देश के सूचना आयोगों में 3.85 लाख से अधिक अपीलें लंबित
जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच 37,701 मामले बिना निर्णय के लौटाए गए

महाराष्ट्र में 14,140 अपीलें वापस
नई दिल्ली /दि.14- देशभर के 28 सूचना आयोगों में लगभग 3 लाख 85 हजार अपीलें और शिकायतें लंबित हैं. वहीं, जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच नौ सूचना आयोगों ने 37,701 मामले बिना कोई निर्णय दिए संबंधित सूचना अधिकारियों के पास वापस भेज दिए. इनमें केंद्रीय सूचना आयोग के 14,603 और महाराष्ट्र राज्य सूचना आयोग के 14,140 मामले शामिल हैं. यह जानकारी ‘सतर्क नागरिक संगठन’ की एक रिपोर्ट में सामने आई है.
सूचना का अधिकार अधिनियम 12 अक्टूबर को अपने 21 वर्ष पूरे कर चुका है. इस बीच सूचना आयोगों में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या और अपीलों को वापस लौटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय और विभिन्न राज्य सूचना आयोगों द्वारा बड़ी संख्या में अपीलें लौटाए जाने से आवेदकों के लिए सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया कठिन हो रही है.
* केंद्रीय सूचना आयोग ने 14,603 मामले लौटाए
‘सतर्क नागरिक संगठन’ ने देशभर के सूचना आयोगों से जानकारी जुटाकर यह रिपोर्ट तैयार की है. इसके मुताबिक जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच केंद्रीय सूचना आयोग को 31,179 आवेदन प्राप्त हुए. इनमें से 14,603 आवेदन वापस लौटा दिए गए. रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा लौटाए गए लगभग 95 प्रतिशत मामलों को दोबारा पंजीकृत नहीं किया गया. बिहार में 4,417 और गुजरात में 3,276 मामले वापस लौटाए जाने की जानकारी सामने आई है. महाराष्ट्र में भी 14,140 मामलों को बिना निर्णय के वापस भेजा गया. इससे सूचना का अधिकार कानून के तहत अपील करने वाले नागरिकों के सामने आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों पर चर्चा तेज हो गई है.
* मामलों के निपटारे में लग रहे कई साल
रिपोर्ट के मुताबिक देश के 14 सूचना आयोगों में लंबित अपीलों के निपटारे में एक साल या उससे अधिक समय लग सकता है. कुछ राज्यों में प्रतीक्षा अवधि बेहद लंबी है. त्रिपुरा में अपील के निपटारे के लिए अनुमानित प्रतीक्षा अवधि 19 वर्ष 8 महीने, मध्य प्रदेश में 19 वर्ष 2 महीने और छत्तीसगढ़ में 18 वर्ष बताई गई है. लंबे समय तक मामले लंबित रहने से नागरिकों को मांगी गई जानकारी मिलने में देरी होती है. इससे सूचना का अधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भी चिंताएं बढ़ रही हैं.
* छोटे कारणों से आवेदन लौटाने पर सवाल
‘सतर्क नागरिक संगठन’ की संस्थापक अंजलि भारद्वाज ने आवेदन लौटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. उनके अनुसार, निर्धारित प्रारूप में आवेदन नहीं होने या पृष्ठ संख्या का उल्लेख नहीं होने जैसी छोटी-मोटी तकनीकी वजहों से भी मामले वापस लौटा दिए जाते हैं. उन्होंने कहा कि सूचना आयोगों को नागरिकों को जानकारी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में अनावश्यक प्रशासनिक बाधाएं नहीं खड़ी करनी चाहिए. उनका मानना है कि ऐसी प्रक्रियाओं से सूचना प्राप्त करने के अधिकार का इस्तेमाल करने वाले लोगों को परेशानी होती है.
* केंद्रीय सूचना आयोग में भी बढ़ा लंबित मामलों का बोझ
केंद्रीय सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त सहित कुल 11 आयुक्त कार्यरत होने के बावजूद लंबित मामलों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई. रिपोर्ट में दी गई जानकारी के मुताबिक 1 जनवरी से 12 अक्टूबर के बीच आयोग में लंबित मामलों की संख्या 9,378 बढ़ गई. आरटीआई कार्यकर्ता और सेवानिवृत्त कमोडोर लोकेश बत्रा ने मामलों के बढ़ते बोझ और देरी पर चिंता जताते हुए व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता बताई. उन्होंने आलोचना की कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाली संस्था की मौजूदा कार्यप्रणाली नागरिकों के लिए सूचना हासिल करना कठिन बना रही है. सूचना आयोगों में लंबित मामलों का बढ़ता बोझ, अपीलों को लौटाने की प्रक्रिया और निपटारे में लगने वाला लंबा समय आरटीआई कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के सामने बड़ी चुनौतियों के रूप में उभर रहे हैं.





