महाउमेद के 3 हजार कर्मचारियों की राज्यव्यापी हड़ताल शुरू
जिला परिषद कार्यालय के सामने धरना

* नौकरी की सुरक्षा, बकाया मानदेय और कथित मानसिक प्रताड़ना के खिलाफ कर्मचारियों का आंदोलन
अमरावती/दि.17 – महाराष्ट्र राज्य ग्रामीण जीवनोन्नति अभियान (महाउमेद) के अंतर्गत कार्यरत अनुबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन शुरू कर दिया है. शुक्रवार, 16 अक्टूबर से पूरे महाराष्ट्र में अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल शुरू की गई. राज्य के करीब 3 हजार अनुबंधित कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल हुए हैं. अमरावती जिले के कर्मचारियों ने जिला परिषद कार्यालय के सामने धरना देकर अपनी मांगों की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया.
आंदोलनकारी कर्मचारियों ने अभियान की परियोजना संचालक प्रीति देशमुख पर पद का कथित दुरुपयोग करने और अनुबंधित कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं. कर्मचारियों का कहना है कि परफॉर्मेंस अप्रेजल के माध्यम से दबाव बनाए जाने, 11 महीने के अनुबंध के कारण नौकरी की असुरक्षा, अनुबंध नवीनीकरण में देरी और बकाया मानदेय जैसी समस्याओं से कर्मचारियों में भारी नाराजगी है. कर्मचारियों ने मानसिक प्रताड़ना के कारण आत्महत्या जैसी घटनाएं सामने आने का आरोप लगाते हुए मामले की गंभीरता से जांच करने की मांग की है. संगठन ने पद के कथित दुरुपयोग और कर्मचारियों को मानसिक रूप से परेशान किए जाने के आरोपों की निष्पक्ष प्रशासनिक जांच कराने तथा संबंधित अधिकारियों का तत्काल तबादला करने की मांग उठाई है.
* 11 महीने की अनुबंध व्यवस्था पर सवाल
कर्मचारियों के अनुसार, 11 महीने के अनुबंध पर काम करने के कारण उन्हें लगातार नौकरी जाने का डर बना रहता है. अनुबंध का समय पर नवीनीकरण नहीं होने और मानदेय लंबित रहने से उनकी आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो रही है. आंदोलनकारियों ने बताया कि महाउमेद अभियान में 11 महीने की अनुबंध व्यवस्था बंद कर बिहार और झारखंड राज्यों की तर्ज पर नई व्यवस्था लागू किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया है. कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें नौकरी की सुरक्षा प्रदान की जाए, सभी लंबित अनुबंधों का तत्काल नवीनीकरण किया जाए और बकाया मानदेय का भुगतान किया जाए. इसके अलावा, गलत नियमों एवं शर्तों तथा प्रतिकूल सेवा टिप्पणियों को रद्द कर संशोधित अनुबंध आदेश जारी करने की मांग भी की गई है.
* ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण में अहम भूमिका
महाउमेद अभियान के कर्मचारी ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों को मजबूत बनाने, महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और ग्रामीण परिवारों की आजीविका में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इसके बावजूद कर्मचारियों का कहना है कि उनकी अपनी नौकरी की सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक स्थिरता से जुड़े मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं. इन्हीं समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर कर्मचारियों ने एकजुट होकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की है. संगठन ने स्पष्ट किया है कि जब तक मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेकर उन्हें लागू नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा. संगठन ने सरकार से मामले को गंभीरता से लेकर तत्काल उचित निर्णय लेने की अपील की है.
* इन पदाधिकारियों के नेतृत्व में आंदोलन
अनिश्चितकालीन हड़ताल का नेतृत्व उमेद महाराष्ट्र राज्य महिला एवं कर्मचारी संघ के अध्यक्ष प्रभाकर गावंडे के साथ मालू देशमुख, चेतना लाटकर, रूपाली नाकाड़े, नीरज नाकाते, बलवीर मुंडे, संदीप दाभाड़े, स्वाति मोरे और किरण महाजन ने किया. आंदोलन में महादेव शेलके, किशोर कोल्हे, भागवत मोरे, जयश्री फसाटे, निकिता बोरकर, शिल्पा भोसकर, भारती चौधरी, पंचशीला भगत, सुप्रिया भुरभुरे, अमोल देवलासी, अजय कुलथे, सुचिता ठाकरे, रश्मि कुंभलवार, प्रवीण शाह, सुषमा कोकाटे, अमोल पेठे, प्रवीण रायबोले, अजय सरदार, संदीप गजभिये, सागर वासनकर, सुभाष तांबे, संजय नाकतोड़े, श्रीकांत ठाकरे, मंगेश आकोटकर, स्वप्निल रोहणकर, सुदर्शन साधने, प्रियंका ठाकरे, रोशनी धावत, सविता बहादुरे, सविता थेटे, दीपाली गोरडे और रूपाली डहाके सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी शामिल हुए. कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं होता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी. अब इस आंदोलन को लेकर सरकार और संबंधित प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर सभी की नजरें टिकी हैं.





