डफरीन अग्निकांड के बाद हरकत में प्रशासन
अस्पताल में हुआ फायर सेफ्टी सिस्टम का लाइव डेमो

* जली हुई एनआईसीयू यूनिट फॉरेंसिक टीम ने की सील
* विधायक खोडके दम्पति ने किया डफरीन अस्पताल का दौरा
* स्वास्थ्य आयुक्त डॉ. संजय काटकर ने देर रात तक की पूछताछ, नागपुर रवाना
अमरावती/दि.27 – जिला महिला अस्पताल (डफरीन) के एनआईसीयू एवं एसएनसीयू विभाग में गत सोमवार तड़के हुए भीषण अग्निकांड के बाद प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और विभिन्न जांच एजेंसियां पूरी तरह सक्रिय हो गई हैं. तीन नवजात शिशुओं की दर्दनाक मौत और कई बच्चों के प्रभावित होने की घटना के बाद जहां एक ओर जांच प्रक्रिया तेज कर दी गई है, वहीं दूसरी ओर भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अस्पताल की अग्निसुरक्षा व्यवस्था का व्यापक परीक्षण और प्रशिक्षण अभियान शुरू किया गया है.
इसी कड़ी में गुरुवार दोपहर डफरीन अस्पताल परिसर में फायर सेफ्टी सिस्टम का विशेष प्रात्यक्षिक (डेमो) आयोजित किया गया, जबकि दूसरी ओर फॉरेंसिक विभाग ने आग से प्रभावित एनआईसीयू कक्ष को औपचारिक रूप से सील कर दिया. वहीं राज्य सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय जांच समिति के अध्यक्ष एवं स्वास्थ्य आयुक्त डॉ. संजय काटकर भी प्रारंभिक जांच पूरी कर नागपुर रवाना हो गए हैं, जहां वे अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे.
* फायर सेफ्टी सिस्टम का लाइव डेमो, डॉक्टरों और स्टाफ को दिया गया प्रशिक्षण
अग्निकांड के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवालों के बीच गुरुवार दोपहर 12.30 से 1 बजे के बीच डफरीन अस्पताल में विशेष फायर सेफ्टी डेमो आयोजित किया गया. अस्पताल में अग्निशमन व्यवस्था की देखरेख करने वाली अमरावती फायर सर्विसेस (एएफएस) के संचालक विदित आवारे ने अपनी कंपनी द्वारा स्थापित फायर सेफ्टी उपकरणों, अलार्म सिस्टम और स्प्रिंकलर नेटवर्क का प्रत्यक्ष प्रदर्शन किया. डेमो के दौरान कृत्रिम रूप से धुआं और आग जैसी स्थिति निर्मित की गई. जैसे ही धुएं का स्तर बढ़ा, छत पर लगे ऑटोमैटिक स्प्रिंकलर सक्रिय हो गए और पानी की तेज बौछार शुरू हो गई. इसके साथ ही फायर अलार्म और अन्य अग्निशमन उपकरण भी स्वतः कार्य करने लगे. इस प्रदर्शन के माध्यम से यह दिखाया गया कि आपातकालीन स्थिति में सिस्टम किस प्रकार काम करता है. इस अवसर पर डॉक्टरों, नर्सों और मेडिकल स्टाफ को आग लगने की स्थिति में मरीजों को सुरक्षित निकालने, शुरुआती स्तर पर आग पर नियंत्रण पाने और राहत एवं बचाव कार्यों के संबंध में विस्तृत मार्गदर्शन भी दिया गया. इस कार्यक्रम में जिला शल्य चिकित्सक डॉ. विनोद पवार, मनपा के मुख्य अग्निशमन अधिकारी धीरज हंबर्डे, अग्निशमन अधीक्षक अजय पंधरे, फायरमैन हर्षद दहातोंडे, प्रेमानंद सोनकांबले, संदीप रामेकर, अमोल सोलंकी सहित अस्पताल का चिकित्सकीय एवं प्रशासनिक स्टाफ उपस्थित रहा.

* विधायक खोडके दम्पति ने निरीक्षण कर जारी किए निर्देश
फायर डेमो से पूर्व सुबह करीब 11.30 बजे अमरावती विधानसभा क्षेत्र की विधायक सुलभा खोडके तथा विधान परिषद सदस्य एवं राष्ट्रवादी कांग्रेस नेता संजय खोडके ने डफरीन अस्पताल का दौरा किया. विधायक खोडके दंपत्ति ने अग्निकांड में पूरी तरह जल चुके एनआईसीयू कक्ष का निरीक्षण किया और घटना से संबंधित रिकॉर्ड एवं दस्तावेजों का अवलोकन किया. इसके बाद उन्होंने जिला शल्य चिकित्सक डॉ. विनोद पवार, अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, देखरेख कर्मचारियों तथा दमकल विभाग के अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक की.
