तुलजाभवानी माता के खजाने में 253 किलो सोना, 4,523 किलो चांदी
छत्रपति शिवाजी महाराज की मुहरों के निशान वाली स्वर्णमुद्राओं की माला भी शामिल

* सूचना के अधिकार से सामने आया मंदिर में जमा खजाने का ब्यौरा
धाराशिव /दि.13 – महाराष्ट्र की कुलस्वामिनी श्री तुलजाभवानी माता के खजाने में राजे-महाराजाओं, विभिन्न रियासतों और लाखों श्रद्धालुओं की ओर से अर्पित किए गए बहुमूल्य आभूषणों का अनमोल संग्रह है. सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंदिर के स्ट्रॉन्ग रूम में लगभग 253 किलोग्राम सोने और 4,523 किलोग्राम चांदी के आभूषण सुरक्षित हैं. इस खजाने में माणिक, पन्ना, मोती, हीरे और अन्य बहुमूल्य रत्नों से जड़े आभूषणों के साथ छत्रपति शिवाजी महाराज की मुहरों के निशान का उल्लेख रखने वाली स्वर्णमुद्राओं की माला भी शामिल है.
शारदीय नवरात्रोत्सव सहित वर्षभर के विभिन्न त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान इन आभूषणों से माता का श्रृंगार किया जाता है. ऐसे अवसरों पर श्रद्धालुओं को देवी के अलंकारों के दर्शन करने का अवसर मिलता है. मंदिर संस्थान की ओर से पंचों की उपस्थिति में इन आभूषणों की देखभाल की जाती है. मंदिर की प्रबंधक माया माने ने बताया कि किसी आभूषण का धागा निकल जाने या उसके काला पड़ने पर स्थानीय सराफ को बुलाकर उसकी मरम्मत कराई जाती है. इसके अलावा, स्ट्रॉन्ग रूम में रखे आभूषणों की समय-समय पर सफाई भी की जाती है.
* मुकुट से लेकर हीरों के हार तक अनेक बहुमूल्य अलंकार
माता के खजाने में सोने की पादुकाएं, सोने का मुकुट, पांच लड़ियों वाला कंठहार, सात लड़ियों वाला सतलड़ा हार, पन्ना-माणिक जड़े पदक, हिरकणी पदक, छत्र, चिंताक और शिरपेच जैसे अनेक अलंकार शामिल हैं. मुकुट पर सोने, मोती, पन्ने और माणिक का जड़ाऊ काम है. शिरपेच और कलगी में भी बहुमूल्य रत्न जड़े हुए हैं. इसके अलावा, कानों के आभूषण, बड़ी मोती वाली नथ, मंगलसूत्र, तन्मणि, सूर्यहार, जड़ाऊ खड़ाऊं, हीरों का हार, सफेद रत्नों से जड़ा सोने का हार और दशावतार की आकृतियों वाली वेणी भी खजाने का हिस्सा हैं. देवी के नेत्रों के आभूषणों में माणिक जड़े होने का उल्लेख भी सामने आया है. विवरण के अनुसार, नेत्र-जोड़ में दो बड़े और 41 छोटे माणिक हैं. इसके अलावा मोतियों का तुरा, जड़ाऊ पट्टी, विभिन्न पदक और चंपाकली की माला जैसे आभूषण भी संग्रह में शामिल हैं.
* 71 प्रकार के ऐतिहासिक सिक्के भी संग्रह में
मंदिर के खजाने में देवी को अर्पित किए गए कुल 71 प्रकार के ऐतिहासिक सिक्कों का भी उल्लेख है. इनमें बीकानेर, चित्रकूट, उदयपुर, इंदौर, फर्रुखाबाद, लखनऊ, बड़ौदा और हैदराबाद सहित विभिन्न रियासतों से संबंधित सिक्के शामिल बताए गए हैं. पुर्तगाली सिक्कों के साथ शाह आलम, अकबर और शाहजहां के नाम से जुड़े सिक्कों का भी विवरण दिया गया है. यह सिक्का संग्रह विभिन्न कालखंडों और रियासतों से जुड़े इतिहास की झलक प्रस्तुत करता है. हालांकि, उपलब्ध विवरण में कुछ सिक्कों के नाम और वर्गीकरण स्पष्ट नहीं हैं.
* सन् 1963, 2011, 2018 और 2023 में हुई गिनती
सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंदिर के आभूषणों की गिनती वर्ष 1963, 2011, 2018 और 2023 में की गई थी. पुजारी मंडल के पूर्व अध्यक्ष किशोर गंगणे ने ‘दिव्य मराठी’ से बातचीत में यह जानकारी दी. तुलजाभवानी माता के खजाने में सुरक्षित सोने-चांदी के आभूषण, रत्नजड़ित अलंकार और ऐतिहासिक सिक्के धार्मिक आस्था के साथ-साथ ऐतिहासिक विरासत की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं. सूचना के अधिकार से सामने आया यह विवरण मंदिर के बहुमूल्य संग्रह की व्यापकता को रेखांकित करता है.





