वर्षों से मंदिर की सेवा में कार्यरत हैं. ग्रामवासियों के अनुसार, उनके कार्यकाल में मंदिर का जीर्णोद्धार और विकास हुआ है. मंदिर के विश्वस्त अशोक देशमुख श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास कर रहे हैं. नवरात्रोत्सव के अवसर पर मंदिर में दर्शन और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बढ़ रही है.