बैठक में आपदा प्रबंधन, अग्निसुरक्षा, अस्पताल की तकनीकी व्यवस्थाओं और भविष्य की सुरक्षा योजनाओं पर चर्चा की गई. इस दौरान विधायक सुलभा खोडके और एमएलसी संजय खोडके ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगहों पर किसी भी प्रकार की लापरवाही या कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने सभी संबंधित विभागों को जिम्मेदारी के साथ कार्य करने और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. इस समय अकोला स्वास्थ्य सेवा उपसंचालक सुशील कुमार वाघचौरे, जिला शल्य चिकित्सक एवं डफरीन अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डॉ. विनोद पवार, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अमोल नरोटे, लोक निर्माण विभाग के उपअभियंता एन. प्रकाश रेड्डी, विद्युत शाखा के उपअभियंता विनोद गहुकर, शाखा अभियंता गुल्हाने, मनपा के मुख्य अग्निशमन अधिकारी धीरज हंबर्डे, अजय पंधरे आदि उपस्थित थे.
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* फॉरेंसिक टीम ने जली हुई एनआईसीयू यूनिट को किया सील
उधर, जांच प्रक्रिया के महत्वपूर्ण चरण के तहत गुरुवार सुबह लगभग 10 बजे फॉरेंसिक विभाग की टीम ने अग्निकांड में प्रभावित एनआईसीयू कक्ष को औपचारिक रूप से सील कर दिया. फॉरेंसिक विशेषज्ञ पिछले दो दिनों से घटनास्थल की सूक्ष्म जांच, नमूना संग्रह और तकनीकी परीक्षण कर रहे थे. प्राथमिक जांच पूरी होने के बाद कक्ष को सील कर सुरक्षित रखा गया ताकि आगे की वैज्ञानिक जांच प्रभावित न हो. सीलिंग प्रक्रिया के दौरान जिला शल्य चिकित्सक डॉ. विनोद पवार, एसएनसीयू विभाग प्रमुख डॉ. प्रीति इंगले, जिला सामान्य अस्पताल के प्रशासकीय अधिकारी डॉ. विनोद चव्हाण, कार्यालय अधीक्षक संतोष सत्तुरवार, बालरोग विशेषज्ञ डॉ. चेतन चव्हाण, प्रशासकीय अधिकारी संदीप तारगे, अधिसेविका अनिता राठोड़, परिसेविका नलिनी पिंजरकर, अधिपरिचालक पंकज नांदुरकर, कक्ष सेविका अर्चना डहाके तथा सुरक्षा रक्षक वसंत दुमने उपस्थित रहे और उनकी उपस्थिति में आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की गई.
अस्पताल के प्रशासकीय अधिकारी संदीप तारगे ने बताया कि फॉरेंसिक जांच पूरी होने तक संबंधित कक्ष को सील रखा जाएगा. साथ ही अस्पताल प्रशासन ने चौथी मंजिल पर स्थित एक अन्य कक्ष में अस्थायी रूप से एनआईसीयू एवं एसएनसीयू सेवाएं शुरू करने की तैयारी भी प्रारंभ कर दी है ताकि नवजात शिशुओं के उपचार में कोई बाधा न आए.
* स्वास्थ्य आयुक्त नागपुर रवाना, देर रात तक चली पूछताछ
डफरीन अग्निकांड की जांच के लिए राज्य सरकार और स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर द्वारा गठित सात सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति के अध्यक्ष एवं राज्य के स्वास्थ्य आयुक्त डॉ. संजय काटकर बुधवार को अमरावती पहुंचे थे. उन्होंने पूरे दिन जिलाधिकारी कार्यालय में रहकर मामले से जुड़े विभिन्न पक्षों की जानकारी ली. इसके बाद देर रात लगभग एक बजे तक अस्पताल के डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ, सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), महावितरण, विद्युत विभाग तथा अस्पताल की फायर सेफ्टी व्यवस्था संभालने वाली एजेंसियों के प्रतिनिधियों से विस्तृत पूछताछ की. पूछताछ के दौरान जिलाधिकारी आशीष येरेकर सहित जिला प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे. घटना के तकनीकी, प्रशासनिक और मानवीय पहलुओं पर विस्तृत जानकारी एकत्र की गई. जिसके बाद गुरुवार सुबह डॉ. संजय काटकर नागपुर के लिए रवाना हो गए. जानकारी के अनुसार उनका कार्यालय फिलहाल अस्थायी रूप से नागपुर स्थानांतरित किया गया है. ऐसे में डॉ. काटकर अब नागपुर स्थित अपने अस्थायी कार्यालय में बैठकर डफरीन अग्निकांड की विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार करेंगे, जिसे आगामी दिनों में राज्य सरकार को सौंपा जाएगा.





