एक महीने बाद भी आग के कारणों पर पर्दा

डफरिन अग्निकांड

* जांच समिति की रिपोर्ट सरकार को सौंपी, लेकिन सार्वजनिक नहीं
* फायर फोरेंसिक रिपोर्ट का भी इंतजार
अमरावती /दि. 25- जिला महिला अस्पताल (डफरिन) के एसएनसीयू में लगी भीषण आग की घटना को एक महीना पूरा हो गया है, लेकिन अब तक आग लगने और वेंटिलेटर फटने की वास्तविक वजह सामने नहीं आ सकी है. हादसे में वेंटिलेटर फटने के बाद आग लग गई थी, जिसमें तीन नवजात बच्चों की मौत हुई थी. घटना के बाद गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है, लेकिन रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किए जाने से हादसे के कारणों को लेकर अब भी कई सवाल अनुत्तरित हैं. वहीं, इस मामले में अहम मानी जा रही फायर फोरेंसिक रिपोर्ट भी अब तक प्राप्त नहीं हुई है.
* 7 सितंबर को सरकार को सौंपी गई थी रिपोर्ट
घटना के बाद पब्लिक हेल्थ कमिश्नर संजय कटकरे की अध्यक्षता में 11 सदस्यीय जांच समिति गठित की गई थी. समिति ने जांच पूरी करने के बाद 7 सितंबर को सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी. रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग और लोक निर्माण विभाग के कुछ अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई भी की गई. हालांकि, समिति की रिपोर्ट में आग लगने और वेंटिलेटर फटने की वास्तविक तकनीकी वजह क्या बताई गई है, यह अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है. इसके चलते हादसे की असली वजह को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है.
* संबंधित कंपनियों पर क्या कार्रवाई हुई?
जांच समिति की रिपोर्ट के बाद 9 सितंबर को प्रशासन की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में वेंटिलेटर निर्माता शिलर कंपनी तथा अस्पताल के उपकरणों के रखरखाव का ठेका लेने वाली एओवी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश किए जाने की जानकारी दी गई थी. दोनों कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने और दोषी ठहराए जाने की सिफारिश का उल्लेख भी किया गया था. लेकिन इस सिफारिश के बाद संबंधित कंपनियों के खिलाफ वास्तव में क्या कार्रवाई की गई, इसकी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है. प्रशासन की ओर से इस संबंध में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है.
* जांच समिति के दौरे पर भी सवाल
जांच समिति की रिपोर्ट सरकार को सौंपे हुए करीब 20 दिन हो चुके हैं. इसके बावजूद रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है. ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि जांच समिति के कितने सदस्य डफरिन अस्पताल पहुंचे थे और उन्होंने घटनास्थल का कितनी बार निरीक्षण किया. समिति ने मौके पर कितना समय बिताया और वहां किन तकनीकी पहलुओं का निरीक्षण किया, इसकी जानकारी रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही सामने आने की उम्मीद है.
* फायर फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार
दूसरी ओर, पुलिस ने अग्निकांड में नवजात बच्चों की मौत के मामले में जांच शुरू कर दी है. इसी जांच के तहत नागपुर के फायर फोरेंसिक विशेषज्ञ नीलेश उकुंडे ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आग लगने के संभावित कारणों की जांच की है. फायर फोरेंसिक रिपोर्ट को इस मामले की अहम कड़ी माना जा रहा है. इस रिपोर्ट से आग किस वजह से लगी, वेंटिलेटर फटने के पीछे क्या तकनीकी कारण था और आग तेजी से फैलने की परिस्थितियां क्या थीं, जैसे सवालों पर महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है.
* एक महीने बाद भी रिपोर्ट का इंतजार क्यों?
घटना को एक महीना बीत चुका है, लेकिन फायर फोरेंसिक रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई है. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि रिपोर्ट आखिर किस स्तर पर लंबित है और इसे सार्वजनिक करने में देरी क्यों हो रही है. डफरिन अग्निकांड में तीन नवजातों की मौत के बाद परिवारों को हादसे की वास्तविक वजह जानने का इंतजार है. जांच समिति की रिपोर्ट और फायर फोरेंसिक रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस हादसे के लिए कौन-से तकनीकी, प्रशासनिक या रखरखाव संबंधी कारण जिम्मेदार थे और संबंधित कंपनियों तथा अधिकारियों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाती है.

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