‘बताइए, हम जिएं या मरें?’

एक हजार करोड़ रुपये का भुगतान अटकने से ठेकेदारों में आक्रोश

200 से अधिक ठेकेदारों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर जताया विरोध
अमरावती/दि.14 – लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अंतर्गत विकास कार्य पूरे करने के बावजूद भुगतान नहीं मिलने से जिले के ठेकेदार गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं. करीब 900 से 1,000 करोड़ रुपये का भुगतान बकाया होने का दावा करते हुए अमरावती जिला ठेकेदार संघ ने सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. सोमवार को 200 से अधिक ठेकेदारों ने एकजुट होकर निवासी उपजिलाधिकारी संतोष काकड़े को मांगों का ज्ञापन सौंपा.
ठेकेदारों का कहना है कि करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य पूरे करने के बाद भी उन्हें समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है. इसके चलते मजदूरों का वेतन, निर्माण सामग्री की लागत, बैंक की किस्तें और अन्य खर्चों का भुगतान करना मुश्किल हो गया है. संघ ने बकाया राशि का तत्काल भुगतान करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि समस्या का समाधान नहीं होने पर तीव्र आंदोलन किया जाएगा.

* 1,039 करोड़ रुपये के बिल बकाया
ठेकेदार संघ के मुताबिक 1 अप्रैल 2026 तक जिले में लगभग 1,039 करोड़ रुपये के बिल बकाया थे. इसके बाद बकाया राशि में से केवल पांच प्रतिशत का भुगतान किया गया, जबकि शेष 95 प्रतिशत राशि अब भी अटकी हुई है. लंबे समय से भुगतान नहीं मिलने के कारण ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है. संघ के महासचिव प्रमोद काकड़े ने कहा कि काम पूरा करने के बाद भी भुगतान नहीं मिलना बेहद गंभीर स्थिति है. उन्होंने बताया कि बकाया राशि के कारण जिले के ठेकेदारों में भारी नाराजगी है और उनकी आर्थिक परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं.

* ठेकेदार सुनील वागद्रे को भावपूर्ण श्रद्धांजलि
भुगतान में देरी के बीच ठेकेदार सुनील वागद्रे की मृत्यु का मामला भी सामने आया है. आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव को उनकी मौत से जोड़ते हुए ठेकेदार संघ ने गहरा दुख व्यक्त किया. सोमवार को लोक निर्माण विभाग परिसर में शोकसभा आयोजित कर दिवंगत सुनील वागद्रे को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई. इस दौरान जिले के करीब 200 ठेकेदार उपस्थित रहे. श्रद्धांजलि सभा में बकाया भुगतान के कारण ठेकेदारों के सामने उत्पन्न आर्थिक संकट और उनके परिवारों की परेशानियों का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया.

* भुगतान नहीं मिला तो आंदोलन की चेतावनी
ठेकेदार संघ ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि लंबित बिलों का भुगतान तत्काल किया जाए, ताकि ठेकेदार अपने कर्मचारियों, मजदूरों, सामग्री आपूर्तिकर्ताओं और बैंकों का बकाया चुका सकें. संघ का कहना है कि भुगतान में लगातार हो रही देरी से निर्माण कार्यों से जुड़े लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है. ठेकेदारों ने सवाल उठाया है कि जब काम पूरा करने के बाद भी उनका हक का पैसा नहीं मिलता, तो वे अपने परिवारों और कारोबार को कैसे संभालें? उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा.

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