हाईकोर्ट ने पुलिस से पूछा कि वे नायलॉन मांजा सप्लायरों को पकड़ने में विफल क्यों रहे
कोर्ट ने जब्ती, चार्जशीट और विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई का ब्योरा मांगा

नागपुर /दि.13 – बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने सवाल उठाया है कि पुलिस प्रतिबंधित नायलॉन मांजा के विक्रेताओं से जब वे पकड़े जाते हैं तो उनके सप्लायरों के बारे में क्यों नहीं पूछती. कोर्ट जानना चाहती है कि घातक पतंग की डोर कहां से आती है, इसकी आपूर्ति कौन करता है और बार-बार कार्रवाई के बावजूद यह बाजार में कैसे पहुंच रही है.
जस्टिस अनिल किलोर और रजनीश व्यास की डिवीजन बेंच ने नायलॉन मांजा की बिक्री और उपयोग पर स्वतः संज्ञान जनहित याचिका (पीआयएल) की सुनवाई करते हुए यह मुद्दा उठाया. कोर्ट ने दर्ज मामलों की संख्या, दाखिल चार्जशीट, जब्त किए गए नायलॉन मांजा की मात्रा और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा. इसने प्रशासन से मामले की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने को भी कहा.
जजों ने जोर दिया कि पुलिस को जब्त किए गए नायलॉन मांजा के स्रोत का पता लगाना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वे इसके स्रोत की पहचान करने में विफल रहे तो पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. कोर्ट ने मौखिक रूप से यह भी टिप्पणी की कि अधिकारी मानव जीवन के मूल्य को लेकर गंभीर नहीं दिख रहे हैं. सुनवाई के दौरान, बेंच ने सरकारी वकील के इस तर्क को खारिज कर दिया कि समाज के गरीब वर्ग के लोग पतंग उड़ाने के लिए नायलॉन मांजा का उपयोग करते हैं. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुद्दा प्रतिबंधित डोर से उत्पन्न खतरा और इसकी आपूर्ति के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है. कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि क्या मांजा का निर्माण स्थानीय स्तर पर किया जा रहा है और यह राज्य में प्रवेश करना कैसे जारी रखे हुए है. इसने अधिकारियों से विक्रेताओं की पहचान करने और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट करने को कहा.
बेंच ने रेलवे को इस मामले में प्रतिवादी बनाया है. इसने कहा कि नायलॉन मांजा को रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंडों पर ही रोक कर जब्त किया जाना चाहिए ताकि इसके अवैध परिवहन को रोका जा सके. अधिकारियों को इसकी आवाजाही और आपूर्ति की जांच करने को कहा गया है. कोर्ट ने राज्य सरकार को अगली सुनवाई से पहले हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. हलफनामे में की गई कार्रवाई और प्रतिबंधित डोर के स्रोत का पता लगाने में हुई प्रगति का विवरण होना चाहिए. एड. रवि सान्याल एमपीसीबी के लिए, शिरीष उके राज्य सरकार के लिए, जेमिनी कसाट मनपा नागपुर के लिए और कार्तिक शुकुल केंद्र सरकार के लिए पेश हुए.





