संविधान की पीठ में खंजर घोंपने वाली व्यवस्था से सावधान रहें

कवि दिगंबर झाड़े का प्रतिपादन

बडनेरा /दि.24- वरिष्ठ आंबेडकरी कवि दिगंबर झाड़े ने कहा कि भारत का संविधान पूरे देश को समानता, न्याय और बंधुत्व का मार्ग दिखाता है, लेकिन कुछ देश विरोधी और असामाजिक तत्व समाज में धर्म और जाति के नाम पर वैमनस्य फैलाकर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं. ऐसे लोगों और संविधान की पीठ में खंजर घोंपने वाली ताकतों से समाज को सतर्क रहना होगा तथा विभाजनकारी प्रवृत्तियों का एकजुट होकर मुकाबला करना होगा. वे आंबेडकरी आंदोलन के समर्पित कार्यकर्ता, पथनाट्यकार, कवि, गाथा प्रकाशन के संचालक तथा साप्ताहिक वज्जी संदेश के सह-संपादक विलास थोरात के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर रहे थे.
कार्यक्रम में साप्ताहिक वज्जी संदेश के उप-संपादक, स्वतंत्र पत्रकार, कवि एवं सामाजिक कार्यकर्ता आर.एस. तायडे ने अपनी कविता प्रस्तुत करने से पूर्व विलास थोरात को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, सुखद एवं दीर्घायु जीवन की कामना की. उन्होंने कहा कि वृद्धाश्रमों और पुनर्वास केंद्रों की बढ़ती संख्या समाज के लिए चिंता का विषय है और यह सामाजिक संवेदनाओं में आ रही कमी को दर्शाती है. इस अवसर पर वज्जी संदेश की प्रधान संपादक मायाताई वासनिक, वरिष्ठ कवि एवं ग़ज़लकार प्रा. संजय घरडे, प्रसिद्ध ग़ज़लकार डॉ. नंदकिशोर दामोधरे, कवि प्रा. गणेश लाडगे तथा युवा ग़ज़लकार देवीलाल रौराले सहित अनेक साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया. आधार शहरी बेघर निवारा केंद्र, बडनेरा के संचालक राजू बसवनाथे, व्यवस्थापिका ज्योति राठौड़ तथा केंद्र के निवासियों ने भी विलास थोरात को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं. वहीं, सोशल मीडिया और दूरभाष के माध्यम से शुभकामनाएं देने वाले सभी मित्रों का विलास थोरात ने आभार व्यक्त किया.
कार्यक्रम की शुरुआत भारत रत्न डॉ. बाबासाहब आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं त्रिशरण-पंचशील के साथ हुई. उपस्थित अतिथियों ने विलास थोरात का शाल एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया तथा जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं. कार्यक्रम का संचालन प्रा. गणेश लांडगे ने किया, जबकि कवि सम्मेलन का संचालन स्वयं विलास थोरात ने किया. अंत में साप्ताहिक वज्जी संदेश के कार्यकारी संपादक धर्मशील गेडाम ने आभार व्यक्त किया. कार्यक्रम की सफलता में रोहित घोंगडे का विशेष योगदान रहा.

Back to top button