यौन शोषण अश्लील वीडियो वायरल कांड का एक और कटु सत्य

8 में से 3 आरोपी है बेहद पढे-लिखे व उच्च शिक्षित

* अयान बीएससी प्रथम वर्ष, एफाज एमएससी फिजिक्स और तबरेज है इंजीनियर
परतवाड़ा/अचलपुर/दि.25 – परतवाड़ा-अचलपुर में सामने आए नाबालिग किशोरियों के कथित यौन शोषण और अश्लील वीडियो वायरल कांड में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं. अब तक की जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि मामले में शामिल अधिकांश आरोपी पढ़े-लिखे हैं और तकनीकी रूप से दक्ष होने के कारण उन्होंने सोशल मीडिया, मोबाइल डेटा और डिजिटल माध्यमों का सुनियोजित इस्तेमाल किया. इसी वजह से विशेष जांच दल (एसआईटी) अब तकनीकी साक्ष्यों के गहन विश्लेषण पर केंद्रित होकर आरोपियों से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ कर रही है.
जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी अयान बीएससी प्रथम वर्ष का छात्र है. उसके सोशल मीडिया पर लगभग 18 हजार फॉलोअर्स बताए जा रहे हैं. पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर सक्रियता और रील संस्कृति का इस्तेमाल उसने प्रभाव जमाने और संपर्क बढ़ाने के लिए किया. गिरफ्तार आरोपी एफाज खान फिजिक्स में एमएससी है और कोचिंग क्लास संचालित करता है. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कोचिंग के नाम पर वहां और क्या गतिविधियां संचालित होती थीं. वहीं आरोपी तबरेज इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर बताया जा रहा है. जांच एजेंसियों का मानना है कि तकनीकी जानकारी का उपयोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, डेटा प्रबंधन और डिजिटल साक्ष्यों को नियंत्रित करने में किया गया हो सकता है.
बता दें कि, अब तक इस मामले में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं. पहली शिकायत में पुलिस स्वयं फिर्यादी है, जबकि दूसरी शिकायत एक पीड़िता और उसकी मां की ओर से दर्ज कराई गई है. शिकायत में उल्लेख है कि आरोपी उजेर स्कूल और कोचिंग आते-जाते समय पीड़िता का पीछा करता था. इस आधार पर उजेर के खिलाफ बीएनएस की संबंधित धाराओं तथा पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है.
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अब तक करीब 1 लाख 30 हजार फोटो का विश्लेषण किया जा रहा है. एसआईटी प्रमुख डॉ. शुभमकुमार के अनुसार, फिलहाल 8 पीड़ित किशोरियों की पहचान हुई है, जबकि 18 अश्लील वीडियो और 39 आपत्तिजनक छायाचित्र जांच एजेंसियों के हाथ लगे हैं. प्रारंभिक दावों में जहां 180 से 300 पीड़िताओं और सैकड़ों वीडियो की चर्चा थी, वहीं अब तक के तकनीकी परीक्षण में इतनी सामग्री सामने नहीं आई है.
ज्ञात रहे कि, मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य में पहली बार इतनी बड़ी एसआईटी गठित की गई है, जिसमें लगभग 45 अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं. सामान्यतः एसआईटी में 10 से 12 सदस्य होते हैं, लेकिन इस मामले की संवेदनशीलता और प्रारंभिक दावों की भयावहता को देखते हुए विशेष रूप से बड़ा दल गठित किया गया. जांच में लापरवाही बरतने के आरोप में तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है, जबकि तीन अन्य को मुख्यालय से संबद्ध किया गया है. पुलिस अयान द्वारा दी जा रही हर जानकारी का क्रॉस वेरिफिकेशन कर रही है. जांच में यह भी सामने आया है कि अब तक मिले अधिकांश वीडियो और रील्स में केवल अयान ही दिखाई देता है. अन्य आरोपियों की प्रत्यक्ष मौजूदगी वाले वीडियो अभी तक बरामद नहीं हुए हैं.
पुलिस का कहना है कि पीड़िताओं की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और किसी भी दबाव में आए बिना पीड़ित परिवार आगे आकर शिकायत दर्ज कराएं. इस बीच, फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट और जब्त डिजिटल उपकरणों की जांच पर पूरे जिले की नजरें टिकी हैं. आने वाले दिनों में यही रिपोर्ट तय करेगी कि यह मामला प्रारंभिक आशंकाओं से कहीं अधिक गंभीर है या फिर इसके पीछे फैलाए गए दावों और वास्तविक डिजिटल साक्ष्यों में बड़ा अंतर है.

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