बोरवेल पर रोक से निर्माण क्षेत्र को झटका, करोड़ों के प्रोजेक्ट अटके
कलेक्टर के आदेश से बिल्डर, इंजीनियर और ठेकेदार परेशान

क्रेडाई के 40 से 50 प्रोजेक्ट प्रभावित होने की आशंका
सीमेंट-लोहा कारोबार पर भी संकट
अमरावती/दि.14 – जिले में इस साल पैदा हुई भीषण सूखे की स्थिति और जलसंकट को देखते हुए जिलाधिकारी आशीष येरेकर ने नए बोरवेल और कुएं खोदने तथा पानी निकालने पर प्रतिबंध लगा दिया है. प्रशासन का उद्देश्य उपलब्ध जलस्रोतों को सुरक्षित रखना और पानी की कमी पर नियंत्रण करना है. हालांकि, इस निर्णय का असर अब अमरावती के निर्माण क्षेत्र पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. निर्माण व्यवसायियों, इंजीनियरों और ठेकेदारों का कहना है कि पानी की उपलब्धता बाधित होने से नए निर्माण कार्य शुरू करना मुश्किल होगा. इससे न केवल करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट प्रभावित हो सकते हैं, बल्कि हजारों स्थानीय और प्रवासी मजदूरों के रोजगार पर भी संकट मंडरा सकता है.
दशहरा और दीपावली के त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में लोग नए घरों का निर्माण शुरू करने की योजना बनाते हैं. इस अवधि में निर्माण क्षेत्र में काम बढ़ने से मजदूरों, ठेकेदारों और निर्माण सामग्री विक्रेताओं को रोजगार मिलने की उम्मीद रहती है. लेकिन नए बोरवेल पर प्रतिबंध के कारण निर्माण कार्यों की योजना प्रभावित होने की आशंका है. ऐसे में जलसंकट से निपटने के लिए उठाए गए कदमों और निर्माण क्षेत्र की जरूरतों के बीच संतुलन बनाने की मांग उठने लगी है.
* क्रेडाई के 40 से 50 प्रोजेक्ट प्रभावित होने की आशंका
निर्माण क्षेत्र से जुड़े संगठन क्रेडाई के अध्यक्ष राजन पाटिल के मुताबिक अमरावती शहर में फिलहाल पानी की आपूर्ति पर्याप्त है. उनका कहना है कि प्रशासन को पानी की बर्बादी रोकने और उपलब्ध जल का उचित प्रबंधन करने पर अधिक ध्यान देना चाहिए था. पाटिल ने आशंका जताई कि इस आदेश के कारण उठएऊ-ख से जुड़े 40 से 50 निर्माण प्रोजेक्टों का काम प्रभावित हो सकता है. यदि निर्माण कार्य रुकते हैं, तो इससे मजदूरों, कर्मचारियों और संबंधित व्यवसायों के सामने रोजगार का संकट पैदा होगा. उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों के लिए पानी आवश्यक है. ऐसे में प्रतिबंधों के कारण नए प्रोजेक्ट शुरू करने में कठिनाई आ सकती है और त्योहारों के दौरान निर्माण गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीदों को झटका लग सकता है.
* 150 से 200 निर्माण मंजूरी की फाइलें लंबित
निर्माण व्यवसायियों के अनुसार, अमरावती महानगरपालिका के नगर रचना विभाग में नए निर्माण की मंजूरी से संबंधित लगभग 150 से 200 फाइलें लंबित हैं. पिछले कुछ समय से विभिन्न कारणों के चलते इन प्रस्तावों पर निर्णय का इंतजार किया जा रहा था. व्यवसायियों का कहना है कि अब इन फाइलों को मंजूरी मिलने की उम्मीद बढ़ रही थी, लेकिन इसी बीच जिलाधिकारी का नया आदेश सामने आ गया. इससे निर्माण की अनुमति मिलने के बाद भी पानी की व्यवस्था नहीं होने पर वास्तविक काम शुरू करना कठिन हो सकता है. इंजीनियर और निर्माण व्यवसायी अभय पांडे के मुताबिक, पिछले दो महीनों से नगर रचना विभाग में निर्माण मंजूरी से संबंधित कामकाज को लेकर असमंजस की स्थिति है. त्योहारों के मौसम में निर्माण गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन अब इंजीनियरों से लेकर मजदूरों तक में चिंता है.
