आमनेर किला खतरे में
नदी-पात्रों में रेत तस्करों का आतंक

* राजस्व विभाग ने किए नियम दरकिनार
* 25 गांवों में पानी के लिए हाहाकार
अमरावती/दि.22 – तापी और गडगा नदी पात्रों में रेत तस्करों की मनमानी के कारण अब ऐतिहासिक आमनेर किला खतरे में आ गया है. प्रशासकीय उदासीनता भी इसके लिए जिम्मेदार कही जा सकती है. दोनों नदी के पात्र से रात-दिन अमाप बालू उत्खनन के कारण ऐतिहासिक वास्तु खतरे में पड गई है.
जेसीबी और पोकलैंड जैसे भारी मशीनों का उपयोग कर तापी नदी का पात्र रेत से खाली किया जा रहा है. महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश दोनों प्रांतों का प्रशासन आंख मिचकर बैठा है. जिससे नागरिक पूछ रहे हैं कि, इस लूटपाट को सरकार की मूक सहमति तो नहीं है?
* बांध कर दिया खाली
– रेत तस्करों की हिम्मत सभी हदे पार कर रही है. तापी नदी सूखी होने से वहां से बालू उत्खनन सरल करने के लिए पास के सरकारी बांध का पानी नदी-पात्र में छोडा गया है. जिसके कारण बांध का जलसंग्रह खत्म हो गया है. किसान सिंचाई और जानवर पेयजल से वंचित हो गए है.
– ऐन गर्मियों के दिनों में 20-25 गांवों में तीव्र जलसंकट का सामना ग्रामीण कर रहे हैं. गंभीर मामला रहने पर भी मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिला प्रशासन और महाराष्ट्र स्थानीय राजस्व विभाग द्वारा कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही, यह समझ से परे हैं.
* नियम दरकिनार
– बालू उत्खनन के लिए नदी-पात्र में जेसीबी और पोकलैंड का इस्तेमाल कानूनन प्रतिबंधित है. ऐसे में मध्य प्रदेश की सीमा पर यह काला कामकाज धडल्ले से शुरु है.
– एक साथ 8 से 10 बडे ट्रक पोकलैंड और ट्रैक्टर लगाकर नदी का अस्तित्व खत्म किया जा रहा है. उत्खनन की गई रेत महाराष्ट्र के साथ-साथ मध्य प्रदेश के मार्केट में गैरकानूनी रुप से पहुंचाई जा रही है.
* पूर्व जिप सदस्य का कहना
जिला परिषद के पूर्व सदस्य श्रीपाल पाल ने कहा कि, राज्य कोई भी हो, जेसीबी और पोकलैंड जैसी भारी मशीनों से रेत उत्खनन नहीं किया जा सकता. रेत तस्करों के कारण तापी नदी की अस्तित्व खतरे में पड गया है. बुरहानपुर और अमरावती के जिलाधिकारी का इस बारे में निवेदन देकर ध्यान दिलाया जाएगा.