* महंगाई के बीच मजदूरों की रोजी-रोटी पर संकट
निर्माण क्षेत्र पहले ही महंगाई और बढ़ती लागत से जूझ रहा है. ऐसे में दशहरा और दीपावली के दौरान नए निर्माण कार्य शुरू होने से ठेकेदारों, मजदूरों और अन्य संबंधित लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद थी. निर्माण ठेकेदार प्रकाश दातार का कहना है कि यदि निर्माण कार्य प्रभावित होते हैं, तो पहले से आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है. निर्माण कार्यों में देरी होने से ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ेगा. अमरावती और बडनेरा सहित जिले के शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मजदूर निर्माण कार्यों पर निर्भर हैं. इनमें बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से आए प्रवासी मजदूर भी शामिल हैं. निर्माण स्थल बंद होने या काम कम होने की स्थिति में इन मजदूरों की दैनिक आय प्रभावित हो सकती है.
* सीमेंट, लोहा, रेत और गिट्टी कारोबार पर भी असर
निर्माण उद्योग का दायरा केवल बिल्डर, इंजीनियर, ठेकेदार और मजदूरों तक सीमित नहीं है. इससे कई अन्य व्यवसाय भी जुड़े हुए हैं. निर्माण कार्यों में कमी आने पर सीमेंट, लोहा, ईंट, रेत, गिट्टी और हार्डवेयर की मांग घटने की आशंका है. इसके अलावा निर्माण सामग्री की ढुलाई करने वाले ट्रक, डंपर और ट्रैक्टर चालकों की आय पर भी असर पड़ सकता है. नए प्रोजेक्टों में देरी से आर्किटेक्ट, इंजीनियर और अन्य तकनीकी पेशेवरों की कार्ययोजनाएं प्रभावित हो सकती हैं. हार्डवेयर व्यवसाय से जुड़े हरभजन सिंह सलूजा का कहना है कि निर्माण उद्योग पानी पर निर्भर है. यदि निर्माण कार्य रुकते हैं, तो इस क्षेत्र से जुड़े सहायक कारोबार भी प्रभावित होंगे. लंबे समय तक काम ठप रहने की स्थिति में कारोबारियों पर बैंक की किस्तों और ब्याज का बोझ बढ़ सकता है.
* सूखे की मार और रोजगार का दोहरा संकट
जिले में सूखे के कारण ग्रामीण अर्थव्यवस्था पहले से प्रभावित है. ऐसे में निर्माण क्षेत्र में कामकाज घटने से ग्रामीण और शहरी मजदूरों के सामने दोहरा संकट पैदा होने की आशंका जताई जा रही है. निर्माण उद्योग स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इस क्षेत्र में गतिविधियां कम होने का असर मजदूरों की आय से लेकर निर्माण सामग्री की बिक्री और परिवहन व्यवसाय तक दिखाई दे सकता है. निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि जलसंकट की गंभीरता को देखते हुए पानी के संरक्षण के उपाय जरूरी हैं, लेकिन साथ ही निर्माण कार्यों के लिए पानी की वैकल्पिक व्यवस्था और नियमों में व्यावहारिक समाधान तलाशने की जरूरत है. अब सवाल यह है कि जलसंकट से निपटने के लिए प्रशासन की ओर से लागू प्रतिबंधों के बीच निर्माण क्षेत्र और उससे जुड़े हजारों लोगों के रोजगार को सुरक्षित रखने के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी.





